हिमाचल प्रदेश की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शुमार रहे कांग्रेस नेता नंद लाल को उनके पैतृक गांव देवठी में पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। शिमला जिले के रामपुर से लगातार चार चुनाव जीतने वाले इस कद्दावर नेता की अंतिम यात्रा में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। उनके बेटे ने रीति-रिवाजों के अनुसार चिता को मुखाग्नि सौंपी, जबकि कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी ने पार्थिव देह को कंधा दिया। सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे नंद लाल के जाने से पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ है।
शीर्ष नेतृत्व ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम संस्कार के मौके पर प्रदेश सरकार और संगठन के शीर्ष नेता मौजूद रहे। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार ने देवठी पहुंचकर दिवंगत नेता को नमन किया। उनके साथ राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य विक्रमादित्य सिंह, रोहित ठाकुर और जगत सिंह नेगी भी उपस्थित थे। सभी नेताओं ने उनके निधन को संगठन तथा रामपुर इलाके के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया।
शालीन व्यक्तित्व और तर्कपूर्ण शैली की मिसाल
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने नंद लाल के सरल व्यक्तित्व को याद किया। सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा, "वह बेहद सहज स्वभाव और अच्छे व्यक्तित्व के धनी थे।" मुख्यमंत्री ने बताया कि नंद लाल हमेशा शालीनता, तथ्य और मजबूत तर्कों के सहारे अपनी बात सामने रखते थे। उन्होंने रामपुर क्षेत्र की प्रगति में उनके निरंतर प्रयासों की सराहना की। सुक्खू के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के समय से ही नंद लाल अपने हलके के विकास कार्यों को लेकर लगातार सक्रिय रहते थे और सरकार के सामने जनता के मुद्दे मजबूती से उठाते थे।
चमियाना अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम
दिवंगत नेता के अंतिम दिनों का विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वह सोमवार को स्वयं चमियाना अस्पताल जाकर चिकित्सकों से मिले थे। वहां डॉक्टरों ने जानकारी दी थी कि नंद लाल का रक्तचाप अत्यधिक गिरकर 30 से 40 तक पहुंच गया था। स्थिति को संभालने के लिए मेडिकल टीम ने पेसमेकर भी लगाया, जिसके बाद रक्तचाप सुधरकर 80 से 90 के दायरे में आया था। हालांकि तमाम कोशिशों के बावजूद सेहत में स्थायी सुधार नहीं आ सका और मंगलवार सुबह करीब 5:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
आईटीबीपी से राजनीति तक का सफर
राजनीति में कदम रखने से पूर्व नंद लाल ने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी में अपनी सेवाएं दी थीं। वहां से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के उपरांत उन्होंने चुनावी मैदान में उतरने का फैसला किया था। वर्ष 2007 में उन्होंने पहली बार जीत का स्वाद चखा और उसके बाद से लगातार चार बार रामपुर का प्रतिनिधित्व विधानसभा में किया। जमीनी स्तर पर बेहद मजबूत पकड़ रखने वाले नंद लाल अपने पूरे राजनीतिक जीवन में स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए तत्पर रहे। उनके जाने से रामपुर ने एक बेहद अनुभवी जनप्रतिनिधि खो दिया है।



















