पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायवृश्चिक राशिफल 25 सितंबर 2026: 12वें भाव में शुक्र जगाएगा सुख-सुविधाओं की चाहत, बजट और सेहत का रखें ध्यानबिटगेट पर बड़ा साइबर हमला, हॉट वॉलेट से उड़ाए गए 351 मिलियन डॉलरपंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, अंत्योदय और एकात्म मानववाद के विचार को किया यादजीनियस एक्ट के तहत स्टेबलकॉइन के सख्त नियमों पर फेडरल रिजर्व ने मांगी जनता से राय
भरतपुर के डांग इलाके में प्राकृतिक रूप से उगने वाला लूम चारा पशुओं के लिए वरदान, दूध उत्पादन बढ़ाने में मददगारराजस्थान
1 सित॰ 2026, 12:06 pm (24 दिन पहले)· 2

भरतपुर के डांग इलाके में प्राकृतिक रूप से उगने वाला लूम चारा पशुओं के लिए वरदान, दूध उत्पादन बढ़ाने में मददगार

राजस्थान के भरतपुर जिले के डांग क्षेत्र में बरसात के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगने वाला लूम चारा पशुपालकों के लिए बेहद फायदेमंद है। यह हरा और कोमल चारा पशुओं की सेहत सुधारने के साथ दूध उत्पादन बढ़ाने में भी मदद करता है।

राजस्थान का भरतपुर जिला अपनी अनूठी ग्रामीण संस्कृति और प्राकृतिक धरोहर के लिए पहचाना जाता है। इस जिले के डांग इलाके में बरसात के महीने शुरू होते ही प्राकृतिक वनस्पतियों का तेजी से विकास होता है, जिनमें से एक खास चारा स्थानीय स्तर पर लूम के नाम से पुकारा जाता है। यह वनस्पति पूरी तरह प्राकृतिक रूप से पनपती है और इसके पत्ते काफी कोमल और हरे होते हैं, जो मवेशियों के स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत लाभकारी साबित होते हैं।

प्रकृति की देन है यह हरा चारा

डांग क्षेत्र में जैसे ही मानसून की बारिश होती है, ग्रामीण इलाकों की जमीन पर यह पौष्टिक चारा अपने आप उगने लगता है। किसानों को इसके उत्पादन के लिए किसी भी तरह की बुवाई या अतिरिक्त मेहनत करने की जरूरत नहीं पड़ती है। मौसम की पहली फुहारों के साथ ही खेतों और खुले इलाकों में यह बहुमूल्य चारा तैयार हो जाता है, जिसे ग्रामीण आसानी से काटकर अपने घरों तक ले आते हैं।

ये भी पढ़ें

पशु आहार में कैसे होता है इस्तेमाल

स्थानीय किसानों और पशुपालकों के अनुसार लूम को मवेशियों को खिलाने के कई तरीके अपनाए जाते हैं। इसे सीधे तौर पर ताजा ही खिलाया जा सकता है या फिर अन्य सूखे चारे और पारंपरिक पशु आहार के साथ मिलाकर संतुलित खुराक के रूप में दिया जाता है। इस प्राकृतिक चारे की कटाई और ढुलाई का काम भी काफी सरल होता है, जिसके चलते ग्रामीण परिवारों को बरसात के दिनों में चारे की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ता।

दूध की पैदावार पर सकारात्मक असर

पशुओं के दैनिक आहार में लूम को शामिल करने से उनके शरीर को जरूरी पोषक तत्व आसानी से मिल जाते हैं। इससे मवेशियों की शारीरिक सेहत दुरुस्त रहती है और विशेष तौर पर दूध देने वाले पशुओं की उत्पादकता में उल्लेखनीय सुधार देखा जाता है। हालांकि दुग्ध उत्पादन की मात्रा पूरी तरह से पशु की नस्ल, उसकी आयु, स्वास्थ्य स्थिति और समग्र देखभाल पर भी निर्भर करती है, लेकिन इस प्राकृतिक चारे की उपलब्धता से पशुपालकों को बड़ी राहत मिलती है।

सवाल-जवाब

लूम चारा मुख्य रूप से किस क्षेत्र में उगता है?
लूम चारा राजस्थान के भरतपुर जिले के डांग क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगता है।
क्या किसानों को लूम की खेती के लिए बीज बोने पड़ते हैं?
नहीं, किसानों को लूम की बुवाई नहीं करनी पड़ती क्योंकि यह बरसात के मौसम में प्राकृतिक रूप से उगता है।
पशुओं को लूम किस तरह खिलाया जाता है?
इसे सीधे ताजा खिलाया जा सकता है या अन्य हरे चारे और पशु आहार के साथ मिलाकर दिया जाता है।
लूम खिलाने से पशुओं पर क्या असर पड़ता है?
इससे पशुओं को पौष्टिक आहार मिलता है, स्वास्थ्य बेहतर रहता है और दूध उत्पादन क्षमता में भी सुधार होता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp