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छत्तीसगढ़ के कोरबा में मोबाइल की रील अटकते ही भड़की महिला ने पी लिया कीटनाशक, इलाज के दौरान मौतछत्तीसगढ़
8 सित॰ 2026, 6:47 pm (17 दिन पहले)· 2

छत्तीसगढ़ के कोरबा में मोबाइल की रील अटकते ही भड़की महिला ने पी लिया कीटनाशक, इलाज के दौरान मौत

कोरबा में मोबाइल पर रील देखते समय इंटरनेट बंद होने से गुस्साई एक महिला ने कीटनाशक पी लिया, जिससे इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मृतका तीन बच्चों की मां थीं और पहले से एक बीमारी से भी परेशान थीं।

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां मोबाइल पर रील देखते समय अचानक इंटरनेट का नेटवर्क गायब हो जाने भर से नाराज हुई एक महिला ने कीटनाशक पी लिया, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई। यह पूरा मामला करतला थाना क्षेत्र के केराकछार गांव का है।

कौन थीं मृतका?

मृतका की पहचान 52 वर्षीय मंगलो बाई के तौर पर हुई है। वे केराकछार गांव में अपने पति प्रेमलाल सारथी और तीन बच्चों के साथ रहती थीं। प्रेमलाल मजदूरी करके परिवार का खर्च चलाते हैं, और घर की पूरी आमदनी उन्हीं की मेहनत पर टिकी है। परिजनों के मुताबिक, मंगलो बाई को मोबाइल पर रील और टीवी सीरियल देखने की गहरी आदत लग चुकी थी और वे अक्सर खाना खाते समय भी घंटों स्क्रीन में डूबी रहती थीं।

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रील अटकते ही आया गुस्सा, फोन पटका, कमरे में हुईं बंद

घटना वाले दिन दोपहर करीब 12 बजे मंगलो बाई हमेशा की तरह खाना खाते-खाते अपने मोबाइल पर रील देख रही थीं। इसी बीच अचानक फोन का इंटरनेट नेटवर्क गायब हो गया। वे काफी देर तक इंतजार करती रहीं कि नेटवर्क अपने आप लौट आएगा, लेकिन रील दोबारा चलनी शुरू नहीं हुई। बार-बार कोशिश के बावजूद जब स्क्रीन पर कुछ नहीं बदला, तो वे बुरी तरह आपे से बाहर हो गईं। गुस्से में उन्होंने मोबाइल फोन को पूरी ताकत से जमीन पर दे मारा, जिससे फोन पूरी तरह टूट गया। इसके तुरंत बाद वे घर के एक कमरे में चली गईं और अंदर से किवाड़ बंद कर लिया।

उल्टियों से हुआ शक, कमरे में मिला खाली डिब्बा

करीब 10 मिनट कमरे में बंद रहने के बाद मंगलो बाई बाहर निकलीं और घर के बरामदे में आकर बैठ गईं। कुछ ही देर बाद उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं और यह सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। शुरुआत में परिवार वालों को लगा कि उनकी तबीयत सामान्य तौर पर बिगड़ी है, लेकिन जब उल्टी से जहरीले पदार्थ जैसी तेज बदबू आने लगी, तो सबको शक हुआ। परिजनों ने बिना देर किए उनके कमरे की तलाशी ली, तो वहां कीटनाशक का एक खाली डिब्बा पड़ा मिला। इस एक सुराग से साफ हो गया कि दरवाजा बंद करके मंगलो बाई ने जहर पी लिया था।

अस्पताल पहुंचाया, लेकिन नहीं बच सकीं

असलियत समझते ही परिजनों ने एक पल भी नहीं गंवाया। उन्होंने डायल-112 पर कॉल किया और मंगलो बाई को तुरंत करतला स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार दिया, लेकिन उनकी हालत लगातार गंभीर बनी रही और सुधार के कोई संकेत नहीं मिले। हालत नाजुक देखकर डॉक्टरों ने उन्हें आगे के इलाज के लिए कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। वहीं इलाज चलने के दौरान मंगलो बाई ने आखिरकार दम तोड़ दिया।

पुरानी बीमारी से भी काफी परेशान थीं मंगलो बाई

परिजनों ने यह भी बताया कि इस एक घटना के अलावा मंगलो बाई काफी समय से हाथ-पैर में सूजन की एक बीमारी से भी जूझ रही थीं। इलाज करवाने के बावजूद उन्हें इस तकलीफ से कोई राहत नहीं मिल पा रही थी। परिजनों का कहना है कि इस लंबी और बिना राहत वाली बीमारी ने इस घटना से पहले ही उन्हें मानसिक तौर पर काफी आहत और परेशान कर रखा था।

मनोवैज्ञानिक बोले, मोबाइल की लत बढ़ाती है गुस्सा और चिड़चिड़ापन

इस मामले पर मनोवैज्ञानिक डॉ. अंकित गुप्ता का कहना है कि मोबाइल का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल करने से लोगों में गुस्सा और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ने लगती हैं। उन्होंने कहा, "ऐसी हालत में कई बार इंसान गुस्से के आवेश में आकर खुद को बड़ा नुकसान पहुंचा बैठता है।"

इन सभी बातों को जोड़कर देखें, तो साफ नजर आता है कि मंगलो बाई पहले से ही एक लंबी बीमारी की वजह से मानसिक रूप से टूटी हुई थीं, और मोबाइल पर एक रील का न चलना, जो देखने में एक बेहद मामूली बात लग सकती है, उनके लिए इतना बड़ा और दर्दनाक कदम उठाने की आखिरी वजह बन गया, जिसने उनके पति और तीन बच्चों को हमेशा के लिए उनसे दूर कर दिया।

सवाल-जवाब

यह घटना कहां हुई?
यह घटना छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र के केराकछार गांव में हुई।
मृतका महिला कौन थीं?
मृतका की पहचान 52 वर्षीय मंगलो बाई के रूप में हुई है, जो पति प्रेमलाल सारथी और तीन बच्चों के साथ रहती थीं।
महिला ने कीटनाशक क्यों पिया?
मोबाइल पर रील देखते समय अचानक इंटरनेट बंद हो जाने और नेटवर्क वापस न आने से गुस्से में आकर उन्होंने कीटनाशक पी लिया।
घटना के बाद क्या हुआ?
उन्हें लगातार उल्टियां होने लगीं, परिजनों ने डायल-112 की मदद से करतला स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां से हालत बिगड़ने पर कोरबा मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
क्या मंगलो बाई को कोई और बीमारी भी थी?
हां, परिजनों के मुताबिक वे काफी समय से हाथ-पैर में सूजन की बीमारी से भी परेशान थीं और इलाज के बावजूद उन्हें राहत नहीं मिल रही थी।
विशेषज्ञ इस मामले पर क्या कहते हैं?
मनोवैज्ञानिक डॉ. अंकित गुप्ता के मुताबिक मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से गुस्सा और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है, जिसके चलते व्यक्ति कई बार खुद को नुकसान पहुंचा बैठता है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

यह घटना डिजिटल लत और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी का एक गंभीर और दुखद उदाहरण है। स्क्रीन पर मामूली सी बाधा पर इतना चरम कदम उठाना यह रेखांकित करता है कि आज के दौर में मनोवैज्ञानिक परामर्श और तनाव प्रबंधन कितना आवश्यक हो गया है। इस तरह के मामलों में परिवार की संवेदनशीलता और समय पर काउंसलिंग ही ऐसे घातक कदमों को रोक सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह घटना डिजिटल एडिक्शन के उन छिपे हुए खतरों को बेनकाब करती है, जिन पर ग्रामीण भारत में शायद ही कभी गंभीर चर्चा होती है। जब मनोरंजन का एकमात्र साधन मोबाइल बन जाता है और उस पर जरा सी रुकावट भी किसी व्यक्ति को जानलेवा कदम उठाने पर मजबूर कर दे, तो यह स्पष्ट है कि हमारी सामाजिक संरचना में मानसिक स्वास्थ्य की सहायता प्रणाली बुरी तरह चरमरा चुकी है। नीति निर्माताओं और समाज दोनों को यह समझना होगा कि कनेक्टिविटी के इस दौर में गांवों तक डिजिटल अवेयरनेस और काउंसलिंग पहुंचना अब कोई विलासिता नहीं, बल्कि एक आपातकालीन जरूरत बन चुका है।

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