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चावल की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं यह वैज्ञानिक सूत्र, जड़ उपचार से लेकर सही जल प्रबंधन का पूरा तरीकाझारखंड
12 सित॰ 2026, 2:31 pm (14 दिन पहले)· 3

चावल की बंपर पैदावार के लिए अपनाएं यह वैज्ञानिक सूत्र, जड़ उपचार से लेकर सही जल प्रबंधन का पूरा तरीका

धान की फसल में कीट नियंत्रण, जड़ उपचार, संतुलित पोषण और जल प्रबंधन के जरिए पैदावार बढ़ाई जा सकती है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. राय ने किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश साझा किए हैं।

धान की खेती में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के लिए रोपाई के समय से लेकर शुरुआती विकास चरणों तक सही प्रबंधन आवश्यक होता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. राय ने किसानों को फसल सुरक्षा और बेहतर पैदावार के लिए कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक तरीके बताए हैं। उनके अनुसार, रोपाई के दौरान उचित जड़ उपचार, संतुलित खाद का प्रयोग, कीटों की समय पर निगरानी और खेत में पानी का सही स्तर बनाए रखना फसल की सेहत के लिए बेहद जरूरी है।

रोपाई के समय जड़ उपचार और संतुलित पोषण

फसल को शुरुआती दौर में बीमारियों से बचाने के लिए रोपाई से ठीक पहले पौधों की जड़ों का उपचार करना एक असरदार तरीका है। कृषि वैज्ञानिक के अनुसार, कार्बेन्डाजिम के घोल में धान के छोटे पौधों की जड़ों को कुछ देर तक डुबोकर रखने के बाद ही रोपाई करनी चाहिए। यह प्रक्रिया शुरुआती अवस्था में लगने वाले फफूंदजनित रोगों के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देती है।

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इसके साथ ही जड़ों के मजबूत विकास और बेहतर फैलाव के लिए एजोटोबैक्टर फर्टिलाइजर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। डॉ. राय का कहना है कि सिर्फ कीट नियंत्रण से ही अच्छी उपज नहीं मिलती, बल्कि खेत में संतुलित खाद प्रबंधन भी उतना ही आवश्यक है। जब फसल को उसकी जरूरत के हिसाब से पोषक तत्व मिलते हैं, तो पौधे तेजी से बढ़ते हैं और मजबूत बनते हैं।

कीट प्रबंधन और तना छेदक से बचाव

धान की रोपाई संपन्न होने के लगभग 20 से 25 दिन बाद फसलों पर कीटों का हमला होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इस वजह से किसानों को रोपाई के बाद लगातार अपने खेतों का निरीक्षण करते रहना चाहिए। अगर शुरुआती दौर में ही कीटों या बीमारियों के लक्षणों की पहचान कर ली जाए, तो गंभीर नुकसान से बचा जा सकता है।

विशेषज्ञ ने खास तौर पर तना छेदक कीट की रोकथाम पर ध्यान देने को कहा है। खेत में तना छेदक का असर दिखाई देने पर बिना सलाह के मनमाने ढंग से रसायनों का छिड़काव नहीं करना चाहिए। किसानों को चाहिए कि वे किसी कृषि विशेषज्ञ से परामर्श लेकर ही अनुशंसित कीटनाशक की सही मात्रा का प्रयोग करें। इससे बेवजह कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचाव होता है और आर्थिक बचत भी होती है।

सिंचाई प्रबंधन और जल निकासी की व्यवस्था

धान के खेत में पानी का स्तर सही बनाए रखना फसल के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रोपाई के समय खेत में जल का स्तर लगभग 2 से 5 सेंटीमीटर के बीच रखना चाहिए। इसके बाद, रोपाई के 15 से 20 दिन बीत जाने पर खेत में पानी की गहराई बढ़ाकर 5 से 7 सेंटीमीटर तक की जा सकती है।

खेत में जरूरत से ज्यादा पानी जमा होने की स्थिति में उसकी तुरंत निकासी का प्रबंध करना भी उतना ही जरूरी है। यदि खेत में लंबे समय तक अत्यधिक जलभराव बना रहता है, तो पौधों की जड़ें गल सकती हैं और अन्य गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं।

सवाल-जवाब

धान की रोपाई के समय जड़ों का उपचार किस दवा से करना चाहिए?
धान के पौधों की जड़ों को रोपाई से पहले कार्बेन्डाजिम के घोल में कुछ समय डुबोकर उपचारित करना चाहिए।
जड़ों के बेहतर विकास के लिए कौन सा फर्टिलाइजर उपयोगी है?
पौधों की जड़ों के बेहतर फैलाव और विकास के लिए एजोटोबैक्टर फर्टिलाइजर के इस्तेमाल की सलाह दी जाती है।
रोपाई के समय खेत में पानी की गहराई कितनी होनी चाहिए?
रोपाई के समय खेत में पानी का स्तर 2 से 5 सेंटीमीटर के बीच रखना चाहिए।
रोपाई के 15 से 20 दिन बाद पानी का स्तर कितना रखना चाहिए?
रोपाई के 15 से 20 दिन बाद पानी की गहराई बढ़ाकर 5 से 7 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
तना छेदक कीट का प्रकोप दिखने पर किसानों को क्या करना चाहिए?
तना छेदक का असर दिखने पर बिना जानकारी दवा डालने के बजाय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से उचित कीटनाशक छिड़कना चाहिए।
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