मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला धान की खेती के लिए जाना जाता है और यहां साल में दो बार धान उगाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ बरसों से पानी की कमी ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी थीं। जिले के बड़े हिस्से में खेती पूरी तरह बारिश पर टिकी है। इसी समस्या को दूर करने के मकसद से आज से ठीक तीन साल पहले, 22 फरवरी 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान बालाघाट के लामता क्षेत्र पहुंचे थे और एक माइक्रो पाइप इरिगेशन परियोजना का शुभारंभ किया था। उस वक्त किसानों को उम्मीद थी कि खेती में यह नई तकनीक उनकी तकदीर बदल देगी, लेकिन अब यही उम्मीद राख में बदल गई है, क्योंकि भाजपा नेता और जनपद पंचायत सदस्य भुवनेश्वर रजक और उनके दो साथियों ने इसी परियोजना से जुड़े प्लांट में आग लगा दी। फिलहाल आरोपी पुलिस हिरासत में हैं।
146 करोड़ की परियोजना से 55 गांवों को राहत मिलनी थी
जो गांव अब तक सूखे की चपेट में रहते थे और बारिश न होने पर खेती करना मुश्किल हो जाता था, उन्हीं गांवों के किसानों को राहत देने के लिए तीन साल पहले 146 करोड़ रुपये की प्रेशराइज्ड पाइप माइक्रो इरिगेशन परियोजना शुरू की गई थी। इस परियोजना से 55 गांवों के करीब 12 हजार किसानों को सीधा फायदा मिलने वाला था। लामता क्षेत्र की करीब 9630 हेक्टेयर जमीन इस परियोजना के जरिए सिंचित होनी थी। इसका लाभ सिर्फ खरीफ की फसल तक सीमित नहीं था, बल्कि रबी और जायद सीजन की खेती में भी किसानों को इससे फायदा मिलने वाला था।
नवंबर तक पूरा होना था काम, अब लगा बड़ा झटका
कार्यपालन यंत्री यू.एस. परते के मुताबिक यह बालाघाट की एकमात्र माइक्रो इरिगेशन परियोजना है और जिले के ग्रामीण इलाकों के लिए इसकी अहमियत बहुत ज्यादा है। परियोजना अपने आखिरी चरण में पहुंच चुकी थी और नवंबर के बाद से 55 गांवों के किसानों को इसका फायदा मिलना शुरू होने वाला था। लेकिन अब इस पूरी योजना पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है। परते ने बताया कि उन्हें शाम के वक्त जानकारी मिली कि प्लांट में आग लग गई है। यहां रखे करोड़ों रुपये के उपकरण जलकर राख हो गए। आग की चपेट में पाइप, मशीनरी और निर्माण सामग्री भी आई, जो पूरी तरह नष्ट हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और घंटों की मेहनत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।
स्थानीय विधायक बोले, यह नक्सलियों वाला तरीका है
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए स्थानीय विधायक मधु भगत ने कहा कि यह घटना बिल्कुल नक्सली स्टाइल में अंजाम दी गई है। उन्होंने कहा कि वसूली के लिए नक्सली संगठन भी अक्सर ऐसी ही वारदातों को अंजाम देते रहे हैं।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष का पलटवार, बड़ी मछलियां बच निकलने का आरोप
मामले पर कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष और बैहर विधायक संजय उइके ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार नहीं थी, तब पार्टी कार्यकर्ताओं की क्या स्थिति थी और अब सत्ता में आने के बाद उनकी क्या स्थिति हो गई है। उन्होंने राम मंदिर के चंदा घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में सिर्फ छोटी मछलियां ही पकड़ी जाती हैं, जबकि बड़ी मछलियां आसानी से बचकर निकल जाती हैं।
10 लाख की रंगदारी न मिलने पर प्लांट को बनाया निशाना
बालाघाट के पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने इस मामले की पूरी कड़ी साझा करते हुए बताया कि त्रिराज वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के पीएच-2 प्लांट में तैनात गार्ड अतुल बघेले ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के मुताबिक 1 जुलाई को सरपंच राजेश सिरसाम, जनपद सदस्य भुवनेश्वर रजक, राकेश दमाहे और उनके साथ 7 से 8 अन्य लोग प्लांट पर पहुंचे और प्रोजेक्ट मैनेजर से 10 लाख रुपये की मांग रखी। जब कंपनी की तरफ से यह रकम देने से इनकार कर दिया गया, तो आरोपी कथित तौर पर गुस्से में आ गए। शिकायत में बताया गया है कि राकेश दमाहे अपने साथ पेट्रोल से भरी एक केन लेकर आया था। इसी पेट्रोल को प्लांट में रखे पाइप और अन्य सामान पर छिड़ककर आग लगा दी गई।
रोकने आए गार्ड को जिंदा जलाने की कोशिश, बारिश के पानी से बचाई जान
आग लगाने से रोकने पहुंचे गार्ड अतुल बघेले पर भी आरोपियों ने कथित तौर पर पेट्रोल डालकर उसे जिंदा जलाने की कोशिश की, जिसमें उसके हाथ बुरी तरह झुलस गए। किसी तरह उसने बारिश के पानी से आग बुझाकर अपनी जान बचाई। घटना के दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर और वहां मौजूद अन्य कर्मचारी भी जान बचाकर मौके से भाग निकले। आगजनी में प्लास्टिक पाइप, एचडीपीई फिटिंग, वाल्व, पैनल, स्काडा सिस्टम और तीन कंटेनरों में रखा दूसरा सामान भी पूरी तरह जलकर नष्ट हो गया। कंपनी ने इस नुकसान का अनुमान करीब 4 से 5 करोड़ रुपये बताया है।
तीन आरोपी गिरफ्तार, कोर्ट ने भेजा तीन दिन की रिमांड पर
बालाघाट पुलिस ने सरपंच, जनपद सदस्य समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपियों को शुरुआत में दो दिन की रिमांड पर रखा गया था। इसके बाद 3 जुलाई को उन्हें माननीय न्यायालय के सामने पेश किया गया, जहां से उन्हें तीन दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। अब देखना यह है कि पूछताछ में आगे और कौन-कौन से खुलासे सामने आते हैं।













