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बिलासपुर हिंसा: थाने पर हमला और पथराव के बाद कोतवाली क्षेत्र में धारा 144 लागूछत्तीसगढ़
29 अग॰ 2026, 11:09 am (27 दिन पहले)· 2

बिलासपुर हिंसा: थाने पर हमला और पथराव के बाद कोतवाली क्षेत्र में धारा 144 लागू

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर दो पक्षों में हुई हिंसक झड़प के बाद प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी है। इस उपद्रव में थाने और दुकानों में तोड़फोड़ हुई तथा कई पुलिसकर्मी घायल हो गए।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हाल ही में हुई एक भयंकर हिंसक झड़प के बाद जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी करते हुए अत्यंत कड़े कदम उठाए हैं। कानून और व्यवस्था की स्थिति को बनाए रखने के लिए संवेदनशील कोतवाली क्षेत्र में धारा 144 पूरी तरह से लागू कर दी गई है। इस नए आदेश के अंतर्गत इलाके में किसी भी प्रकार के जुलूस, जनसभा या फिर भारी भीड़ के इकट्ठा होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। सुरक्षा के लिहाज से पूरे क्षेत्र को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है जहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है और प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार फिलहाल हालात पर नियंत्रण पा लिया गया है।

सोशल मीडिया पोस्ट से भड़का विवाद

इस पूरी घटना की जड़ में इंटरनेट मीडिया पर शेयर किया गया एक विवादित संदेश था जिसने दो पक्षों के बीच तनाव की चिंगारी को भड़का दिया। इसके बाद सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खपरगंज इलाके में दोनों पक्षों के लोग आमने-सामने आ गए और उनके बीच तीखी बहस के साथ गाली-गलौज शुरू हो गई। देखते ही देखते यह मौखिक विवाद एक गंभीर मारपीट में तब्दील हो गया और दोनों तरफ से जमकर पथराव शुरू हो गया। रात के समय सैकड़ों लोगों की भीड़ के सड़क पर उतर आने से पूरे इलाके में अफरा-तफरी और भय का माहौल बन गया।

थाने और दुकानों में भयंकर तोड़फोड़

उपद्रवी भीड़ यहीं नहीं रुकी बल्कि उन्होंने सिटी कोतवाली थाने के साथ-साथ आसपास बने आवासीय घरों और कई व्यापारिक दुकानों को भी निशाना बनाते हुए भारी तोड़फोड़ की। पथराव इतना भीषण था कि मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के लिए हालात पर काबू पाना बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। इस अनियंत्रित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस बल को कड़ा रुख अपनाते हुए लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के कई गोले छोड़ने पड़े। इस हिंसक संघर्ष के दौरान तारबाहर थाना प्रभारी रवि तिवारी समेत कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए जिन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस अंधाधुंध पथराव की चपेट में आने से कई आम नागरिकों को भी गंभीर चोटें आई हैं।

अतिरिक्त बल की तैनाती और अधिकारियों की मौजूदगी

हालात की गंभीरता को भांपते हुए प्रशासनिक तंत्र ने तुरंत हरकत में आते हुए पड़ोसी जिलों मुंगेली और जांजगीर से अतिरिक्त पुलिस बल की मांग कर उन्हें मौके पर बुलवा लिया। स्थिति की नज़ाकत को देखते हुए कलेक्टर संजय अग्रवाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह खुद देर रात तक कोतवाली थाने में डटे रहे और पूरी स्थिति पर व्यक्तिगत रूप से नजर बनाए रखी। इन दोनों शीर्ष अधिकारियों ने घटनास्थल पर मुस्तैद रहकर पुलिस बल को आवश्यक और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए ताकि उपद्रव को और आगे बढ़ने से रोका जा सके।

सीसीटीवी फुटेज से उपद्रवियों की पहचान

कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों की धरपकड़ के लिए पुलिस ने अब वीडियो और फुटेज खंगालने का काम शुरू कर दिया है। घटना के वक्त रिकॉर्ड हुए सीसीटीवी फुटेज तथा सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो के माध्यम से पथराव और तोड़फोड़ में संलिप्त चेहरों की शिनाख्त की जा रही है। पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के तुरंत बाद इन सभी असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। पुलिस प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस उपद्रव में शामिल किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और सभी पर कानून का शिकंजा कसेगा।

प्रशासन की अपील और निगरानी

जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए यह आग्रह किया है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित होने वाली किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि इस तरह की भड़काऊ पोस्ट और संदेश शेयर करने वालों पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एहतियात के तौर पर सभी संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त बढ़ा दी गई है और साइबर सेल द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी नई अशांति को समय रहते रोका जा सके।

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सवाल-जवाब

बिलासपुर में धारा 144 क्यों लागू की गई है?
कोतवाली क्षेत्र में दो पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प, तोड़फोड़ और पथराव के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लागू की है।
इस हिंसा की शुरुआत कैसे हुई थी?
इस पूरे मामले की शुरुआत सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक विवादित पोस्ट से हुई थी जिसके बाद खपरगंज इलाके में दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
इस घटना में कौन-कौन से अधिकारी मौके पर मौजूद रहे?
कलेक्टर संजय अग्रवाल और एसएसपी रजनेश सिंह खुद देर रात तक कोतवाली थाने में मौजूद रहकर स्थिति पर नजर बनाए हुए थे।
हिंसा के दौरान कौन से अधिकारी घायल हुए?
तारबाहर थाना प्रभारी रवि तिवारी समेत कई पुलिसकर्मी इस पथराव और हिंसा में घायल हुए हैं जिन्हें अस्पताल भेजा गया।
अतिरिक्त पुलिस बल कहां से मंगाया गया?
बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने मुंगेली और जांजगीर जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलवाया है।
उपद्रवियों की पहचान कैसे की जा रही है?
पुलिस घटना के समय के सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

बिलासपुर की यह घटना सोशल मीडिया के अनियंत्रित प्रसार और कानून-व्यवस्था के लिए बढ़ते खतरे को स्पष्ट करती है। थाने पर सीधा हमला न्याय व्यवस्था को सीधे चुनौती देना है। सीसीटीवी फुटेज से उपद्रवियों की पहचान कर रासुका जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई करनी होगी। साथ ही, अफवाह फैलाने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की निगरानी तेज करने की सख्त जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

बिलासपुर की इस घटना से यह साफ है कि सोशल मीडिया की अफवाहें कितनी तेजी से जमीनी हिंसा का रूप ले सकती हैं। थाने पर हमला और पुलिसकर्मियों का घायल होना सीधे तौर पर प्रशासनिक इकबाल को चुनौती है। अब पुलिस के लिए सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर त्वरित और सख्त कानूनी शिकंजा कसना बेहद जरूरी हो गया है, ताकि भविष्य में ऐसी अराजकता को रोका जा सके।

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