पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से रायदैनिक राशिफल 25 सितंबर 2026: कुंभ में चंद्रमा और राहु की युति से ग्रहण योग, जानें सभी 12 राशियों का हाल
भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान बना जैव विविधता की अनूठी मिसालराजस्थान
10 सित॰ 2026, 10:39 am (15 दिन पहले)· 2

भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान बना जैव विविधता की अनूठी मिसाल

राजस्थान के भरतपुर में स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान अपने सीमित दायरे में समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीवों का संरक्षण कर रहा है। ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के दौर में यह पार्क पर्यावरण संतुलन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।

राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को आमतौर पर घना के नाम से पुकारा जाता है। यह स्थान छोटे से भौगोलिक क्षेत्र में भी प्रकृति की असीम विविधता को सहेजने का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। केवल 28.73 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैला यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय उद्यान अपनी अनूठी खूबियों के कारण न केवल देश बल्कि पूरी दुनिया के महत्वपूर्ण आद्रभूमि यानी वेटलैंड क्षेत्रों में अपनी खास जगह रखता है। आज के दौर में जब लगातार पर्यावरण बदलाव और वैश्विक तापमान जैसी समस्याएं गंभीर होती जा रही हैं, तब इस प्रकार के संरक्षित प्राकृतिक क्षेत्रों की प्रासंगिकता और भी अधिक बढ़ जाती है।

प्रवासी पक्षियों और जलीय जीवों का बसेरा

इस उद्यान की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ साल के अलग-अलग मौसमों में दुनिया के कोने-कोने से प्रवासी पक्षी तो आते ही हैं, साथ ही स्थानीय पक्षियों की भी भारी तादाद यहाँ निवास करती है। विशेष तौर पर सर्दियों के दिनों में इस पूरे इलाके का आसमान और वातावरण रंग-बिरंगे पक्षियों की चहचहाहट से गूँज उठता है। यही कारण है कि यह अभ्यारण्य देश-दुनिया के प्रकृति प्रेमियों, पर्यावरणविदों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए हमेशा से ही आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा है। केवलादेव में केवल पक्षी ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रकार के सरीसृप यानी रेंगने वाले जीव, मछलियां, कीट-पतंगे और तमाम किस्म की वनस्पतियां भी भरपूर मात्रा में पाई जाती हैं। यही समूची विविधता मिलकर इसे एक अत्यंत सुदृढ़ और संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र बनाती है।

ये भी पढ़ें

प्राकृतिक आवास और संतुलित सह-अस्तित्व

घना के भीतर फैले हुए विशाल जलस्रोत, खुले घास के मैदान, घनी झाड़ियां और पेड़-पौधे विभिन्न प्रजातियों के वन्यजीवों को उनकी जरूरत के मुताबिक बेहतरीन प्राकृतिक आवास मुहैया कराते हैं। इस उद्यान की खूबी यह है कि इतने संकुचित क्षेत्रफल के बावजूद यहाँ अनगिनत जीवों और वनस्पतियों का बेहद संतुलित सह-अस्तित्व देखने को मिलता है। यही वजह है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता पर गहराई से शोध करने वाले शोधार्थियों के लिए यह जगह किसी प्रयोगशाला से कम नहीं है। यहाँ आने वाले विशेषज्ञ पक्षियों के आने-जाने के तौर-तरीकों, उनके प्रवास, प्रजनन चक्र और बदलते मौसम के उनके जीवन पर पड़ने वाले प्रभावों का बारीकी से अध्ययन करते हैं। हालांकि आधुनिक समय में जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में उतार-चढ़ाव, मानसूनी बारिश के बदलते तौर-तरीकों और समय पर पानी की उपलब्धता जैसी कई गंभीर चुनौतियां इस नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र के सामने खड़ी हो रही हैं।

पर्यावरण संतुलन और भविष्य की जरूरत

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का सही मायनों में संरक्षण केवल भरतपुर शहर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी पृथ्वी के पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है। घना का यह पूरा मॉडल यह गहरा संदेश देता है कि प्रकृति को बचाने के लिए किसी भी संरक्षित क्षेत्र का बहुत विशाल होना ही जरूरी नहीं है, बल्कि उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का सही ढंग से प्रबंधन करना और जैव विविधता को सुरक्षित रखने की मजबूत इच्छाशक्ति होना भी उतना ही जरूरी है। यही एक मुख्य वजह है कि आज के दौर में भरतपुर का यह प्रसिद्ध पार्क बदलती आबोहवा के बीच जैव विविधता के संरक्षण की एक जीवंत और प्रेरणादायक मिसाल पेश कर रहा है।

सवाल-जवाब

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को आमतौर पर घना के नाम से पुकारा जाता है।
यह राष्ट्रीय उद्यान कितने क्षेत्रफल में फैला हुआ है?
यह उद्यान लगभग 28.73 वर्ग किलोमीटर के सीमित क्षेत्र में फैला हुआ है।
इस उद्यान में मुख्य रूप से क्या आकर्षण का केंद्र है?
यहाँ सर्दियों के मौसम में देश-विदेश से आने वाले बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी मुख्य आकर्षण का केंद्र होते हैं।
पक्षियों के अलावा यहाँ और क्या पाया जाता है?
पक्षियों के अलावा यहाँ सरीसृप, मछलियां, कीट-पतंगे और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियां पाई जाती हैं।
यह उद्यान किस राज्य में स्थित है?
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp