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भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और चीनी डीप वाटर पोर्ट्स पर उपसभापति हरिवंश ने जताई चिंता, बाहरी ताकतों पर किया सचेतभारत
16 अग॰ 2026, 8:58 pm (10 घंटे पहले)· 3

भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और चीनी डीप वाटर पोर्ट्स पर उपसभापति हरिवंश ने जताई चिंता, बाहरी ताकतों पर किया सचेत

राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने भारत के रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने से बौखलाई विदेशी हथियार लॉबी और पड़ोसी देशों में चीन के 8 से 10 डीप वाटर पोर्ट्स के जरिए हो रहे रणनीतिक घेराव पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक ताकत और सैन्य आत्मनिर्भरता के बीच वैश्विक मंच पर देश के खिलाफ सक्रिय बाहरी ताकतों को लेकर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने बेहद महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे-जैसे भारत रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में अपनी क्षमताएं बढ़ा रहा है, वैसे-वैसे अंतरराष्ट्रीय हथियार लॉबी की चिंताएं गहराने लगी हैं। उपसभापति के अनुसार देश का आर्थिक और रणनीतिक उभार उन ताकतों के लिए असहज करने वाला है जो दशकों से भारत को केवल एक रक्षा आयात करने वाले बाजार के रूप में देखती आई हैं।

वैश्विक हथियार लॉबी और रक्षा उत्पादन में भारत का आत्मनिर्भर कदम

संसद और सार्वजनिक जीवन के अपने अनुभवों का हवाला देते हुए उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने इस बात पर सवाल उठाया कि वर्ष 2014 से पहले भारत अपनी लगभग सभी प्रमुख सैन्य जरूरतों के लिए विदेशी आपूर्ति पर निर्भर क्यों रहता था। उन्होंने कहा कि बीते कुछ वर्षों में स्थिति में तेजी से बदलाव आया है। आज भारत लड़ाकू विमानों, अत्याधुनिक मिसाइलों, युद्धपोतों और विविध सैन्य साजो-सामान का निर्माण अपनी सीमाओं के भीतर ही कर रहा है।

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रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी निर्माण को बढ़ावा देने की इस नीति ने अंतरराष्ट्रीय हथियार निर्माताओं और आपूर्ति कर्ताओं के आर्थिक हितों को प्रभावित किया है। उपसभापति का मानना है कि जो विदेशी संगठन और लॉबी भारत के भारी रक्षा बजट से मुनाफा कमाते थे, वे अब भारत की इस आत्मनिर्भरता से असहज महसूस कर रहे हैं और देश के आर्थिक व सामरिक विकास में रुकावटें पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं।

पड़ोसी देशों में चीन का प्रभाव और डीप वाटर पोर्ट्स की रणनीतिक चुनौती

क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य पर चर्चा करते हुए हरिवंश नारायण सिंह ने चीन की विस्तारवादी गतिविधियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि भारत के आसपास के समुद्री इलाकों में चीन लगभग 8 से 10 डीप वाटर पोर्ट्स का निर्माण कर रहा है। श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसे पड़ोसी मुल्कों के माध्यम से की जा रही ये गतिविधियां असल में भारत को चारों तरफ से घेरने की एक सोची-समझी रणनीतिक कोशिश का हिस्सा हैं।

उन्होंने दिल्ली में हाल ही में लगे कुछ नारों का विशेष उल्लेख किया, जिनमें 'नेपाल के बाद अब भारत' जैसी बातें कही गई थीं। उपसभापति ने सवाल उठाया कि इस प्रकार के घटनाक्रमों को महज एक संयोग नहीं माना जा सकता, बल्कि इसके पीछे बाहरी ताकतों के सुनियोजित प्रभाव और हस्तक्षेप की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संसदीय गतिरोध और पांच साल के लोकतांत्रिक जनादेश का सम्मान

देश की आंतरिक राजनीति और लोकतांत्रिक संस्थाओं के संचालन पर बात करते हुए उपसभापति ने संसद में सरकार और विपक्ष के बीच बने गतिरोध पर गहरा अफसोस जताया। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक ऐतिहासिक संदेश का स्मरण कराया, जिसमें उन्होंने स्पष्ट कहा था कि वैचारिक और राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय महत्व की बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए सभी दलों को एक साथ मिलकर काम करना चाहिए।

हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की नीतियों का विरोध करना और चुनाव के माध्यम से उसे चुनौती देना विपक्ष का अधिकार है। हालांकि संसद की कार्यवाही को ठप करना देश के हित में नहीं है। देश की जनता ने सरकार को 5 साल का स्पष्ट जनादेश दिया है और उसे अपना काम करने का पूरा अवसर मिलना आवश्यक है।

मॉनसून सत्र की पृष्ठभूमि और रणनीतिक संदेश

संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक संचालित हुआ था। इस पूरे सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के विभिन्न मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन के कारण लगातार हंगामा और स्थगन देखने को मिला था। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह के आधिकारिक बयान की मांग पर अड़ा रहा। हालांकि सरकार चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन दोनों पक्षों के बीच आम सहमति नहीं बन पाई थी।

उपसभापति की यह टिप्पणी केवल संसदीय कार्यवाही के संचालन तक सीमित नहीं है। उन्होंने देश के भीतर होने वाले राजनीतिक गतिरोध को अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य, रक्षा क्षेत्र की आत्मनिर्भरता और सीमा पार चीन के बढ़ते रणनीतिक प्रभाव से जोड़कर एक बड़े राष्ट्रीय विमर्श को जन्म दिया है।

सवाल-जवाब

हरिवंश नारायण सिंह ने किस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है?
उन्होंने भारत की बढ़ती रक्षा आत्मनिर्भरता के खिलाफ सक्रिय विदेशी हथियार लॉबी के हितों और भारत के आसपास चीन द्वारा बनाए जा रहे 8 से 10 डीप वाटर पोर्ट्स पर चिंता व्यक्त की है।
चीन भारत के आसपास कितने डीप वाटर पोर्ट्स विकसित कर रहा है?
उपसभापति के अनुसार चीन श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के माध्यम से भारत को घेरने के लिए 8 से 10 डीप वाटर पोर्ट्स बना रहा है।
संसद के मॉनसून सत्र की समयावधि क्या थी?
संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक संचालित हुआ था।
उपसभापति ने संसद में गतिरोध पर किस पूर्व प्रधानमंत्री के संदेश का उल्लेख किया?
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उल्लेख किया, जिन्होंने कहा था कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद राष्ट्रीय चुनौतियों पर एकजुट होकर काम करना चाहिए।
संसद सत्र के दौरान विपक्ष की मुख्य मांग क्या थी?
विपक्ष दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के मामले में गृह मंत्री अमित शाह के आधिकारिक बयान की मांग कर रहा था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·5 घंटे पहले

राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा आत्मनिर्भरता का सीधा संबंध नागरिकों के मानसिक स्वास्थ्य और सार्वजनिक कल्याण से है। जब भू-राजनीतिक तनाव और बाहरी घेराबंदी बढ़ती है, तो समाज में चिंता, असुरक्षा और मानसिक दबाव का स्तर बढ़ जाता है। चिकित्सा अनुसंधान बताते हैं कि युद्ध और सामरिक अनिश्चितता का यह माहौल सामूहिक मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है, जिससे नीति निर्माताओं को स्वास्थ्य और सुरक्षा नीतियों को एक साथ देखना होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 घंटे पहले

राज्यसभा के उपसभापति द्वारा उठाए गए ये बिंदु भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता और भू-राजनीतिक सुरक्षा के बीच के गहरे जुड़ाव को उजागर करते हैं। एक तरफ जहां स्वदेशी विनिर्माण वैश्विक हथियार लॉबी के आर्थिक हितों को चुनौती दे रहा है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी देशों में विकसित हो रहे चीनी डीप वाटर पोर्ट्स भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए एक गंभीर रणनीतिक चुनौती पेश कर रहे हैं। आने वाले समय में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की यह राह न केवल आर्थिक बदलाव लाएगी, बल्कि बाहरी और क्षेत्रीय दबावों से निपटने के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर भी अधिक सतर्कता की मांग करेगी।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·5 घंटे पहले

राज्यसभा के उपसभापति द्वारा रेखांकित यह रणनीतिक परिदृश्य सिनेमाई और वास्तविक दुनिया के बीच की उस कड़ी को जोड़ता है जहां भू-राजनीतिक तनाव और रक्षा आत्मनिर्भरता अब केवल राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह हमारे समय का सबसे बड़ा और गंभीर कथानक बन चुका है। जिस प्रकार चीनी डीप वाटर पोर्ट्स और अंतरराष्ट्रीय हथियार लॉबी का दबाव भारत के आर्थिक और सामरिक विकास को प्रभावित कर रहा है, आने वाले दिनों में सिनेमाई और दृश्य माध्यमों के जरिए भी इन सामरिक चुनौतियों, समुद्री सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता के विषयों पर बड़े पैमाने पर फिल्में और वृत्तचित्र बनने की संभावना है, जो देश की बदलती हुई कूटनीतिक और रक्षात्मक स्थिति को पर्दे पर गहराई से दर्शाएंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 घंटे पहले

राज्यसभा के उपसभापति द्वारा उठाया गया चीन के आठ से दस डीप वाटर पोर्ट्स के जरिए रणनीतिक घेराव का मुद्दा राष्ट्रीय सुरक्षा और तटीय संप्रभुता के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील है। क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन और पब्लिक सेफ्टी के दृष्टिकोण से, इस तरह के भू-राजनीतिक दबाव और बाहरी हस्तक्षेप आंतरिक सुरक्षा पर सीधा प्रभाव डालते हैं, जिससे प्रॉक्सी गतिविधियों और बॉर्डर इंटेलिजेंस एजेंसियों को अपनी चौकसी और मजबूत करने की आवश्यकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·8 घंटे पहले

उपसभापति हरिवंश द्वारा रेखांकित चीन के आठ से दस डीप वाटर पोर्ट्स और विदेशी हथियार लॉबी का यह गठजोड़ केवल भू-राजनीतिक चिंता नहीं, बल्कि भारतीय वित्तीय बाजारों और रक्षा स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा सबक है। जब कोई देश रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ता है, तो आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और विदेशी आर्थिक हस्तक्षेप का जोखिम बढ़ जाता है। आने वाले समय में वैश्विक निवेशकों और वित्तीय विश्लेषकों को यह देखना होगा कि कैसे स्वदेशी रक्षा उत्पादन और तटीय बुनियादी ढांचे की सुरक्षा, देश के दीर्घकालिक आर्थिक रुझानों और डिजिटल एसेट्स के सुरक्षित निवेश को प्रभावित करती है।

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