भारतीय ट्रेनों में सफर के दौरान पैंट्री कार से मिलने वाले खाने-पीने के सामान की शुद्धता को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने ट्रेनों में घटिया और मिलावटी खाद्य सामग्री बेचने वालों के खिलाफ एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। ताजा मामला चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस का है, जहां यात्रियों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ किया जा रहा था। इस ट्रेन में खान-पान की सेवाएं देने वाले सोपन रेस्टोरेंट नामक पैंट्री संचालक को घटिया गुणवत्ता का पेय पदार्थ परोसने का दोषी पाया गया है। नियामक की जांच में मिलावट की पुष्टि होने के बाद विभाग ने इस संचालक के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है और उस पर भारी जुर्माना लगाया गया है।
चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस में हुई जांच, सैंपल फेल होने से मची खलबली
लंबी दूरी की ट्रेनों में यात्रा करने वाले लाखों लोग अक्सर डिब्बाबंद और सीलबंद खाद्य पदार्थों को पूरी तरह सुरक्षित मानकर खरीद लेते हैं। लेकिन इस घटना ने यात्रियों के इस भरोसे को बड़ा झटका दिया है। नियमित जांच के दौरान चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस की पैंट्री कार संख्या 15904 से नोवा फ्लेवर्ड डबल टोंड मिल्क के सैंपल एकत्र किए गए थे। यह उत्पाद ट्रेन में यात्रा कर रहे यात्रियों को धड़ल्ले से बेचा जा रहा था। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने इस दूध के पैकेट को जब्त कर विस्तृत रासायनिक और पोषण संबंधी जांच के लिए असम की एक अत्याधुनिक प्रयोगशाला में भेजा था।
असम की इस लैब से जो रिपोर्ट सामने आई, उसने सबको चौंका दिया। प्रयोगशाला के विशेषज्ञों द्वारा की गई जांच में यह दूध सरकार द्वारा निर्धारित गुणवत्ता के आवश्यक मानकों पर पूरी तरह से खरा नहीं उतरा। जांच रिपोर्ट में इस फ्लेवर्ड डबल टोंड मिल्क को खाद्य सुरक्षा एवं मानक (FSS) एक्ट 2006 के कड़े प्रावधानों के तहत अत्यंत घटिया और सब-स्टैंडर्ड यानी मानक से कम घोषित किया गया। प्रयोगशाला से मिली इस वैज्ञानिक पुष्टि ने यह साबित कर दिया कि पैंट्री संचालक यात्रियों के स्वास्थ्य को खतरे में डालकर मुनाफा कमाने में लगा हुआ था।
नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे और अलीपुरद्वार के अधिकारियों ने शुरू की कानूनी कार्रवाई
असम की प्रयोगशाला से मिली फेलियर रिपोर्ट के बाद रेलवे प्रशासन और खाद्य सुरक्षा विभाग तुरंत हरकत में आ गए। जैसे ही इस मिलावट की आधिकारिक रिपोर्ट मिली, नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे के मालीगांव स्थित नामित अधिकारी ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पूरी जांच रिपोर्ट को दूध बनाने वाली मूल कंपनी और इससे जुड़े अन्य सभी पक्षों को भेज दिया ताकि इस पूरे मामले में विनिर्माण के स्तर पर भी जवाबदेही तय की जा सके और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ सके।
इसके बाद कानूनी कार्रवाई का दायरा और बढ़ गया जब अलीपुरद्वार के निर्णयन अधिकारी ने इस मामले में सीधे दखल दिया। उन्होंने खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 की धारा 68 के तहत त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया। इसके साथ ही इस पूरे मामले में दोषियों को सजा दिलाने के लिए आधिकारिक निर्णयन प्रक्रिया शुरू कर दी गई ताकि रेल यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा न जा सके।
सोपन रेस्टोरेंट पर लगा जुर्माना, पैंट्री कार की मॉनिटरिंग पर उठे सवाल
अदालती और प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आखिरकार यात्रियों के स्वास्थ्य से समझौता करने वाले दोषियों पर गाज गिर ही गई। निर्णयन अधिकारी ने विस्तृत जांच और सबूतों के आधार पर सोपन रेस्टोरेंट के अधिकृत प्रतिनिधि को घटिया और मिलावटी दूध बेचने का दोषी ठहराया। अधिकारी ने दोषी पर तत्काल कड़ा आर्थिक जुर्माना लगाने का आदेश जारी किया। हालांकि, नियामक संस्था FSSAI ने इस जुर्माने की सटीक राशि की घोषणा अभी सार्वजनिक रूप से नहीं की है, लेकिन इस कार्रवाई ने अन्य पैंट्री संचालकों को एक सख्त संदेश जरूर दे दिया है।
इस पूरे खुलासे के बाद भारतीय रेल के पैंट्री सिस्टम और ट्रेनों में बिकने वाले भोजन की नियमित निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। रेल यात्रियों और विभिन्न यात्री संगठनों ने कई बार ट्रेनों में परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर शिकायतें दर्ज कराई हैं। चंडीगढ़-डिब्रूगढ़ एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन में इस तरह की मिलावट सामने आना यह दर्शाता है कि ट्रेनों में खाद्य पदार्थों की समय-समय पर औचक जांच करना और बाहरी वेंडरों पर सख्त निगरानी रखना कितना आवश्यक हो गया है।
मिलावटखोरों के खिलाफ FSSAI का देशव्यापी अभियान तेज
सोपन रेस्टोरेंट के खिलाफ की गई यह कड़ी कार्रवाई कोई अकेली घटना नहीं है। FSSAI इस समय पूरे देश में मिलावटखोरों, नियमों का उल्लंघन करने वाले फूड बिजनेस ऑपरेटरों और अस्वास्थ्यकर तरीके से काम करने वाली कंपनियों के खिलाफ एक सघन और व्यापक अभियान चला रहा है। खाद्य सुरक्षा नियामक का उद्देश्य देश के हर नागरिक तक सुरक्षित और पौष्टिक आहार पहुंचाना है, जिसके लिए वह लगातार विनिर्माण इकाइयों पर नजर रख रहा है।
इसी अभियान के हिस्से के रूप में इसी सप्ताह की शुरुआत में FSSAI ने पंजाब की एक बड़ी इकाई रिहान हेल्थकेयर के खिलाफ भी बड़ा एक्शन लिया था। इस कंपनी की हेल्थ सप्लीमेंट बनाने वाली यूनिट में सुरक्षा और गुणवत्ता से जुड़ी कई गंभीर कमियां और अनियमितताएं पाई गई थीं। इसके बाद विभाग ने रिहान हेल्थकेयर का विनिर्माण लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इसके साथ ही कंपनी को कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है कि जब तक वे अपनी यूनिट की सभी तकनीकी और स्वच्छता संबंधी कमियों को पूरी तरह दूर नहीं कर लेते, तब तक वहां किसी भी प्रकार का उत्पादन शुरू नहीं किया जा सकेगा।

















