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चिंतपूर्णी मेले में ड्यूटी के दौरान दो बसों के बीच दबने से सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार का निधन, पैतृक गांव में हुआ राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कारहिमाचल प्रदेश
19 अक्तू॰ 2026, 8:39 pm (18 दिन पहले)· 2

चिंतपूर्णी मेले में ड्यूटी के दौरान दो बसों के बीच दबने से सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार का निधन, पैतृक गांव में हुआ राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

ऊना के भरवाईं में नवरात्रि मेले के दौरान ट्रैफिक संभाल रहे सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार दो बसों के बीच फंसकर गंभीर रूप से घायल हो गए और उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। पैतृक गांव अमलेला में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गई।

हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में स्थित माता चिंतपूर्णी मंदिर में आयोजित नवरात्रि मेले के दौरान एक दुखद सड़क दुर्घटना में कर्तव्य पर तैनात ऊना पुलिस के सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की जान चली गई। भरवाईं क्षेत्र में लगे भारी ट्रैफिक जाम को खुलवाने के प्रयास में वे दो बड़ी यात्री बसों के बीच आ गए, जिससे वे गंभीर रूप से चोटिल हो गए थे। अस्पताल ले जाए जाने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की भरसक कोशिश की, लेकिन उपचार के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। रविवार को उनके पैतृक गांव अमलेला में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।

तंग रास्ते पर ट्रैफिक सुचारू कराते वक्त हुआ दर्दनाक हादसा

यह दुखद घटना 17 अक्तूबर की रात की है, जब भरवाईं के एक बेहद संकरे सड़क मार्ग पर वाहनों का भारी दबाव बन गया था। माता चिंतपूर्णी के दर्शन करने आए श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण लगे जाम को हटाने के लिए सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार स्वयं सड़क के बीच खड़े होकर वाहनों को नियंत्रित कर रहे थे। वे एक तरफ से आ रही हरियाणा रोडवेज की बस और दूसरी यात्री बस को सावधानीपूर्वक आगे बढ़ने का इशारा कर रहे थे। इसी दौरान दोनों वाहनों की आवाजाही के बीच अचानक वे दोनों बसों के मध्य में बुरी तरह दब गए। दुर्घटना होते ही एक बस का चालक अपना वाहन छोड़कर मौके से भाग निकला। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए हरियाणा रोडवेज और दूसरी निजी यात्री बस, दोनों के चालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है।

उपचार के दौरान तोड़ा दम

हादसे के फौरन बाद घायल अधिकारी को तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिंतपूर्णी पहुंचाया गया। उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा रेफर करने का निर्णय लिया। हालांकि, रास्ते में उनकी शारीरिक हालत लगातार बिगड़ती चली गई, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में उन्हें दोबारा चिंतपूर्णी अस्पताल वापस लाना पड़ा। वहां उपस्थित चिकित्सकों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

तिरंगे में लिपटी देह देख परिजनों में मचा कोहराम

कांगड़ा जिले के नगरोटा सूरियां स्थित अमलेला गांव में रविवार के दिन जब सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की पार्थिव देह तिरंगे में लिपटी हुई पहुंची, तो पूरा माहौल गमगीन हो गया। घर पर मौजूद पत्नी मधु बाला, वृद्ध माता-पिता और परिजनों का विलाप देखकर उपस्थित सभी लोगों की आंखें भर आईं। राजेश कुमार अपने बुजुर्ग माता-पिता, पिता रत्न चंद और माता कांता देवी के बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थे, जो बेटे के वियोग में पूरी तरह बदहवास हो गए। दिल्ली में रहकर पढ़ाई कर रही उनकी बेटी तन्वी जब पिता के अंतिम दर्शन के लिए पहुंची, तो तिरंगे में लिपटे पिता को देखकर वह बेसुध हो गई। स्थानीय लोग और रिश्तेदार शोक संतप्त पत्नी मधु बाला को ढांडस बंधाने का प्रयास करते रहे।

पुलिस टुकड़ी ने दी अंतिम सलामी, बेटे ने दी मुखाग्नि

अमलेला गांव के स्थानीय श्मशानघाट में रविवार को उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। उनके बेटे गोलू ने नम आंखों और भारी मन से पिता की चिता को मुखाग्नि दी। पुलिस जिला नूरपुर की एक सशस्त्र टुकड़ी ने हवा में गोलियां दागकर और शोक धुन बजाकर अपने जांबाज साथी को अंतिम विदाई दी। इस दुखद घड़ी में अमलेला सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी तादाद में ग्रामीण, प्रशासनिक अधिकारी और पुलिसकर्मी दिवंगत सब-इंस्पेक्टर को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे थे।

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सवाल-जवाब

सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार की मृत्यु किस स्थान पर और कैसे हुई?
उनकी मृत्यु हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में भरवाईं के पास माता चिंतपूर्णी मेले में ट्रैफिक खुलवाते समय दो बसों के बीच दबने के कारण हुई।
हादसा किस तारीख को हुआ था?
यह दुर्घटना 17 अक्तूबर की रात को उस समय हुई जब वे संकरी सड़क पर यातायात सुचारू करवा रहे थे।
हादसे के बाद पुलिस ने क्या कानूनी कार्रवाई की है?
पुलिस ने हरियाणा रोडवेज बस और दूसरी निजी यात्री बस के चालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
सब-इंस्पेक्टर राजेश कुमार कहां के निवासी थे?
वे हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में नगरोटा सूरियां के अमलेला गांव के रहने वाले थे।
उनका अंतिम संस्कार कहां और किस प्रकार किया गया?
उनका अंतिम संस्कार रविवार को उनके पैतृक गांव अमलेला में पूरे राजकीय सम्मान और पुलिस सलामी के साथ संपन्न हुआ।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·17 दिन पहले

डिफ़्यूज़्ड स्ट्रीट पर ऐसे ही भीड़ संभालते वक्त मैंने एक बार खुद को एक पुलिस वाले के बिल्कुल करीब पाया था, जान जोखिम में डालकर काम करना इन लोगों की रोज़ की मजबूरी है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·17 दिन पहले

मेले की भीड़ में ड्यूटी देना कितना जोखिम भरा होता है, इसका अंदाजा पिछले साल चिंतपूर्णी में खुद फंसने पर हुआ था। परिवार के लिए यह सदमा कभी न भरने वाला घाव है।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

अर्जुन जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। क्या मेले में ड्यूटी दे रहे सुरक्षाकर्मियों के लिए ट्रैफिक को संभालने के कोई वैकल्पिक और सुरक्षित इंतजाम नहीं किए जा सकते थे?

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

ड्यूटी के दौरान ऐसा हादसा वाकई झकझोर देने वाला है। एक तरफ ट्रैफिक संभाल रहे थे और दूसरी तरफ जान चली गई। क्या तंग रास्तों पर मेले के वक्त भारी वाहनों की एंट्री पर रोक लगाने का कोई नियम नहीं था?

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

करण भाई, आपकी बात सही है लेकिन बस ड्राइवर एकदम से भाग गया तो लापरवाही तो साफ दिखती है। नियमों का क्या कहें जब भीड़ में ऐसा हो जाए।

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