बिहार शिक्षा सेवा के वरिष्ठ अधिकारी अजय कुमार सिंह के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में शिकंजा कस गया है। राज्य की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने उनके तीन प्रमुख ठिकानों पर एक साथ व्यापक तलाशी अभियान चलाया। प्रारंभिक जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान जांच एजेंसी को अजय कुमार सिंह के पास उनकी वैध आय के मुकाबले 3 करोड़ 43 लाख 78 हजार 300 रुपये की अतिरिक्त अचल एवं चल संपत्ति होने के प्राथमिक प्रमाण प्राप्त हुए हैं। यह राशि उनके आधिकारिक आय स्रोतों से लगभग 90.04 प्रतिशत अधिक पाई गई है। इस गंभीर वित्तीय हेरफेर के संबंध में आर्थिक अपराध इकाई थाने में कांड संख्या 19/26 के तहत आपराधिक मामला पंजीकृत किया गया था, जिसके बाद पटना स्थित विशेष निगरानी अदालत से विधिवत तलाशी वारंट प्राप्त करके कार्रवाई शुरू की गई।
तीन अलग-अलग परिसरों में एक साथ छापेमारी
जांच एजेंसी EOU की गठित विशेष टीमों ने 20 अगस्त 2026 को अजय कुमार सिंह से संबंधित तीन अलग-अलग परिसरों में एक साथ दबिश दी। इस समन्वित अभियान के तहत जिन स्थानों पर तलाशी ली गई, उनमें पटना के राजीव नगर थाना क्षेत्र अंतर्गत खाजपुरा, बीवी कॉलेज के समीप स्थित आकाशवाणी रोड पर चंद्रतारा भवन का रिहाइशी ठिकाना शामिल है। इसके अलावा मीठापुर स्थित बिहार मुक्त विद्यालयी शिक्षण एवं परीक्षा बोर्ड (BBOSE) कार्यालय परिसर में स्थित अजय कुमार सिंह का आधिकारिक कक्ष और बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम परोरा, पोस्ट सहना स्थित उनका पैतृक आवास भी छापेमारी के दायरे में रहा। तीनों परिसरों से बड़ी मात्रा में नकद राशि, कीमती आभूषण, अचल संपत्तियों की रजिस्ट्री के कागजात, बैंक पासबुक और कई तरह के निवेश से संबंधित दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पैतृक आवास बेगूसराय से नकद, गहने और भारी वाहन बरामद
बेगूसराय स्थित अजय कुमार सिंह के पैतृक घर पर हुई छानबीन में EOU अधिकारियों की टीम ने 15 लाख 50 हजार रुपये की नकद राशि जब्त की। इसके साथ ही वहां से लगभग 9 लाख 50 हजार रुपये अनुमानित मूल्य के सोने-चांदी के आभूषणों का विस्तृत ब्योरा तैयार किया गया। पैतृक मकान की तलाशी के दौरान अधिकारी के पिता के नाम पर दर्ज 11 भू-खंडों की रजिस्ट्री डीड, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की एक पासबुक और 6 ऐसी रसीदें मिली हैं जो आभूषणों की खरीद से जुड़ी हैं। इन खरीदारी रसीदों में गहनों का कुल मूल्य 5 लाख 50 हजार रुपये अंकित है। इसके अतिरिक्त, इस ग्रामीण परिसर में कई भारी और लग्जरी वाहन खड़े पाए गए, जिनमें 2 JCB मशीनें, 2 ट्रैक्टर, 1 महिंद्रा बोलेरो और 1 बड़ा डीजल जनरेटर (DG) सेट शामिल है। EOU की टीम इन सभी वाहनों के वास्तविक मालिकाना हक और खरीद के वित्तीय स्रोतों का सत्यापन कर रही है।
पटना आवास से 41 लाख के गहने और नोएडा में 60 लाख के फ्लैट का सुराग
पटना के खाजपुरा स्थित चंद्रतारा भवन ठिकाने पर चलाए गए सर्च ऑपरेशन के दौरान 10 लाख 38 हजार रुपये की नकद राशि बरामद की गई। इसके अलावा जांच दल ने 41 लाख 81 हजार 977 रुपये की कुल कीमत वाले बहुमूल्य आभूषणों की एक व्यापक सूची तैयार की है। तलाशी के दौरान अधिकारियों को दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के नोएडा सेक्टर-142 में स्थित एक प्रीमियम रियल एस्टेट प्रॉपर्टी से जुड़े कागजात मिले। इन दस्तावेजों के अनुसार, 1,442 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले यूनिट नंबर IT836 फ्लैट की बुकिंग कराई गई है, जिसके लिए अब तक 60 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। पटना के प्रसिद्ध अलंकार ज्वैलर्स से लगभग 10 लाख रुपये मूल्य के गहने खरीदने का एक बिल भी यहां से मिला है। पटना में उनका एक G+2 (तीन मंजिला) भव्य मकान भी पाया गया है, जिसकी अंदरूनी सजावट पर मोटी रकम खर्च की गई है। इस भवन के निर्माण और इंटीरियर डिजाइनिंग पर आई वास्तविक लागत का आकलन करने के लिए EOU इसका तकनीकी मूल्यांकन कराने की तैयारी में है।
8 बैंक खाते, LIC पॉलिसियां और गाड़ियों का काफिला
जांच अधिकारियों को विभिन्न राष्ट्रीयकृत और निजी बैंकों से संबंधित 8 बैंक खातों की पासबुक और एटीएम कार्ड प्राप्त हुए हैं। इन सभी बैंक खातों में कुल मिलाकर लगभग 18 लाख 50 हजार रुपये की जमा राशि पाई गई है। इसके अलावा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) और अन्य वित्तीय संस्थाओं से जुड़ी 5 अलग-अलग इंश्योरेंस पॉलिसियों के दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। अजय कुमार सिंह द्वारा म्यूचुअल फंड्स में किए गए वित्तीय निवेश के कागजात भी जांच एजेंसी के हाथ लगे हैं। पारिवारिक वाहनों में एक महिंद्रा स्कॉर्पियो कार और स्कूटी से संबंधित दस्तावेज भी तलाशी के दौरान EOU की टीम ने कब्जे में लिए हैं।
2005 से शुरू हुआ था प्रशासनिक सफर, शिक्षा विभाग को भेजी गई रिपोर्ट
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, अजय कुमार सिंह ने वर्ष 2005 में बिहार शिक्षा सेवा के तहत अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी के पद पर अपनी पहली सेवा योगदान दी थी। EOU की प्रारंभिक जांच का निष्कर्ष है कि बीते वर्षों के दौरान उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी आय के ज्ञात कानूनी साधनों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। जब्त किए गए तमाम कागजातों, बैंक स्टेटमेंट और प्रॉपर्टी दस्तावेजों का फोरेंसिक विश्लेषण जारी है। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय छानबीन आगे बढ़ने के साथ आय से अधिक संपत्ति की कुल राशि में और बड़ा इजाफा होने की प्रबल संभावना है। लोक सेवक के रूप में अपने पदीय कर्तव्यों के कथित उल्लंघन और इस आपराधिक मामले की पूरी विस्तृत रिपोर्ट उनके मूल शिक्षा विभाग को भी आधिकारिक तौर पर भेजी जा रही है ताकि विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रशासनिक कदम उठाए जा सकें।



















