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बहराइच में 32 साल पुराने तिहरे हत्याकांड पर फैसला, 5 दोषियों को उम्रकैद और जुर्मानाउत्तर प्रदेश
4 अक्तू॰ 2026, 3:03 pm (24 दिन पहले)· 2

बहराइच में 32 साल पुराने तिहरे हत्याकांड पर फैसला, 5 दोषियों को उम्रकैद और जुर्माना

उत्तर प्रदेश के बहराइच में एक विशेष अदालत ने 1994 के तिहरे हत्याकांड में पांच दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले की एक विशेष अदालत ने 32 साल पुराने एक सनसनीखेज तिहरे हत्याकांड में शनिवार को अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में नामजद पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। जुलाई 1994 में घटी इस वारदात में हमलावरों ने एक महिला को पेड़ से बांध दिया था और उसकी आंखों के सामने ही उसके पति, बेटे तथा दामाद पर जानलेवा हमला कर उनकी जान ले ली थी।

विशेष अदालत ने तय की सजा और जुर्माना

अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC-ST) अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश पवन कुमार शर्मा की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद महावीर, गिरधारी, विजयराज, गरीबे और राधेश्याम को दोषी ठहराया। अदालत ने इन पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के साथ ही प्रत्येक पर एक लाख 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि जुर्माने के रूप में वसूली जाने वाली कुल रकम का आधा हिस्सा पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता के रूप में सौंपा जाएगा। इसके अलावा अदालत ने निर्देश दिया कि यदि दोषी जुर्माने की राशि जमा करने में असमर्थ रहते हैं, तो उन्हें छह महीने का अतिरिक्त कारावास काटना होगा।

31 जुलाई 1994 को घर में घुसकर किया गया था हमला

अभियोजन की ओर से अदालत के समक्ष पेश किए गए विवरण के अनुसार, यह पूरी वारदात नानपारा कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चौवाइनपुरवा गांव में 31 जुलाई 1994 को हुई थी। उस दिन श्यामलाल, रामफल, गोपी, ढोढ़े, गिरधारी, महावीर, विजयराज, गरीबे और राधेश्याम एक राय होकर पीड़ित परिवार के घर में जबरन दाखिल हुए थे।

हमलावरों के हाथों में लाठी-डंडे और धारदार हथियार मौजूद थे। घर में घुसते ही उन्होंने परिवार पर हमला बोल दिया। इस हिंसक वारदात में गंभीर चोटें आने के कारण चिरकू, उनके बेटे संतराम और दामाद मायाराम की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद चिरकू की पत्नी सुमित्रा देवी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी।

पेड़ से बांधकर महिला के सामने की गई थी हत्याएं

सुमित्रा देवी ने पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में बताया था कि जब हमलावरों ने उनके घर पर धावा बोला, तो वह अपने पति को बचाने के लिए आगे बढ़ी थीं। हमलावरों ने उन्हें पकड़कर एक पेड़ से कसकर बांध दिया ताकि वह कोई मदद न मांग सकें। इसके बाद महिला की आंखों के सामने ही हमलावरों ने उनके पति चिरकू, बेटे संतराम और दामाद मायाराम को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इस तिहरे हत्याकांड से चौवाइनपुरवा गांव समेत पूरे बहराइच जिले में दहशत फैल गई थी।

सुनवाई के दौरान चार आरोपियों की हो चुकी थी मौत

घटना की जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। अभियोजन पक्ष की पैरवी कर रहे सरकारी वकील ने जानकारी दी कि मुकदमे की लंबी सुनवाई के दौरान चार मुख्य आरोपियों श्यामलाल, रामफल, गोपी और ढोढ़े की स्वाभाविक मृत्यु हो गई थी। उनकी मौत के बाद अदालत ने उनके खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही को समाप्त कर दिया था।

शनिवार देर शाम जब अदालत ने बचे हुए पांचों आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा का ऐलान किया, तो अदालत परिसर में उपस्थित पीड़ित परिवार के सदस्यों ने इस फैसले पर संतोष व्यक्त किया।

सवाल-जवाब

यह तिहरा हत्याकांड कब और कहां हुआ था?
यह वारदात 31 जुलाई 1994 को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित नानपारा कोतवाली क्षेत्र के चौवाइनपुरवा गांव में हुई थी।
इस हमले में किन लोगों की जान गई थी?
हमले में चिरकू, उनके बेटे संतराम और उनके दामाद मायाराम की मौत हो गई थी।
अदालत ने दोषियों पर क्या सजा और जुर्माना तय किया?
विशेष अदालत ने पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 1,15,000 रुपये का जुर्माना लगाया।
मुकदमे के दौरान कितने आरोपियों की मौत हुई थी?
लंबी सुनवाई के दौरान चार आरोपियों श्यामलाल, रामफल, गोपी और ढोढ़े की मौत हो गई थी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·24 दिन पहले

बचपन में जब नानपara के पास वाले गाँव में नानाजी के यहाँ गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने जाता था, तब इस तिहरे हत्याकांड की चर्चा वहाँ के हर चौपाल पर होती थी। बत्तीस साल तक न्याय का इंतज़ार करना उस माँ के लिए कितना भयानक रहा होगा, यह सोचकर ही रूह काँप जाती है। देर से ही सही, कम से कम उनवान को सजा तो मिली।

Arjun Mehta@arjun-mehta·24 दिन पहले

बत्तीस साल! एक माँ की आंखों के सामने पति, बेटे और दामाद को मार डाला और न्याय मिलने में तीन दशक लग गए। गनीमत है कि देर से ही सही, दोषियों को उम्रकैद मिली।

Ravikash Gupta@ravikash·24 दिन पहले

अर्जुन, न्याय मिलने में तीन दशक तो लगे, पर क्या वाकई पाँचों वही लोग हैं जो उस दिन थे? 32 साल में गवाह और सबूत सब बदल जाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·24 दिन पहले

बत्ती साल लग गए न्याय मिलने में, तब तक तो आधे आरोपी भी मर चुके होंगे। इसे जीत कहें या सिस्टम की नाकामी, समझ नहीं आता।

Rohan Verma@rohan-verma·24 दिन पहले

करन भाई, बात तो सौ टका सही है। उत्तर प्रदेश की अदालतों में मुकदमों की पेंडेंसी और तारीख पर तारीख का यह हाल वाकई सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

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