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छतरपुर में निजी डॉक्टर की दवा से 17 साल की छात्रा की मौत, परिजनों का हंगामा और सड़क जाममध्य प्रदेश
18 अक्तू॰ 2026, 1:36 am (11 दिन पहले)· 1

छतरपुर में निजी डॉक्टर की दवा से 17 साल की छात्रा की मौत, परिजनों का हंगामा और सड़क जाम

मध्य प्रदेश के छतरपुर में 17 वर्षीय छात्रा शिवानी यादव की निजी डॉक्टर की दवा खाने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। आक्रोशित परिजनों ने जिला अस्पताल के बाहर शव रखकर प्रदर्शन किया और पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में एक 17 वर्षीय छात्रा की असामयिक मृत्यु के बाद तीखा आक्रोश फैल गया है। बड़ा मलहरा की रहने वाली शिवानी यादव पढ़ाई के सिलसिले में छतरपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के शांति नगर कॉलोनी में किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही थी। शनिवार की सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जिसके बाद परिवारवालों ने एक निजी डॉक्टर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इस घटना ने एक बार फिर स्थानीय स्तर पर चिकित्सा व्यवस्था और डॉक्टरों की कार्यशैली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

परिजनों और डॉक्टर की भूमिका पर गंभीर आरोप

शिवानी के पिता वीरेंद्र यादव के अनुसार शुक्रवार को तबीयत बिगड़ने पर उनकी बेटी को स्थानीय निजी डॉक्टर आभा खरे के पास ले जाया गया था। शुरुआती जांच के बाद डॉक्टर ने उसे एक गोली दी थी। परिजनों का यह आरोप है कि वह दवा खाने के बाद ही शिवानी की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। उसे लगातार उल्टियां होने लगीं और रात के समय सिर में तेज दर्द की शिकायत भी सामने आई। हालत गंभीर होने पर उसे पहले जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उसे झांसी के मेडिकल सेंटर के लिए रेफर कर दिया।

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इलाज के लिए ले जाते समय रास्ते में थोड़ा दम

झांसी में प्राथमिक उपचार मिलने के बाद भी शिवानी की सेहत में सुधार नहीं हुआ, जिसके चलते उसे ग्वालियर के बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया था। शनिवार की सुबह करीब 9:00 बजे झांसी से ग्वालियर ले जाते वक्त रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। इसके बाद दुखी परिवार उसके शव को वापस छतरपुर ले आया। पिता वीरेंद्र यादव ने दावा किया कि दवा लेने से पहले उनकी बेटी बिल्कुल स्वस्थ थी। परिवार ने सबूत के तौर पर उस संदिग्ध गोली को भी अपने पास सुरक्षित रखा है और मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है।

जिला अस्पताल के बाहर मुख्य सड़क पर प्रदर्शन

शव के छतरपुर पहुंचते ही मृतका के परिजन और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग गुस्से में सड़क पर उतर आए। उन्होंने जिला अस्पताल के बाहर मुख्य मार्ग पर शव को रखकर यातायात पूरी तरह से बाधित कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि समय रहते उचित चिकित्सा मिल जाती तो छात्रा की जान बचाई जा सकती थी। इस बीच, स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सिविल लाइंस पुलिस थाने की टीम और नगर पुलिस अधीक्षक अरुण सोनी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित परिवार को शांत कराया और निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाकर जाम खुलवाया।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आगे की कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि परिवार की औपचारिक शिकायत दर्ज कर ली गई है और मौत के असल कारणों की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जांच दल सुरक्षित रखी गई दवाइयों, मेडिकल रिकॉर्ड्स और अन्य साक्ष्यों का बारीकी से अध्ययन कर रहा है। यदि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट में डॉक्टर की ओर से किसी भी तरह की लापरवाही पाई जाती है, तो कानूनी नियमों के तहत उचित कदम उठाए जाएंगे। प्रशासन ने जनता से संयम बरतने और जांच पूरी होने का इंतजार करने की अपील की है।

सवाल-जवाब

शिवानी यादव की उम्र कितनी थी और वह कहां की रहने वाली थीं?
शिवानी यादव 17 वर्ष की थीं और वह मध्य प्रदेश के बड़ा मलहरा की रहने वाली थीं।
घटना के समय शिवानी कहां रह रही थीं?
वह अपनी पढ़ाई के सिलसिले में छतरपुर के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के शांति नगर कॉलोनी में एक किराए के मकान में रह रही थीं।
परिजनों ने किस डॉक्टर पर आरोप लगाया है?
परिजनों ने एक निजी डॉक्टर आभा खरे पर इलाज में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
शिवानी की मौत कहां और कब हुई?
झांसी से ग्वालियर ले जाते समय शनिवार सुबह करीब 9:00 बजे रास्ते में उनकी मौत हो गई।
गुस्साए लोगों ने प्रदर्शन कहां किया?
नाराज परिजनों और स्थानीय लोगों ने जिला अस्पताल के बाहर मुख्य सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन और ट्रैफिक जाम किया।
मामले में पुलिस की क्या कार्रवाई चल रही है?
पुलिस ने परिवार की शिकायत पर औपचारिक मामला दर्ज कर लिया है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा सुरक्षित रखी गई दवाओं के आधार पर जांच कर रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·11 दिन पहले

एक छोटी सी गोली खाने के बाद ऐसा क्या हो गया कि बच्ची को झांसी से ग्वालियर रेफर करना पड़ा? डॉक्टर आभा खरे की वो दवा वाकई संदिग्ध लग रही है, परिवार ने सही किया जो उसे संभाल कर रखा है।

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·11 दिन पहले

रविकेश जी, आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। पर मुझे यह समझ नहीं आया कि जब तबीयत इतनी बिगड़ रही थी, तब डॉक्टर ने तुरंत बड़े अस्पताल भेजने के बजाय सिर्फ एक गोली देकर क्यों टाल दिया?

Arjun Mehta@arjun-mehta·11 दिन पहले

एक छोटी सी गोली किसी की जान ले ले, ये सोचकर ही डर लगता है। डॉक्टर पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 दिन पहले

सिर्फ एक गोली खाने के बाद ऐसी हालत हो जाना वाकई डरावना है।

Rohan Verma@rohan-verma·11 दिन पहले

करण भाई, आपकी बात बिल्कुल सही है। पर क्या उस डॉक्टर के पास कोई डिग्री थी या वो झोलाछाप थी?

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