राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में मौसम के मिजाज बदलने के साथ ही आबोहवा लगातार जहरीली होती जा रही है। न्यूनतम तापमान में लगातार दर्ज की जा रही गिरावट और हवा की सुस्त रफ्तार ने मिलकर प्रदूषण के स्तर को खतरनाक ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार आने वाले दिनों में सर्दी की आहट के साथ पारे में और गिरावट दर्ज होने की पूरी संभावना है, जिससे वायु गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ रहा है।
तापमान में गिरावट और मौसम का पूर्वानुमान
मौसम विभाग के ताजा अनुमान के मुताबिक इस हफ्ते के अंत तक न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 17 डिग्री सेल्सियस के स्तर तक पहुंच सकता है। पारे में आ रही यह गिरावट प्रदूषक तत्वों को वायुमंडल में बांधकर रख रही है, जिससे हवा का फैलाव रुक जाता है। आगामी 22 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 32 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18 डिग्री रहने का अनुमान जताया गया है। ठीक इसी प्रकार 23 अक्टूबर को भी पारे की यही स्थिति बनी रहने की संभावना है। इसके बाद 24 अक्टूबर से आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के आसार हैं और अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। हालांकि 27 अक्टूबर तक रात और सुबह के समय ठंडक बढ़ने के कारण न्यूनतम तापमान गिरकर 17 डिग्री सेल्सियस तक सिमट जाएगा।
दिल्ली के विभिन्न इलाकों में एक्यूआई का हाल
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी डीपीसीसी के आंकड़ों के मुताबिक दिल्ली के तमाम हिस्सों में हवा की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है और अधिकांश इलाके खराब से बहुत खराब श्रेणी में दर्ज किए जा रहे हैं। ऐतिहासिक चांदनी चौक इलाके में वायु गुणवत्ता सूचकांक 306 के स्तर पर पहुंच गया है जो सीधे तौर पर बहुत खराब श्रेणी में आता है। इसके अलावा बवाना में एक्यूआई 274, आनंद विहार में 236, अशोक विहार में 223 और बुराड़ी क्रॉसिंग में 226 रिकॉर्ड किया गया है। दक्षिण दिल्ली के आया नगर इलाके में भी एक्यूआई 214 बना हुआ है। हालांकि बदरपुर जैसे कुछ क्षेत्रों में एक्यूआई 141 दर्ज किया गया है जिसे मध्यम श्रेणी में गिना जाता है, लेकिन राजधानी के बड़े हिस्से में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों यानी पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में भारी उछाल देखा जा रहा है, जहां ताजा आंकड़ों के अनुसार पीएम 10 का स्तर 281 और पीएम 2.5 का स्तर 181 तक पहुंच गया है जो फेफड़ों पर सीधा प्रहार कर रहा है।
नोएडा और गाजियाबाद में जहरीली हवा का असर
केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि पड़ोसी शहरों नोएडा और गाजियाबाद का हाल भी कम बुरा नहीं है। नोएडा के प्रमुख निगरानी स्टेशनों पर प्रदूषण का स्तर गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। सेक्टर-62 में एक्यूआई 337 दर्ज किया गया है जो बहुत खराब से होते हुए गंभीर श्रेणी की तरफ लगातार आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा सेक्टर-1 में 258, सेक्टर-125 में 254 और सेक्टर-116 में 239 एक्यूआई रिकॉर्ड किया गया है। इन तमाम इलाकों की हवा में जहरीले कणों की मौजूदगी बेहद अधिक है। गाजियाबाद के सात सक्रिय स्टेशनों से मिले आंकड़े भी बेहद चौंकाने वाले हैं। वसुंधरा में एक्यूआई 316 और इंदिरापुरम में 312 दर्ज किया गया है जो बहुत खराब श्रेणी के दायरे में आते हैं। संजय नगर में एक्यूआई 295, वेव सिटी में 238, लोनी में 175 और वेद विहार-लोनी में 154 दर्ज किया गया है। हालांकि राहत की बात यह है कि गोविंदपुरम का एक्यूआई 74 दर्ज किया गया है जो संतोषजनक श्रेणी में आता है, लेकिन बाकी इलाकों की गंभीर स्थिति प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।
प्रशासनिक कदम और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव
बढ़ते प्रदूषण पर काबू पाने के लिए ग्रेप यानी ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान का पहला चरण पहले ही लागू किया जा चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर अभी तक ज्यादा दिखाई नहीं दे रहा है और हवा लगातार जहरीली बनी हुई है। तापमान में गिरावट और हवा की सुस्त चाल के कारण प्रदूषक तत्व सतह के पास ही जमे हुए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हवा में तैरता यह धीमा जहर लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा है। इसके कारण सांस से जुड़ी बीमारियां तेजी से पांव पसार सकती हैं, आंखों में लगातार जलन की शिकायत हो सकती है और त्वचा संबंधी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं, जिससे बुजुर्गों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
















