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बस्तर के किसान सुखदास मौर्य की अनोखी तकनीक, पचास दिन में तैयार होती है फूल गोभीछत्तीसगढ़
16 सित॰ 2026, 9:02 pm (8 दिन पहले)· 0

बस्तर के किसान सुखदास मौर्य की अनोखी तकनीक, पचास दिन में तैयार होती है फूल गोभी

बस्तर के प्रगतिशील किसान सुखदास मौर्य फूल गोभी की खेती से कम समय में शानदार मुनाफा कमा रहे हैं। उनकी इस उन्नत तकनीक से फसल मात्र पचास दिन में तैयार होकर बाजार में बिकने के लिए पहुंच जाती है।

छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में खेती किसानी की एक नई तस्वीर सामने आ रही है, जहां स्थानीय किसान आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर बंपर कमाई कर रहे हैं। बस्तर क्षेत्र के रहने वाले किसान सुखदास मौर्य इन दिनों फूल गोभी की खेती के जरिए अन्य किसानों के लिए एक बड़ी मिसाल पेश कर रहे हैं। बाजार में फूल गोभी की मांग हमेशा ही काफी ज्यादा बनी रहती है, जिसका सीधा फायदा मेहनतकश किसानों को मिलता है। सुखदास मौर्य पिछले चार साल से लगातार इस फसल को उगा रहे हैं और उनका अनुभव बताता है कि सही देखरेख से यह फसल बहुत कम दिनों में मालामाल बना सकती है। वर्तमान समय में बाजार के अंदर फूल गोभी का थोक और खुदरा भाव चालीस से पचास रुपये प्रति किलो तक चल रहा है, जिससे खेती की लागत आसानी से निकल आती है और मुनाफा कई गुना बढ़ जाता है।

कम लागत और शानदार कमाई का गणित

सुखदास मौर्य के तजुर्बे के अनुसार फूल गोभी की खेती एक ऐसा सौदा है जिसमें लागत बहुत कम आती है लेकिन रिटर्न काफी शानदार मिलता है। यदि कोई किसान एक एकड़ जमीन पर इसकी ढंग से खेती करता है, तो वह आसानी से लगभग डेढ़ लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकता है। हालांकि कृषि बाजार के उतार-चढ़ाव और सब्जियों के भाव ऊपर-नीचे होने से कुल कमाई पर थोड़ा बहुत असर जरूर पड़ सकता है। अगर वित्तीय गणित को समझें तो आधे एकड़ के भूखंड में फूल गोभी की फसल उगाने के लिए कुल खर्च लगभग तीस हजार रुपये के आसपास बैठता है। इसके मुकाबले इस आधे एकड़ से ही एक से डेढ़ लाख रुपये तक की शानदार आमदनी हो जाती है, जो किसी भी पारंपरिक फसल के मुकाबले काफी ज्यादा है।

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खेती की पूरी प्रक्रिया और खेत की तैयारी

सफल पैदावार के लिए जमीन की तैयारी से लेकर रोपाई तक का पूरा चक्र बहुत मायने रखता है। सुखदास मौर्य खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए सबसे पहले दो से तीन बार गहरी जुताई करवाते हैं, जिसके बाद खेत में रोटावेटर चलाया जाता है। इसके पश्चात मिट्टी को व्यवस्थित करके बेड तैयार किए जाते हैं और पहले से तैयार की गई स्वस्थ नर्सरी के छोटे-छोटे पौधे उन पर रोपे जाते हैं। पौधों के सही विकास के लिए उनके बीच की दूरी का खास ध्यान रखना पड़ता है, और इस प्रक्रिया में पौधों के बीच लगभग डेढ़ फीट की दूरी रखी जाती है। मिट्टी को पोषण देने के लिए गोबर की खाद के साथ-साथ डीएपी, यूरिया, पोटाश और सुपर फास्फोरस जैसी जरूरी खादों का संतुलित इस्तेमाल किया जाता है।

कीट प्रबंधन और फसल की कटाई

फूल गोभी की फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आमतौर पर बहुत गंभीर बीमारियों का प्रकोप नहीं देखा जाता है, फिर भी पौधों के पत्तों में कीट लगने का एक सामान्य जोखिम हमेशा बना रहता है। इस खतरे से निपटने के लिए समय-समय पर उचित कीटनाशकों का छिड़काव करना बेहद जरूरी होता है, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है और पैदावार बेहतरीन होती है। रोपाई के ठीक पैंतालीस से पचास दिन बाद ही फूल गोभी के पौधे पूरी तरह विकसित होकर बाजार में बेचने के लिए बिल्कुल तैयार हो जाते हैं। कम अवधि में तैयार होने वाली यह फसल बस्तर के किसानों के लिए आर्थिक समृद्धि का एक नया और मजबूत जरिया साबित हो रही है।

सवाल-जवाब

फूल गोभी की फसल कितने दिनों में तैयार हो जाती है?
फूल गोभी की फसल लगभग पैंतालीस से पचास दिन के भीतर बाजार में बेचने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाती है।
फूल गोभी की खेती में प्रति एकड़ कितना मुनाफा हो सकता है?
एक एकड़ जमीन पर फूल गोभी की खेती करने से लगभग डेढ़ लाख रुपये तक की कमाई हो सकती है।
आधे एकड़ में खेती करने पर कितना खर्च आता है?
आधे एकड़ में फूल गोभी की फसल लगाने पर लगभग तीस हजार रुपये की लागत आती है।
बाजार में फूल गोभी का वर्तमान भाव क्या चल रहा है?
बाजार में फूल गोभी की कीमत चालीस से पचास रुपये प्रति किलो के बीच चल रही है।
खेती की शुरुआत में खेत की तैयारी कैसे की जाती है?
किसान सबसे पहले खेत की दो-तीन बार जुताई करवाते हैं, रोटावेटर चलाते हैं और फिर बेड बनाकर पौधे रोपते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

बस्तर के किसान सुखदास मौर्य की यह सफलता दर्शाती है कि वैज्ञानिक खेती और सही फसल चक्र अपनाने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत हो सकती है। मात्र पचास दिन में तैयार होने वाली यह फसल और आधे एकड़ में तीस हजार के खर्च पर डेढ़ लाख तक की आमदनी का गणित राज्य के अन्य किसानों के लिए भी एक व्यावहारिक मॉडल पेश करता है। यदि कृषि विभाग इस तकनीक को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दे, तो यह किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

यह सफलता ग्रामीण विकास और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा एक सकारात्मक पहलू उजागर करती है। जब कृषि जैसे प्राथमिक क्षेत्र में इस तरह के त्वरित और लाभकारी मॉडल सामने आते हैं, तो यह ग्रामीण युवाओं को पलायन रोकने और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित करता है। इस तरह के नवाचारों से न केवल किसानों की क्रय शक्ति बढ़ती है, बल्कि संगठित कृषि बाजारों में भी स्थिरता आती है।

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