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बारिश के दौरान आबादी वाले इलाकों में रेंगते दिखे सांप, मेरठ के वन अधिकारियों ने नागरिकों को दिए बचाव के जरूरी निर्देशभारत
26 अग॰ 2026, 1:43 pm (17 दिन पहले)· 5

बारिश के दौरान आबादी वाले इलाकों में रेंगते दिखे सांप, मेरठ के वन अधिकारियों ने नागरिकों को दिए बचाव के जरूरी निर्देश

मेरठ में लगातार बारिश की वजह से सांप और अजगर अपने प्राकृतिक ठिकानों से निकलकर रिहायशी कॉलोनियों में आ रहे हैं। वन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे खुद इन जीवों को पकड़ने का जोखिम न उठाएं और तुरंत प्रशिक्षित टीम को सूचित करें।

मानसूनी बारिश के मौसम में मेरठ के शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में जहरीले सांपों तथा विशालकाय अजगरों की मौजूदगी से स्थानीय निवासियों के बीच डर का माहौल बन गया है। पानी भर जाने के कारण ये वन्यजीव अपने प्राकृतिक बिलों से बाहर निकलने के लिए मजबूर हो रहे हैं। अचानक आबादी वाले इलाकों में रेंगते हुए जीवों के दिखने की घटनाओं में तेजी से इजाफा दर्ज किया गया है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

प्राकृतिक आवास जलमग्न होने से बस्तियों का रुख कर रहे जीव

वन विभाग की डीएफओ वंदना फोगाट ने इस स्थिति की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि बारिश के दौरान जब जलभराव होता है, तब सांप और अजगर अपने प्राकृतिक ठिकाने छोड़ सुरक्षित जगहों की तलाश में बस्तियों का रुख करने लगते हैं। अधिकारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में लोगों को घबराने के बजाय अत्यधिक सावधानी बरतने की सख्त जरूरत है। उन्होंने बताया कि जैसे ही किसी क्षेत्र में सांप दिखने की सूचना मिलती है, वन विभाग की प्रशिक्षित टीम तुरंत मौके पर पहुंचती है, जीव का सुरक्षित रेस्क्यू करती है और फिर उसे आबादी से काफी दूर सुरक्षित जंगलों में छोड़ देती है।

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अजगर और सांप को पकड़ने या छेड़ने का प्रयास न करें

अधिकारियों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि सांप या अजगर को खुद भगाने, पकड़ने या किसी भी तरह से छेड़ने की कोशिश कतई न करें। जब कोई जीव खुद को संकट में महसूस करता है, तभी वह इंसानों पर हमलावर होता है। मेरठ के लालकुर्ती बाजार, जागृति विहार और गंगानगर जैसे प्रमुख रिहायशी इलाकों में अजगर मिलने की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। हालांकि अजगर जहरीला नहीं होता है, लेकिन उसकी शारीरिक ताकत और जकड़ने का तरीका बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए अजगर देखने पर भी उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखना ही बुद्धिमानी है।

सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय तुरंत अस्पताल पहुंचें

वन विभाग ने स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर भी बेहद महत्वपूर्ण सलाह दी है। यदि किसी व्यक्ति को सांप काट लेता है, तो झाड़-फूंक या किसी भी प्रकार के अंधविश्वासी घरेलू उपचारों में समय गंवाना जानलेवा हो सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति को बिना कोई देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। समय पर डॉक्टरी इलाज और एंटी-वेनम इंजेक्शन मिलने से पीड़ित की जान बचाई जा सकता है। बरसात के इस मौसम में थोड़ी सी सजगता और सुरक्षित दूरी बनाए रखकर किसी भी बड़े हादसे को टाला जा सकता है।

सवाल-जवाब

मेरठ में बारिश के दौरान सांप और अजगर बस्तियों में क्यों आ रहे हैं?
जलभराव होने के कारण सांपों और अजगरों के प्राकृतिक ठिकाने और बिल पानी में डूब जाते हैं, जिससे सुरक्षित सूखी जगह की तलाश में वे रिहायशी इलाकों का रुख करते हैं।
सांप या अजगर दिखने पर स्थानीय निवासियों को क्या करना चाहिए?
लोगों को घबराने या जीव को खुद पकड़ने के बजाय उससे सुरक्षित दूरी बनानी चाहिए और तुरंत वन विभाग की रेस्क्यू टीम को सूचना देनी चाहिए।
क्या अजगर जहरीला होता है और इससे क्या खतरा है?
अजगर जहरीला नहीं होता है, लेकिन उसकी शारीरिक ताकत और शिकार को जकड़ने का तरीका इंसान के लिए गंभीर चोट का कारण बन सकता है।
मेरठ के किन इलाकों में अजगर निकलने की घटनाएं दर्ज की गई हैं?
मेरठ के लालकुर्ती बाजार, जागृति विहार और गंगानगर समेत कई शहरी व ग्रामीण बस्तियों में अजगर दिखने के मामले सामने आए हैं।
सर्पदंश की स्थिति में सबसे पहली सलाह क्या दी गई है?
सांप काटने पर झाड़-फूंक या घरेलू उपचार में समय गंवाए बिना पीड़ित को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाकर एंटी-वेनम इलाज शुरू करवाना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

यह घटनाक्रम केवल वन्यजीवों के विस्थापन का नहीं, बल्कि शहरी नियोजन और पर्यावरण प्रबंधन के बीच गहरे अंतर्विरोध को उजागर करता है। जब प्राकृतिक जल निकासी प्रणालियाँ विफल होती हैं और जलभराव बढ़ता है, तब मानवीय बस्तियों में वन्यजीवों का प्रवेश अपरिहार्य हो जाता है। प्रशासनिक स्तर पर केवल एडवाइजरी जारी करना पर्याप्त नहीं है; जिला प्रशासन और वन विभाग को मानसून से पहले संवेदनशील क्षेत्रों में त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (QRT) को तैनात करना चाहिए ताकि जनजीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह समझना आवश्यक है कि मेरठ के लालकुर्ती, जागृति विहार और गंगानगर जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में अजगरों और जहरीले सांपों का निकलना प्रशासनिक संवेदनशीलता की मांग करता है। सिर्फ चेतावनी देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर वन विभाग की प्रशिक्षित टीमों की त्वरित तैनाती और जिला स्तर पर अस्पतालों में एंटी-वेनम की उपलब्धता को युद्ध स्तर पर सुनिश्चित करना होगा ताकि बरसात के दिनों में जनहानि को रोका जा सके।

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