हैदराबाद के शहरी इलाकों में आजकल गार्डनिंग का शौक रखने वाले लोग कुछ अलग और अनोखी सब्जियां उगाने की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इसी कड़ी में एयर पोटैटो यानी हवाई आलू लोगों के बीच काफी चर्चा का विषय बना हुआ है। सामान्य तौर पर आलू जमीन के भीतर पैदा होते हैं, लेकिन इस अनोखी बेल पर आलू जमीन के नीचे नहीं बल्कि हवा में शाखाओं के साथ लटकते हुए नजर आते हैं। हैदराबाद के मौसम को इस तरह के पौधों के लिए काफी मुफीद माना जाता है, यही वजह है कि शहर के लोग अपनी छतों और बालकनी के होम गार्डन में इसे बड़े चाव से लगा रहे हैं।
यहाँ के सर्दियों के मौसम में बहुत ज्यादा कड़ाके की ठंड नहीं पड़ती है, जो इस बेल के विकास में काफी मददगार साबित होती है। अगर आप भी अक्टूबर या इस सर्दी के मौसम में अपने घर के बगीचे में कुछ नया आजमाना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत करना बेहद सरल है। इसे बड़े आकार के गमलों या फिर ग्रो बैग्स में आसानी से सेट किया जा सकता है। इससे न केवल घर की हरियाली और सुंदरता बढ़ती है, बल्कि खाने के लिए ताजी और सेहतमंद सब्जी भी घर पर ही मिल जाती है।
गमला और मिट्टी तैयार करने की प्रक्रिया
एयर पोटैटो की बेल को अच्छी तरह विकसित होने के लिए कम से कम 16 से 20 इंच गहरे गमले या फिर ग्रो बैग की जरूरत होती है। इसके लिए मिट्टी तैयार करते समय इस बात का ध्यान रखें कि सामान्य बगीचे की मिट्टी में 40 प्रतिशत गोबर की पुरानी खाद या वर्मीकंपोस्ट के साथ थोड़ी सी रेत मिला दी जाए ताकि मिट्टी भुरभुरी रहे और उसमें जल निकासी की उत्तम व्यवस्था हो सके। इस पौधे के कंद को मिट्टी के अंदर लगभग दो से तीन इंच की गहराई में दबाना चाहिए। कंद लगाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि जिस हिस्से से अंकुरण यानी स्प्राउट निकल रहा हो, उसे ऊपर की तरफ रखा जाए और उसके बाद हल्का पानी छिड़क दिया जाए।
धूप, पानी और पौधे के लिए जरूरी सहारा
इस बेल को बालकनी या छत के ऐसे स्थान पर रखना चाहिए जहाँ दिनभर में कम से कम 5 से 6 घंटे की भरपूर धूप मिल सके। सर्दियों के दिनों में इसमें बार-बार पानी डालने से बचना चाहिए और जब गमले की ऊपरी सतह की मिट्टी सूखी दिखाई दे, तभी पानी देना बेहतर रहता है। एयर पोटैटो एक बहुत तेजी से फैलने वाली लता है, इसलिए जैसे ही पौधा 1 से 2 फीट तक का हो जाए, इसे बांस की डंडियों, किसी जाली या फिर बालकनी की ग्रिल का सपोर्ट देना जरूरी हो जाता है ताकि बेल ऊपर की दिशा में आसानी से बढ़ सके।
छह से आठ महीने में मिलने लगती है पैदावार
अक्टूबर के महीने में लगाए गए पौधे सर्दियों के सीजन के दौरान अपनी जड़ें मजबूत करते हैं और जैसे-जैसे फरवरी तथा मार्च में तापमान में बढ़ोतरी होती है, इनकी ग्रोथ भी काफी तेज हो जाती है। रोपण प्रक्रिया के लगभग 6 से 8 महीने के भीतर इस बेल पर हवा में ही आलू लटकने शुरू हो जाते हैं। यह अनोखा पौधा न केवल आपके होम गार्डन की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है, बल्कि आपके घर के लिए पोषण से भरपूर एक बेहतरीन सब्जी का जरिया भी बनता है।



















