कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु स्थित परप्पना अग्रहार सेंट्रल जेल की सख्त सुरक्षा व्यवस्था उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब रेप केस में उम्रकैद की सजा भुगत रहे पूर्व सांसद प्रज्वल रेवन्ना के बैरक से एक आधुनिक स्मार्टफोन जब्त किया गया। हाई-सिक्योरिटी बैरक और चारों तरफ लगे मोबाइल जैमर के बावजूद जेल के भीतर महीनों से इंटरनेट, सोशल मीडिया और वीडियो स्ट्रीमिंग सेवाओं का निर्बाध इस्तेमाल चल रहा था। केंद्रीय अपराध शाखा यानी CCB की छापेमारी के दौरान प्रज्वल के पास से एक रेडमी 5G मोबाइल, चार्जर और पेन ड्राइव बरामद की गई। शुरुआती जांच से पता चला है कि यह केवल चोरी-छिपे फोन पर बात करने का मामला नहीं था, बल्कि जेल परिसर के अंदर एक पूरा डिजिटल नेटवर्क सक्रिय था।
आंध्र प्रदेश के सिम कार्ड से बेअसर हुए 2G जैमर
सुरक्षा एजेंसियों की तफ्तीश में सामने आया कि इस पूरी सुरक्षा चूक का सबसे प्रमुख कारण एक विशेष सिम कार्ड था। प्रज्वल रेवन्ना के फोन में आंध्र प्रदेश सर्किल में एक्टिवेट किया गया एयरटेल का सिम कार्ड लगा हुआ था। परप्पना अग्रहार जेल में तैनात मोबाइल जैमर मुख्य रूप से कर्नाटक राज्य के स्थानीय नेटवर्क और फ्रीक्वेंसी को ब्लॉक करने के लिए डिजाइन किए गए हैं। दूसरे राज्य की फ्रीक्वेंसी पर काम करने के कारण यह सिम कार्ड जैमर के प्रभाव से बाहर रहा और जेल के भीतर पूरा सिग्नल पकड़ता रहा। प्रज्वल और उनके सह-कैदी प्रताप राय इस कनेक्शन की मदद से नियमित रूप से अपने परिजनों और वकीलों के संपर्क में बने हुए थे।
स्मार्टफोन में मिले 90 अश्लील वीडियो और मनोरंजन ऐप्स
सीसीबी द्वारा जब्त किए गए स्मार्टफोन की तकनीकी जांच में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। प्रज्वल के फोन में व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, फेसबुक, नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम वीडियो जैसे कई लोकप्रिय ऐप्स इंस्टॉल मिले। इसके अलावा डिवाइस की डिजिटल फॉरेंसिक जांच में 90 अश्लील वीडियो भी पाए गए। रिकॉर्ड्स के अनुसार यह सिम कार्ड इसी साल मार्च महीने से लगातार एक्टिव था। इसका सीधा अर्थ है कि जेल की दीवारों के पीछे महीनों से बिना किसी रोक-टोक के हाई-स्पीड 5G डेटा का इस्तेमाल किया जा रहा था।
15 साल पुरानी तकनीक और सिग्नल के ब्लैक स्पॉट्स
इस घटना ने जेल प्रशासन की बुनियादी तकनीकी तैयारियों की पोल खोलकर रख दी है। परप्पना अग्रहार परिसर में लगाए गए मोबाइल जैमर लगभग 15 साल पुराने हैं, जिन्हें 2G नेटवर्क के दौर में स्थापित किया गया था। वर्तमान में मोबाइल तकनीक 4G और 5G तक विकसित हो चुकी है, जिसके सामने ये पुराने उपकरण पूरी तरह बेअसर साबित हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त जेल परिसर के भीतर कई ऐसे स्थान चिन्हित किए गए हैं जिन्हें ब्लैक स्पॉट कहा जाता है, जहां जैमर का सिग्नल पहुँच ही नहीं पाता। पिछले आठ महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो जेल से 300 से अधिक मोबाइल फोन बरामद किए जा चुके हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या आंध्र प्रदेश के एयरटेल सिम कार्ड्स की है। इस विषय पर दूरसंचार विभाग से सुधार हेतु मदद मांगी गई है और सेवा प्रदाता कंपनी से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
जेल कर्मियों की संदिग्ध भूमिका और प्रशासनिक कार्रवाई
तकनीकी खामियों के साथ-साथ जेल स्टाफ की मिलीभगत की आशंका भी गहराई हुई है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सीसीबी की छापेमारी से कुछ ही दिन पहले 6 अगस्त को जेल प्रशासन ने प्रज्वल के बैरक की तलाशी ली थी, लेकिन उस समय कोई संदिग्ध वस्तु हाथ नहीं लगी। इसके तुरंत बाद हुई बाहरी एजेंसी की कार्रवाई में स्मार्टफोन बरामद हो गया। इससे यह अंदेशा मजबूत होता है कि अंदरूनी कर्मचारियों द्वारा कैदियों को तलाशी की पूर्व सूचना दी जा रही थी। मामले में तत्परता दिखाते हुए एक सहायक अधीक्षक को निलंबित कर दिया गया है तथा जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके साथ ही प्रज्वल का एक वीडियो भी सामने आया है जिसमें वे साधारण कपड़ों में फोन पर वार्तालाप करते दिखाई दे रहे हैं।
आपूर्ति तंत्र और आंतरिक सांठगांठ की विस्तृत जांच
जांच का दायरा अब केवल उपकरण जब्ती तक सीमित न रहकर उस पूरे नेटवर्क तक फैल गया है जो जेल के भीतर प्रतिबंधित सामान पहुंचा रहा था। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगा रही हैं कि दूसरे राज्य का एक्टिवेटेड सिम जेल के अति-सुरक्षित क्षेत्र तक किस रास्ते से दाखिल हुआ और इसे महीनों तक रिचार्ज तथा चालू रखने में किन लोगों ने सहायता की। जेल प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती खड़ी है, पहली 15 साल पुराने अप्रासंगिक जैमर्स को आधुनिक 5G तकनीक से बदलना और दूसरी परिसर के भीतर अवैध वस्तुओं की आपूर्ति पर पूर्ण विराम लगाना। यह घटना स्पष्ट करती है कि केवल उपकरण स्थापित कर देना सुरक्षा की गारंटी नहीं हो सकता, जब तक कि निगरानी और प्रशासनिक नीतियां भी उतनी ही आधुनिक न हों।



















