राजस्थान के विभिन्न जिलों से प्रशासनिक, कानूनी और कानून व्यवस्था से जुड़ी कई अहम घटनाएं सामने आई हैं। समरावता थप्पड़ कांड मामले में टोंक जेल में बंद नरेश मीणा को राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने शर्तों के साथ उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया है। इसके अलावा सिरोही में दो इनामी अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद उनके स्थानीय संपर्कों की पड़ताल, पिण्डवाड़ा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों पर अचानक पथराव, जयपुर शहर के बूथों पर मक्खन की आपूर्ति में कमी और खैरथल नगर परिषद में सभापति चुनाव को लेकर उभरा सियासी विवाद चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।
नरेश मीणा को कड़ी शर्तों के साथ मिली जमानत
टोंक की एससी-एसटी विशेष अदालत से जमानत खारिज होने के बाद नरेश मीणा ने 6 अगस्त को आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद से वह टोंक जेल में न्यायिक हिरासत में बंद थे। इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल उपमन की अदालत में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने उनकी जमानत याचिका स्वीकार करते हुए रिहाई का आदेश दिया। अदालत ने इस आदेश के साथ कई कड़ी शर्तें तय की हैं।
न्यायालय के निर्देशानुसार, नरेश मीणा को हर महीने के पहले सप्ताह में नगरफोर्ट थाने में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर हाजिरी देनी होगी। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह भविष्य में किसी अन्य आपराधिक गतिविधि में शामिल नहीं होंगे। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी जोड़ी गई है कि जेल से बाहर आने के बाद वह सार्वजनिक रूप से या सामाजिक स्तर पर अपनी छवि का किसी भी प्रकार से महिमामंडन नहीं करेंगे। इन सभी औपचारिकताओं के पूरा होने के बाद उनकी जेल से रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सिरोही में इनामी शूटरों के संपर्कों की गहन पड़ताल
राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स ने लॉरेंस और आरजू गिरोह से कथित तौर पर जुड़े दो इनामी शार्पशूटरों को जोधपुर से हिरासत में लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद सिरोही जिले का नाम प्रमुखता से सामने आया है क्योंकि जोधपुर पहुंचने से पहले दोनों आरोपी सिरोही स्थित एक होटल में ठहरे हुए थे। दोनों के सिरोही में रुकने और स्थानीय स्तर पर किसी संभावित नेटवर्क से संपर्क साधने को लेकर खुफिया व पुलिस एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
शूटरों के पास से कुछ संभावित लक्ष्यों की तस्वीरें बरामद होने की बातें भी कही जा रही हैं, यद्यपि इस बिंदु पर आधिकारिक तौर पर अंतिम पुष्टि होना अभी बाकी है। जांच अधिकारी अब होटल के रिकॉर्ड, ठहरने की अवधि और सिरोही में उनसे मिलने वाले संदिग्ध व्यक्तियों के संपर्कों का ब्योरा खंगाल रहे हैं, ताकि पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को आपस में जोड़ा जा सके।
उदयपुर-पिण्डवाड़ा हाईवे पर मोरस टोल के पास पथराव
सिरोही जिले के पिण्डवाड़ा क्षेत्र में उदयपुर-पिण्डवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक वाहनों पर पत्थरबाजी की घटना दर्ज की गई। मोरस टोल प्लाजा के समीप देर रात करीब एक दर्जन व्यक्तियों के झुंड ने मार्ग से गुजर रही गाड़ियों को निशाना बनाया। इस अचानक हुए हमले की जद में उदयपुर की ओर से सिरोही जा रही एक निजी कार भी आ गई। पत्थरों की चोट से कार के शीशे चकनाचूर हो गए।
इस अप्रत्याशित पथराव में कार में यात्रा कर रहे लोग बाल-बाल बच गए, जबकि वाहन चालक को चोटें आई हैं। रात के अंधेरे में हाईवे पर अचानक हुए इस हमले से वहां से गुजर रहे चालकों और मुसाफिरों में भारी दहशत फैल गई। घटना के तुरंत बाद सड़क पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और मामले की सूचना पर पुलिस दल मौके पर पहुंचा।
जयपुर के डेयरी बूथों पर मक्खन की किल्लत
राजधानी जयपुर के विभिन्न इलाकों में स्थित डेयरी बूथों पर बटर की उपलब्धता को लेकर उपभोक्ताओं और खुदरा विक्रेताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। खुदरा दुकानदारों का कहना है कि अमूल और सरस दोनों ही प्रमुख ब्रांडों के मक्खन की नियमित आपूर्ति पिछले करीब दो महीनों से प्रभावित चल रही है। बाजार में बड़े हिस्सेदार अमूल की आपूर्ति कम होने का सीधा दबाव स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय सरस ब्रांड पर आ पड़ा है, जिससे मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ गया है।
बूथों पर पहुंचने वाले ग्राहकों को उनकी जरूरत के अनुसार पैकेट नहीं मिल पा रहे हैं। इस संबंध में अमूल प्रबंधन के प्रतिनिधियों का कहना है कि स्टॉक की आपूर्ति में कुछ कमी अवश्य आई है, परंतु यह स्थिति कोई व्यापक किल्लत नहीं है। दूसरी ओर, सरस डेयरी के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बाजार में अप्रत्याशित मांग को देखते हुए पहले के मुकाबले अधिक मात्रा में मक्खन बाजार में भेजा जा रहा है ताकि उपभोक्ताओं की मांग को पूरा किया जा सके।
खैरथल नगर परिषद में 10 से 15 करोड़ के आरोप पर सियासी घमासान
खैरथल नगर परिषद के नवनिर्वाचित सभापति विक्रम सिंह चौधरी उर्फ विक्की चौधरी द्वारा कांग्रेस पार्टी छोड़ भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर चुनाव जीतने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। विक्की चौधरी ने सार्वजनिक दावा किया कि कांग्रेस में रहते हुए जब सभापति पद की उम्मीदवारी पर मंथन चल रहा था, तब उनसे 10 से 15 करोड़ रुपए जमा कराने की अनुचित मांग की गई थी। उन्होंने इस कथित लेन-देन की मांग का सीधा आरोप मुंडावर विधायक ललित यादव और चुनाव कैंपेनिंग कमेटी से जुड़े नेताओं पर लगाया।
दूसरी तरफ, मुंडावर विधायक ललित यादव ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। विधायक का कहना है कि किसी भी प्रकार के 10 से 15 करोड़ रुपयों की कोई बात नहीं हुई थी, बल्कि चुनाव के संदर्भ में 10 से 15 निर्वाचित सदस्यों के समर्थन और संख्याबल को लेकर संगठनात्मक चर्चा हुई थी। दोनों पक्षों के इस आमने-सामने के बयान से इलाके का सियासी पारा पूरी तरह गरमा गया है।






















