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भरतपुर के जहाज गांव में पशुपालकों की आस्था का केंद्र बना करिस बाबा मेलाराजस्थान
8 सित॰ 2026, 11:44 am (17 दिन पहले)· 3

भरतपुर के जहाज गांव में पशुपालकों की आस्था का केंद्र बना करिस बाबा मेला

भरतपुर के जहाज गांव में साल में दो बार लगने वाला करिस बाबा का मेला पशुपालकों की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है, जहां राजस्थान के अलावा यूपी और एमपी से भी हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

भरतपुर जिले की वैर तहसील में बसे जहाज गांव में इन दिनों करिस बाबा का मशहूर मेला बड़ी धूमधाम से चल रहा है। यह मेला साल में दो बार आयोजित होता है और पशुपालक समुदाय के बीच इसकी खास पहचान है। मेले में सिर्फ राजस्थान के अलग-अलग जिलों से ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी हजारों श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

पशुओं के रक्षक माने जाते हैं करिस बाबा

करिस बाबा को लोक देवता के रूप में पूजा जाता है और उन्हें खासतौर पर पशुओं का रक्षक माना गया है। यही वजह है कि पशुपालक परिवारों में उनके प्रति गहरी आस्था देखने को मिलती है। मान्यता है कि करिस बाबा अपने भक्तों के पशुओं की हर तरह की परेशानी दूर करते हैं और उनकी रक्षा करते हैं। इसी विश्वास के चलते दूर-दराज के गांवों से पशुपालक अपनी मनोकामनाएं लेकर मेले में पहुंचते हैं और बाबा के दरबार में पूजा-अर्चना कर अपने पशुओं की सेहत, सुरक्षा और समृद्धि की कामना करते हैं।

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घी, अनाज और मिठाई चढ़ाने की पुरानी परंपरा

मेले में एक खास परंपरा भी निभाई जाती है, पशुपालक अपने साथ घी, अनाज, मिठाई और दूसरी सामग्री लेकर आते हैं और उसे करिस बाबा को अर्पित करते हैं। यह अर्पण सिर्फ भक्ति दिखाने का जरिया नहीं है, बल्कि पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही एक लोक परंपरा है, जिसे लोग आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभा रहे हैं।

जाति और वर्ग की सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुटता

करिस बाबा का यह मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और लोक संस्कृति की मिसाल भी है। यहां अलग-अलग जाति और वर्ग के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ जुटते हैं और आपसी भाईचारे का संदेश देते हैं। यह मेला दिखाता है कि आस्था कैसे समाज के अलग-अलग तबकों को एक मंच पर ला सकती है।

भजन-नृत्य और अस्थायी बाजार से गुलजार मेला

मेला स्थल पर लोक कलाकार पारंपरिक गीत, भजन और नृत्य पेश कर रहे हैं, जिससे पूरा माहौल भक्तिमय और जीवंत बना हुआ है। इसके साथ ही मेले में जगह-जगह अस्थायी दुकानें और बाजार भी सज गए हैं, जहां खाने-पीने की चीजें, ग्रामीण हस्तशिल्प, खिलौने और रोजमर्रा के इस्तेमाल का सामान बिक रहा है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर उम्र के लोग अपने-अपने अंदाज में इस मेले का आनंद उठा रहे हैं।

हर बार बढ़ रही है श्रद्धालुओं की भीड़

स्थानीय लोगों का मानना है कि जो भक्त सच्चे मन से करिस बाबा के दरबार में अपनी मनोकामना रखता है, उसकी इच्छा जरूर पूरी होती है। इसी आस्था के चलते हर बार मेले में पहुंचने वाले लोगों की तादाद बढ़ती जा रही है। जहाज गांव का यह मेला न सिर्फ करिस बाबा के प्रति लोगों की अटूट श्रद्धा को दिखाता है, बल्कि राजस्थान की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को भी जीवित रखे हुए है। श्रद्धा, भक्ति और लोक संस्कृति के इस अनूठे संगम के जरिए आने वाली पीढ़ियां भी अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ी रहती हैं।

सवाल-जवाब

करिस बाबा का मेला कहां लगता है?
यह मेला भरतपुर जिले की वैर तहसील के जहाज गांव में लगता है।
करिस बाबा को किसलिए पूजा जाता है?
करिस बाबा को लोक देवता और खासतौर पर पशुओं के रक्षक के रूप में पूजा जाता है।
यह मेला साल में कितनी बार आयोजित होता है?
यह मेला साल में दो बार आयोजित किया जाता है।
मेले में कौन-कौन से राज्यों से श्रद्धालु आते हैं?
राजस्थान के अलग-अलग जिलों के अलावा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भी हजारों श्रद्धालु मेले में पहुंचते हैं।
भक्त करिस बाबा को क्या अर्पित करते हैं?
भक्त अपने साथ घी, अनाज, मिठाई और अन्य सामग्री लाकर करिस बाबा को अर्पित करते हैं।
मेले में और क्या-क्या गतिविधियां होती हैं?
मेले में लोक कलाकार पारंपरिक गीत, भजन और नृत्य पेश करते हैं और अस्थायी बाजारों में खाने-पीने की चीजें, हस्तशिल्प, खिलौने और रोजमर्रा का सामान बिकता है।
हर बार मेले में भीड़ क्यों बढ़ती जा रही है?
स्थानीय मान्यता है कि सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना जरूर पूरी होती है, इसी विश्वास के चलते हर बार ज्यादा श्रद्धालु मेले में पहुंच रहे हैं।
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