ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सीमा पर स्थित बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल दीघा में समुद्र का मिजाज अचानक बहुत अशांत हो गया है। पूर्णिमा और गहरे अवदाब के मिले-जुले प्रभाव के चलते समुद्र में लगभग 15 फीट ऊंची लहरें उठ रही हैं। यह भयानक ज्वार इतना शक्तिशाली है कि पानी समुद्र की सुरक्षा दीवार को पार करके सीधे मुख्य सड़क तक पहुंच गया है। इस विहंगम और डरावने दृश्य को देखने के लिए जहां एक तरफ पर्यटकों का हुजूम उमड़ रहा है और वे अपने मोबाइल में तस्वीरें कैद कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए व्यापक अलर्ट जारी कर दिया है। लहरों की इस अभूतपूर्व ऊंचाई को देखकर स्थानीय निवासियों और तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाले अधिकारियों के बीच चिंता साफ देखी जा सकती है। पानी के सड़क पर फैलने से यातायात भी प्रभावित हुआ है।
मौसम प्रणाली का दोहरा प्रभाव और प्रशासनिक चेतावनी
समुद्र में अचानक आई इस अशांति के पीछे मौसम वैज्ञानिकों ने दो मुख्य कारण बताए हैं। पहला कारण बंगाल की खाड़ी में सक्रिय डीप डिप्रेशन यानी गहरा अवदाब है और दूसरा कारण पूर्णिमा का खगोलीय प्रभाव है, जिसके कारण गुरुत्वाकर्षण बल तीव्र हो जाता है। इन दोनों के संयुक्त असर से समुद्र का जलस्तर सामान्य सीमा से काफी ऊपर चला गया है। दीघा एक बेहद लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जहां ओडिशा, पश्चिम बंगाल और अन्य पड़ोसी राज्यों से हमेशा बड़ी संख्या में लोग छुट्टियां मनाने आते हैं। वर्तमान स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग ने सभी पर्यटकों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पर्यटकों को समुद्र तट के पास जाने और पानी में उतरने से पूरी तरह से बचने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, गहरे समुद्र में काम करने वाले मछुआरों को भी अगले आदेश तक अपनी नावें तट पर ही रखने और समुद्र में न जाने की कड़ी हिदायत दी गई है। स्थानीय पुलिस और तटीय सुरक्षा बल लगातार गश्त कर रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति खतरे वाले क्षेत्र में प्रवेश न कर सके और किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
तटीय व्यापारियों में हड़कंप और सुरक्षा की तैयारियां
समुद्री पानी मुख्य सड़क तक पहुंचने के कारण दीघा के तटीय इलाकों में स्थित दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मालिकों में डर का माहौल है। कई दुकानदारों को डर है कि अगर ज्वार का पानी और ऊपर उठा तो उनकी दुकानों में रखा कीमती सामान पूरी तरह नष्ट हो सकता है। पर्यटन सीजन होने के कारण इन दुकानों में भारी मात्रा में स्टॉक जमा था। इसे देखते हुए स्थानीय कारोबारियों ने अपने माल को सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर स्थानांतरित करना शुरू कर दिया है। प्रशासन ने भी दुकानदारों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में तटीय क्षेत्र तुरंत खाली करने के लिए तैयार रहने को कहा है। समुद्र की सुरक्षा दीवार के पास तैनात आपदा प्रबंधन की टीमें और स्थानीय पुलिस बल स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहे हैं ताकि जलस्तर बढ़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें।
ओडिशा में भारी बारिश और विस्थापन का संकट
यह समुद्री अशांति ओडिशा में जारी व्यापक प्राकृतिक आपदा का ही एक हिस्सा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में पिछले कई दिनों से मूसलाधार बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगातार हो रही वर्षा के कारण राज्य की प्रमुख नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के पास पहुंच गया है, जिससे कई ग्रामीण और शहरी इलाकों में बाढ़ जैसी गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। कई जिलों में भूस्खलन होने और बड़े-बड़े पेड़ों के उखड़ने के कारण मुख्य मार्ग बंद हो गए हैं, जिससे परिवहन सेवा बुरी तरह चरमरा गई है। जलभराव और मिट्टी के घरों को पहुंचे भारी नुकसान को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों के स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने का निर्णय लिया है। एक मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, राज्य के दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों के संवेदनशील और निचले इलाकों से लगभग 14,500 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है। इन विस्थापित लोगों को ठहरने के लिए प्रशासन द्वारा 2,061 राहत केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां उन्हें पका हुआ भोजन, स्वच्छ पेयजल और आवश्यक दवाइयां प्रदान की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त, प्रभावित क्षेत्रों की गर्भवती महिलाओं को समय पर सुरक्षित प्रसव और चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने के लिए पहले ही नजदीकी अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया गया है।






















