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सेंट्रल एशिया के चार दिवसीय दौरे पर रवाना हो रहे नरेंद्र मोदी, एससीओ समिट और रक्षा सौदों पर रहेगी दुनिया की नजरभारत
28 अग॰ 2026, 11:51 pm (2 घंटे पहले)· 1

सेंट्रल एशिया के चार दिवसीय दौरे पर रवाना हो रहे नरेंद्र मोदी, एससीओ समिट और रक्षा सौदों पर रहेगी दुनिया की नजर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की चार दिवसीय कूटनीतिक यात्रा पर रवाना हो रहे हैं। इस दौरान वे एससीओ समिट में भाग लेंगे, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा करेंगे और अमेरिका से 436 करोड़ रुपये के जैवलिन मिसाइल सौदे को अंतिम रूप देंगे।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मध्य एशिया के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चार दिवसीय दौरे की शुरुआत कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान वैश्विक कूटनीति का एक नया और प्रभावकारी अध्याय देखने को मिलेगा, जिस पर अमेरिका, चीन और पाकिस्तान सहित पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। प्रधानमंत्री का यह दौरा उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान केंद्रित है, जहाँ वे शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन के मंच पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जैसे वैश्विक दिग्गजों की मौजूदगी इस यात्रा के महत्व को बहुगुणित कर देती है। भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा, क्षेत्रीय संपर्क और राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के इरादे से इस बहुस्तरीय वार्ता मंच पर उतर रहा है।

उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान यात्रा का पूरा कार्यक्रम

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विस्तृत मध्य एशियाई दौरे का खाका बहुत रणनीतिक ढंग से तैयार किया गया है। वे 29 अगस्त और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे, जहाँ द्विपक्षीय व्यापार, सुरक्षा और ढांचागत सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इसके तुरंत बाद, वे 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान की यात्रा पर रहेंगे। किर्गिस्तान में ही शंघाई सहयोग संगठन का उच्चस्तरीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक संतुलन पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।

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इस पूरे दौरे की सबसे बड़ी प्राथमिकता और अंतरराष्ट्रीय मीडिया के आकर्षण का केंद्र एससीओ समिट के दौरान होने वाली उच्चस्तरीय बैठकें हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता का कार्यक्रम तय किया गया है। इस बैठक में भारत की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए नए समझौतों और तेल आपूर्ति के मार्गों पर सहमति बनने की संभावना है। इसी शिखर सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी उपस्थित रहेंगे, हालाँकि प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच औपचारिक द्विपक्षीय मुलाकात को लेकर अभी स्थितियाँ पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई हैं।

एससीओ समिट और वैश्विक भू-राजनीतिक समीकरण

शंघाई सहयोग संगठन के मंच पर भारत, रूस और चीन का एक साथ आना हमेशा से वैश्विक राजनीति में बड़े भू-राजनीतिक फेरबदल का संकेत रहा है। इतिहास गवाह है कि जब पिछली बार चीन में आयोजित एससीओ समिट के दौरान नरेंद्र मोदी, व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग एक साथ नजर आए थे, तो उस त्रिकोणीय मुलाकात ने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को खासी असहजता में डाल दिया था। इस बार भी यदि किर्गिस्तान में इन तीनों शीर्ष नेताओं का रणनीतिक तालमेल देखने को मिलता है, तो वाशिंगटन की वैश्विक नीति पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।

इसके अलावा, भारत इस बहुराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल आतंकवाद के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को रेखांकित करने के लिए भी करेगा। सीमा पार से जारी आतंकवाद और चरमपंथी नेटवर्कों को लेकर भारत लगातार हमलावर रहा है, और एससीओ के मंच से पाकिस्तान को घेरने की पूरी तैयारी की गई है। किर्गिस्तान में होने वाली यह शिखर वार्ता भारत में आयोजित होने वाले आगामी ब्रिक्स (BRICS) सम्मेलन के लिए भी एक मजबूत कूटनीतिक आधार तैयार करेगी।

मध्य एशिया में कूटनीतिक संतुलन और उज्बेकिस्तान का महत्व

मध्य एशियाई क्षेत्र के भू-राजनीतिक नक्शे पर उज्बेकिस्तान की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। उज्बेकिस्तान मध्य एशिया के बिल्कुल केंद्र में बसा है और इसकी सीमाएँ अफगानिस्तान से लगती हैं। वर्तमान समय में, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। ऐसी स्थिति में भारत के लिए उज्बेकिस्तान एक बेहद प्रभावी और निष्पक्ष साझेदार के रूप में उभर सकता है।

पाकिस्तान ने हाल के दिनों में तुर्किए और सऊदी अरब के साथ मिलकर मक्का पैक्ट जैसे कूटनीतिक गठबंधनों के जरिए अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश की है। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा भारत के कूटनीतिक संतुलन को मजबूती प्रदान करता है। भारत लंबे समय से इस मध्य एशियाई इलाके में सक्रिय चरमपंथी ढांचों को लेकर आशंकित रहा है, इसलिए आतंकवाद विरोधी अभियानों और खुफिया जानकारियों के आदान-प्रदान में उज्बेकिस्तान भारत का एक भरोसेमंद साथी साबित हो सकता है।

कनेक्टिविटी चुनौतियाँ और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव का मुकाबला

भारत और मध्य एशियाई देशों के बीच सीधा व्यापार बढ़ाने में सबसे बड़ी बाधा भौगोलिक संपर्क की कमी है। भारत के पास मध्य एशिया तक पहुँचने के लिए कोई प्रत्यक्ष जमीनी रास्ता मौजूद नहीं है, क्योंकि बीच में पाकिस्तान का भौगोलिक भूभाग एक स्थाई अड़चन बना हुआ है। इस भौगोलिक सीमाबद्धता से निपटने के लिए भारत वैकल्पिक व्यापारिक मार्गों के निर्माण में जुटा हुआ है। भारत ईरान स्थित चाहबार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) जैसे दूरगामी बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम कर रहा है।

यदि उज्बेकिस्तान के साथ भारत के व्यापारिक संबंध और मजबूत होते हैं, तो मध्य एशियाई बाजारों में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की पहुँच काफी आसान हो जाएगी। इस पूरे क्षेत्र में चीन ने अपने महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के जरिए अरबों डॉलर का भारी निवेश कर रखा है और अपना दबदबा कायम करने की कोशिश की है। भारत अब उज्बेकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों के साथ रक्षा, व्यापार, डिजिटल टेक्नोलॉजी और ऊर्जा क्षेत्रों में आपसी सहयोग को नया विस्तार देकर मध्य एशिया में अपनी मजबूत और स्वतंत्र रणनीतिक उपस्थिति दर्ज कराना चाहता है।

रूसी दोस्ती और अमेरिका के साथ 436 करोड़ रुपये की जैवलिन मिसाइल डील

एक तरफ जहाँ प्रधानमंत्री मोदी किर्गिस्तान में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े होकर अमेरिका और पश्चिमी जगत को यह स्पष्ट संदेश देंगे कि भारत की रूस के साथ पारंपरिक दोस्ती और ऊर्जा साझेदारी दबाव में बदलने वाली नहीं है, वहीं दूसरी तरफ भारत अमेरिका के साथ अपने रक्षा संबंधों को भी एक नई ऊँचाई दे रहा है। इस कूटनीतिक दौरे के साथ ही यह बड़ी खबर सामने आई है कि भारत और अमेरिका के बीच जैवलिन एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने का महत्वपूर्ण रक्षा सौदा तय हो गया है।

इस रक्षा समझौते के तहत भारत अमेरिका से 100 एफजीएम-148 (FGM-148) जैवलिन मिसाइल राउंड्स खरीदेगा। इसके साथ ही भारतीय सेना को 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट्स भी उपलब्ध कराई जाएँगी। यह संपूर्ण सैन्य खरीद समझौता लगभग 436 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जा रहा है। जैवलिन मिसाइल की गिनती दुनिया के सबसे घातक और सटीक कंधे से दागे जाने वाले एंटी-टैंक हथियारों में होती है।

जैवलिन मिसाइल की तकनीक और भारत में स्वदेशी निर्माण की योजना

जैवलिन एक अत्यधिक उन्नत शोल्डर-लॉन्च एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक है। एक बार मिसाइल दागे जाने के बाद यह लक्ष्य के थर्मल टेम्परेचर सिग्नेचर को पहचान कर अपने आप उसका पीछा करती है और सटीक हमला बोलती है। इसे विशेष रूप से बख्तरबंद गाड़ियों और आधुनिक युद्धक टैंकों को नष्ट करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। जैवलिन का नवीनतम वर्जन लगभग 4 किलोमीटर की दूरी तक स्थित दुश्मनों के आर्मर्ड व्हीकल्स को आसानी से ध्वस्त कर सकता है।

जैवलिन मिसाइल दो अलग-अलग अटैक मोड्स में हमला करने में सक्षम है—पहला डायरेक्ट अटैक मोड और दूसरा टॉप अटैक मोड। डायरेक्ट अटैक मोड में मिसाइल सीधे निशाने पर जाकर टकराती है, जबकि टॉप अटैक मोड में दागे जाने के बाद मिसाइल हवा में ऊपर उठती है और फिर टैंक की ऊपरी सतह पर हमला करती है। युद्धक टैंकों का अगला आर्मर बहुत मजबूत और मोटा बनाया जाता है, जबकि ऊपरी आर्मर तुलनात्मक रूप से कमजोर होता है। जैवलिन मिसाइल इसी कमजोर ऊपरी हिस्से पर प्रहार करके टैंक को पूरी तरह नष्ट कर देती है। इस मिसाइल ने यूक्रेन युद्ध के दौरान रशियन टैंकों के खिलाफ असाधारण प्रदर्शन किया था, जहाँ अमेरिका ने यूक्रेन को हजारों जैवलिन मिसाइलें प्रदान की थीं।

भारत केवल अमेरिका से इन मिसाइलों का आयात करने तक ही सीमित नहीं रहने वाला है, बल्कि भारत की मुख्य रणनीति इसे स्वदेशी स्तर पर बनाने की है। फरवरी 2025 में भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन जैवलिन जॉइंट वेंचर के बीच भारत में ही जैवलिन मिसाइलों के सह-उत्पादन और स्थानीय विनिर्माण की संभावनाएँ तलाशने के लिए एक एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसका साफ अर्थ है कि भारत अमेरिकी रक्षा तकनीक हासिल करने के साथ-साथ मेक इन इंडिया पहल के तहत देश के भीतर ही आधुनिक हथियारों का निर्माण सुनिश्चित करेगा।

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दौरा कितने दिनों का है और वे किन देशों में जा रहे हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिनों के दौरे पर 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान तथा 31 अगस्त और 1 सितंबर को किर्गिस्तान की यात्रा पर रहेंगे।
किर्गिस्तान में आयोजित होने वाले एससीओ समिट में कौन-कौन से प्रमुख नेता शामिल हो रहे हैं?
इस समिट में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं।
भारत और अमेरिका के बीच जैवलिन मिसाइल की डील कितने रुपये में हुई है?
भारत और अमेरिका के बीच 100 FGM-148 जैवलिन मिसाइल राउंड्स और 25 लाइटवेट कमांड लॉन्च यूनिट्स की यह खरीद डील करीब 436 करोड़ रुपये में तय हुई है।
जैवलिन मिसाइल की मारक क्षमता और खासियत क्या है?
जैवलिन एक कंधे से दागी जाने वाली 'फायर एंड फॉरगेट' एंटी-टैंक मिसाइल है जिसकी मारक क्षमता लगभग 4 किलोमीटर है। यह टैंकों के सबसे कमजोर ऊपरी हिस्से पर टॉप अटैक मोड से वार करके उन्हें नष्ट करती है।
क्या जैवलिन मिसाइल का निर्माण भारत में भी किया जाएगा?
हाँ, फरवरी 2025 में भारत डायनेमिक्स लिमिटेड और लॉकहीड मार्टिन जैवलिन जॉइंट वेंचर के बीच भारत में इसके सह-उत्पादन और विनिर्माण की संभावनाएँ तलाशने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए थे।
मध्य एशिया तक व्यापार पहुँचाने के लिए भारत किन वैकल्पिक रूट्स पर काम कर रहा है?
पाकिस्तान द्वारा रास्ता रोके जाने के कारण भारत ईरान के चाहबार पोर्ट और इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) के जरिए मध्य एशिया तक अपनी पहुँच बना रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·2 मिनट पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मध्य एशिया दौरा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा तैयारियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इस यात्रा के दौरान रूस के साथ ऊर्जा आपूर्ति पर होने वाली चर्चा और 436 करोड़ रुपये के जैवलिन मिसाइल सौदे को अंतिम रूप दिए जाने से भारतीय सामरिक स्थिति मजबूत होगी। वैश्विक बाजार और वित्तीय समीकरणों के दृष्टिकोण से, एससीओ समिट के इतर होने वाली कूटनीतिक बैठकें और क्षेत्रीय व्यापार समझौते एशियाई भू-राजनीति में नए आर्थिक रुझानों को तय करेंगे, जिस पर निवेशकों और वैश्विक बाजारों की पैनी नजर रहेगी।

Rohan Gupta@rohan-gupta·2 मिनट पहले

रोहन गुप्ता के रूप में मेरा मानना है कि इस यात्रा के दौरान ऊर्जा सुरक्षा और रक्षा सौदों के साथ-साथ डिजिटल बुनियादी ढांचे और तकनीकी सहयोग पर भी निवेशकों की पैनी नजर रहेगी। एससीओ मंच पर एआई, साइबर सुरक्षा और डिजिटल इनोवेशन जैसे तकनीकी आयामों पर भविष्य की साझेदारी के जो संकेत मिलेंगे, वे भारतीय तकनीकी स्टार्टअप्स और वैश्विक डिजिटल रुझानों के लिए नए रास्ते खोल सकते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस मध्य एशियाई दौरे में आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' नीति को रेखांकित करने का जो संदर्भ दिया गया है, वह सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय अपराध, सीमा पार आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के कानूनी ढाँचों से जुड़ा है। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के मंच पर आतंकवाद के वित्तपोषण और संगठित अपराधों के खिलाफ कानूनी सहयोग बढ़ाने पर होने वाली चर्चाएं भारत की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह समझना आवश्यक है कि एससीओ के क्षेत्रीय आतंकवाद विरोधी ढांचे (रैट्स) के माध्यम से खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान भारत के लिए सीमा पार के खतरों से निपटने में एक प्रभावी कूटनीतिक हथियार बनता जा रहा है। इसके अलावा, अमेरिका से जैवलिन मिसाइल सौदे को अंतिम रूप देना और एक साथ रूसी ऊर्जा आपूर्ति पर चर्चा करना, नई दिल्ली की उस रणनीतिक स्वायत्तता को दर्शाता है जहाँ वह पश्चिमी औरूरेशियाई शक्तियों के बीच संतुलन साधते हुए अपनी रक्षा और ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दे रही है।

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