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बीकानेर में बिना ओटीपी और लिंक के बैंक खाते से उड़े 1,58,700 रुपये, हैरान करने वाला मामला आया सामनेराजस्थान
16 सित॰ 2026, 10:57 am (9 दिन पहले)· 0

बीकानेर में बिना ओटीपी और लिंक के बैंक खाते से उड़े 1,58,700 रुपये, हैरान करने वाला मामला आया सामने

बीकानेर में साइबर ठगी का एक नया और डरावना मामला सामने आया है जहाँ बिना किसी ओटीपी या संदिग्ध लिंक के एक व्यक्ति के बैंक खाते से 1.58 लाख रुपये से अधिक की रकम निकाल ली गई।

बीकानेर शहर में साइबर अपराधियों ने ठगी का एक ऐसा नायाब और चिंताजनक तरीका निकाला है जिसने पुलिस के साथ-साथ आम नागरिकों को भी सकते में डाल दिया है। पारंपरिक तरीकों से हटकर इस बार ठगों ने न तो किसी प्रकार का कोई फर्जी लिंक भेजा और न ही फोन कॉल पर किसी तरह का ओटीपी मांगा, इसके बावजूद पीड़ित के बैंक खाते से एक झटके में 1,58,700 रुपये साफ हो गए। इस अजीबोगरीब और सनसनीखेज वारदात ने ऑनलाइन सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोल दी है और हर कोई यह सोचकर हैरान है कि बिना किसी अंदरूनी जानकारी या पासवर्ड साझा किए खाते में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगाई जा सकती है।

डिजिटल सुरक्षा पर खड़े हुए गंभीर सवाल

आज के दौर में जब हर व्यक्ति डिजिटल माध्यमों और ऑनलाइन लेन-देन पर पूरी तरह निर्भर है, तब इस तरह की घटनाएं एक बहुत बड़ी चुनौती बनकर सामने आ रही हैं। बीकानेर की इस घटना ने आम आदमी की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि पीड़ित को इस बात की भनक तक नहीं लगी कि उसके बैंक खाते से लाखों रुपये की मोटी रकम निकाली जा रही है। साइबर सुरक्षा एजेंसियां लगातार नागरिकों को जागरूक करने का प्रयास करती रहती हैं कि वे किसी भी अनजान लिंक को ओपन न करें और अपनी गोपनीय जानकारी या पासवर्ड किसी भी सूरत में किसी के साथ साझा न करें। इस मामले में हैरानी की बात यह है कि पीड़ित ने पूरी सतर्कता बरती थी और उसने न तो किसी संदेहास्पद लिंक पर क्लिक किया था और न ही अपना कोई भी ओटीपी या पिन किसी अन्य व्यक्ति को बताया था, फिर भी उसकी खून-पसीने की कमाई ठगों की जेब में चली गई।

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फोन पे के माध्यम से दो बार में निकाले गए पैसे

शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए साइबर अपराधियों ने फोन पे एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया है। ऐसा अंदेशा जताया जा रहा है कि शातिर ठगों ने दो अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए पीड़ित के बैंक खाते से कुल 1,58,700 रुपये की भारी-भरकम राशि दूसरे खातों में ट्रांसफर कर ली। पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञों की शुरुआती जांच में इस बात पर गौर किया जा रहा है कि शायद अपराधियों ने किसी अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए पीड़ित के स्मार्टफोन को ही हैक कर लिया हो। मोबाइल फोन के हैक हो जाने की स्थिति में ठगों को बैंक खातों से जुड़े सभी ओटीपी और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां सीधे उनके सिस्टम पर मिल जाती हैं, जिसके कारण उन्हें पीड़ित से ओटीपी पूछने की कोई आवश्यकता ही नहीं पड़ती है। मोबाइल हैकिंग का यह तरीका बेहद खतरनाक श्रेणी में आता है क्योंकि इसमें यूजर को इस बात का आभास तक नहीं हो पाता कि उसका निजी डिवाइस किसी और के नियंत्रण में जा चुका है।

खाते से रकम कटने के मैसेज से हुआ खुलासे का अहसास

पीड़ित को इस बड़ी और गंभीर ठगी का तब पता चल पाया जब उसके मोबाइल फोन पर बैंक खाते से पैसे कटने के लगातार मैसेज आने शुरू हुए। अचानक से बैंक खाते से एक साथ इतनी बड़ी रकम गायब होने का संदेश देखकर पीड़ित के पैरों तले जमीन खिसक गई और उसके होश उड़ गए। उसने तुरंत घबराहट में अपने बैंक खाते का डिजिटल बैलेंस चेक किया, जहां यह बात पूरी तरह सच साबित हुई कि उसके खाते से 1,58,700 रुपये की पूरी राशि गायब हो चुकी थी। इसके बाद बिना एक पल भी गंवाए पीड़ित ने तुरंत बैंक के अधिकारियों से संपर्क साधा और अपने बैंक खाते को तत्काल प्रभाव से ब्लॉक करवाया ताकि और अधिक नुकसान से बचा जा सके। इस दिल दहला देने वाली घटना के बाद से पीड़ित मानसिक रूप से काफी तनाव और परेशानी के दौर से गुजर रहा है।

मुक्ताप्रसाद थाने में मुकदमा दर्ज और पुलिस की तफ्तीश

इस प्रकार की शातिर ठगी का शिकार होने के तुरंत बाद पीड़ित ने बीकानेर के मुक्ताप्रसाद पुलिस थाने का रुख किया और वहां पहुंचकर पुलिस अधिकारियों को पूरी आपबीती सुनाई, जिसके बाद साइबर ठगी का आधिकारिक मामला दर्ज कर लिया गया। मुक्ताप्रसाद थाना पुलिस ने पीड़ित की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तुरंत प्रभाव से मुकदमा दर्ज कर तकनीकी पहलुओं पर अपनी जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब साइबर सेल की तकनीकी मदद से उन तमाम बैंक खातों और फोन पे नंबरों की गहराई से छानबीन कर रही है जिनमें यह ठगी का पैसा ट्रांसफर किया गया है। पुलिस का स्पष्ट तौर पर यह कहना है कि यह एक बेहद गंभीर किस्म का अपराध है और नागरिकों को अपने मोबाइल तथा बैंकिंग ऐप्स का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आम जनता को यह सलाह दी जाती है कि वे अपने फोन में किसी भी प्रकार के अज्ञात या थर्ड-पार्टी एप्लिकेशन को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें और हमेशा अपने फोन के सिक्योरिटी अपडेट्स को ऑन रखें, क्योंकि ऐसे मामलों में जितनी जल्दी पुलिस कार्रवाई होती है, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा बढ़ जाती है।

सवाल-जवाब

बीकानेर में साइबर ठगी की इस घटना में कितने रुपये की ठगी हुई?
पीड़ित के बैंक खाते से कुल 1,58,700 रुपये की राशि निकाली गई।
क्या ठगी के दौरान पीड़ित के पास कोई ओटीपी आया था?
नहीं, इस मामले में न तो कोई संदिग्ध लिंक आया और न ही किसी ने फोन पर ओटीपी पूछा।
किस एप्लीकेशन के जरिए पैसों का ट्रांसफर किया गया?
साइबर ठगों ने इस वारदात को अंजाम देने के लिए फोन पे एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया।
घटना के बाद पीड़ित ने क्या कदम उठाया?
पीड़ित ने तुरंत बैंक अधिकारियों से संपर्क कर अपना खाता ब्लॉक करवाया और मुक्ताप्रसाद थाने में शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है?
मुक्ताप्रसाद थाना पुलिस साइबर सेल की मदद से उन बैंक खातों और फोन पे नंबरों की तकनीकी जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर हुए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sandeep Yadav@sandeep-yadav·8 दिन पहले

आज खेल जगत भी पूरी तरह डिजिटल लेन-देन, ऑनलाइन टिकट बिक्री और फैन मर्चेंडाइज पर निर्भर हो चुका है। खिलाड़ियों से लेकर खेल प्रेमियों तक सभी वित्तीय लेनदेन के लिए इन्हीं मोबाइल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं। बिना ओटीपी के फोन हैक करके पैसा गायब करने का यह नया तरीका सिर्फ आम नागरिकों के लिए ही नहीं, बल्कि बड़े स्पोर्ट्स इवेंट्स के डिजिटल पेमेंट्स और एथलीटों की वित्तीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है। साइबर सुरक्षा एजेंसियों को इस तरह के रिमोट एक्सेस हैकिंग पर लगाम लगाने के लिए तत्काल सख्त कदम उठाने होंगे, वरना डिजिटल इकोनॉमी पर लोगों का विश्वास डगमगा सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की सरकारी नीतियों के बीच ऐसी घटनाएँ आम नागरिकों के भरोसे को गहरी चोट पहुँचाती हैं। बिना ओटीपी और लिंक के बैंक खाते में सेंधमारी यह दर्शाती है कि साइबर सुरक्षा और फिनटेक नियमन के मोर्चे पर गंभीर नीतिगत कमियाँ मौजूद हैं। गृह मंत्रालय, आरबीआई और साइबर सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल इस तरह के नए तकनीकी खतरों से निपटने के लिए नियामक ढाँचे को सख्त करना होगा, ताकि डिजिटल भुगतान प्रणाली पर जनता का विश्वास बना रहे।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

अर्जुन की बात बिल्कुल सटीक है। वित्तीय बाज़ार और फिनटेक तंत्र के नज़रिए से देखें तो यूपीआई इकोसिस्टम पर डिवाइस-लेवल हमलों और मालवेयर का बढ़ता ख़तरा बेहद चिंताजनक है। जब तक बैंक और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म्स जीरो-ट्रस्ट ऑथेंटिकेशन और रियल-टाइम बिहेवियरल मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों को अनिवार्य रूप से लागू नहीं करेंगे, तब तक ऐसे फ्रॉड रोकना मुश्किल होगा। इसके अलावा, बिना किसी यूजर-गलती के हुए वित्तीय नुकसान पर पीड़ितों के लिए ज़ीरो-लायबिलिटी नीति और त्वरित रिफंड फ्रेमवर्क को सख्ती से लागू करना होगा, वरना आम नागरिकों का डिजिटल वित्तीय प्रणालियों पर से भरोसा उठ सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

बिना ओटीपी या लिंक के बैंक खाता साफ होना यह दर्शाता है कि साइबर अपराध अब सामान्य ठगी से आगे बढ़कर रिमोट डिवाइस हैकिंग जैसे जटिल तकनीकी हमलों में बदल चुका है। यह मामला डिजिटल भुगतान प्रणाली और फिनटेक प्लेटफॉर्मों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है। केवल बुनियादी जागरूकता अभियानों के सहारे ऐसे तकनीक-आधारित खतरों से नहीं लड़ा जा सकता। पुलिस की साइबर शाखाओं को अपनी फॉरेंसिक जांच क्षमताओं को तुरंत अपग्रेड करना होगा। साथ ही, वित्तीय ऐप्स को संदिग्ध डिवाइस गतिविधियों को पहचानकर अनधिकृत लेन-देन को स्वतः रोकने वाले सुरक्षा तंत्र मजबूत करने की आवश्यकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

कानूनी और जांच के नजरिए से देखें तो यह मामला साक्ष्य जुटाने की पूरी प्रक्रिया के लिए एक बड़ी चुनौती है। जब पीड़ित ने कोई ओटीपी या लिंक साझा नहीं किया, तो अदालत में यह साबित करने का पूरा दारोमदार फॉरेंसिक जांच पर आ जाता है कि डिवाइस को रिमोट एक्सेस या मालवेयर के जरिए हैक किया गया था। साइबर पुलिस को शुरुआती 'गोल्डन आवर्स' में ही पीड़ित के मोबाइल का डिजिटल फॉरेंसिक विश्लेषण कर पुख्ता सबूत जुटाने होंगे। यदि जांच एजेंसियां हैकिंग को कानूनी रूप से साबित करने में नाकाम रहती हैं, तो पीड़ित को अनधिकृत लेन-देन के तहत मिलने वाले कानूनी संरक्षण और रिफंड में भी भारी बाधा आएगी।

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