बराबरी और साझेदारी का नया दौर, करवा चौथ पर पतियों के उपवास रखने की अनूठी परंपराडिजिटल अरेस्ट और साइबर ठगी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, बैंक की लापरवाही पर पीड़ितों को मुआवजा दिलाने की तैयारीपहाड़ी धाम की थाली का गौरव: बिना प्याज़-टमाटर ऐसे तैयार करें क्रीमी और सुगंधित हिमाचली चना मदराबिहार के ऐतिहासिक प्रतीकों को कबाड़ से जीवंत बना रहे भोजपुर के इंजीनियर प्रशांतअमेरिकी चुनाव 2028: चुनावी नतीजों को नकारने वाले कई रिपब्लिकन नेता अटॉर्नी जनरल की दौड़ में शामिलचांदी की कीमतों में जोरदार गिरावट, छह दिनों में 40,000 रुपये तक लुढ़के दामआईआईटी मद्रास ने जारी किया गेट 2027 का पूरा शेड्यूल, रोबोटिक्स समेत नए बदलावों के साथ इस दिन से शुरू होंगे आवेदनआर्मेनिया की संसद में चुनावी वादे पर भिड़े नेता, लाइव प्रसारण के दौरान चले लात-घूंसे और फटे कपड़ेफीफा अंडर-15 विश्व कप में अफगानिस्तान से हारा भारत, अब कजाकिस्तान से टक्करऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी में बैंक की चूक पर ग्राहकों को पूरा हर्जाना मिले: शीर्ष अदालत
चुनाव आयोग के खिलाफ दो बड़े शहरों में फूटा गुस्सा, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तेजभारत
2 अक्तू॰ 2026, 6:25 pm (27 दिन पहले)· 0

चुनाव आयोग के खिलाफ दो बड़े शहरों में फूटा गुस्सा, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग तेज

मतदाता सूची और एसआईआर विवाद को लेकर दिल्ली और मुंबई की सड़कों पर उग्र विरोध देखने को मिला, जहां पुलिस ने सुरक्षा कड़ी कर कई प्रमुख नेताओं को हिरासत में ले लिया।

गांधी जयंती के पावन अवसर पर देश के दो प्रमुख महानगरों में चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता को लेकर तीखा टकराव सामने आया। निर्वाचन सदन के शीर्ष अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राजधानी की प्रमुख राजनीतिक ताकतों और महाराष्ट्र के प्रदर्शनकारियों ने एक साथ आवाज बुलंद की। मतदाता सूचियों में कथित हेराफेरी तथा एसआईआर की प्रक्रिया में पारदर्शिता के अभाव का मुद्दा उठाते हुए सड़कों पर उतरे लोगों ने चुनाव निकाय के नेतृत्व पर सीधा निशाना साधा। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए दोनों महानगरों में व्यापक पुलिस बल तैनात किया गया, जहां दर्जनों प्रमुख चेहरों के साथ भारी संख्या में कार्यकर्ताओं को रोककर हिरासत में भेज दिया गया।

जंतर-मंतर पर टकराव और बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां

राजधानी के ऐतिहासिक धरना स्थल पर सुबह से ही तनाव की स्थिति बनी रही, जहां बैरिकेड्स लगाकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया। इस दौरान सुरक्षाबलों और प्रदर्शन में शामिल नेताओं के मध्य तीखी बहस और धक्का-मुक्की की नौबत आ गई। संसद के उच्च सदन के सदस्य संजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, संगठन के प्रांतीय प्रमुख सौरभ भारद्वाज के साथ अनुराग ढांडा और संजीव झा जैसे चर्चित चेहरों को पुलिस वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना था कि स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान नागरिकों का बुनियादी अधिकार है, जिससे किसी भी सूरत में समझौता नहीं किया जा सकता। हिरासत में भेजे जाने के बाद भी पार्टी नेताओं ने अपने रुख पर अड़े रहने और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करने का संकल्प दोहराया।

ये भी पढ़ें

शिवाजी पार्क में उमड़ा जनसैलाब और जेल भरो आह्वान

उधर देश की आर्थिक राजधानी में शिवाजी पार्क का मैदान भी चुनावी सुधारों की मांग का गवाह बना। प्रशासन की तरफ से औपचारिक मंजूरी न दिए जाने के बावजूद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर लोग भारी तादाद में एकत्र हुए और पूर्व निर्धारित सत्याग्रह के तहत खुद गिरफ्तारियां देने की घोषणा की। इस जुटान की सबसे उल्लेखनीय तस्वीर यह थी कि इसमें केवल दलीय कार्यकर्ता ही मौजूद नहीं थे, बल्कि सामान्य गृहस्थ, महिलाएं और बच्चे भी हाथों में राष्ट्रध्वज थामे दिखाई दिए। पुणे समेत राज्य के विभिन्न जनपदों से यात्रा करके आए आम नागरिकों ने कहा कि यह मुकाबला सत्ता की राजनीति का नहीं बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को बचाने की लड़ाई है।

संवैधानिक संस्थाओं की साख और जनता का भरोसा

दोनों महानगरों में उभरे इस जनाक्रोश ने एक बुनियादी विमर्श को जन्म दे दिया है कि सार्वजनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता सवालों के घेरे में क्यों आ रही है। आंदोलन में भाग ले रहे पक्षों का दृढ़ मत है कि मतदाता पहचान और सूचियों से संबंधित प्रत्येक प्रक्रिया जनता के सामने पूरी तरह स्पष्ट होनी चाहिए। यदि नागरिकों के मन में अपनी वोटिंग व्यवस्था को लेकर संदेह पैदा होता है, तो केवल सुरक्षा घेरे और प्रशासनिक सख्ती से उसे दूर नहीं किया जा सकता। किसी भी लोकतांत्रिक राष्ट्र में संवैधानिक पदों की असली ताकत जनता के अटूट विश्वास से तय होती है, और उस विश्वास को बनाए रखने के लिए खुली जवाबदेही आवश्यक है।

सवाल-जवाब

दिल्ली और मुंबई में यह प्रदर्शन किस दिन आयोजित किए गए?
यह विरोध प्रदर्शन गांधी जयंती के अवसर पर आयोजित किए गए।
दिल्ली में किन प्रमुख नेताओं को हिरासत में लिया गया?
राज्यसभा सांसद संजय सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, सौरभ भारद्वाज, अनुराग ढांडा और संजीव झा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया।
दिल्ली में कितने प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया?
जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान एक हजार से ज्यादा कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
मुंबई में किस दल ने आंदोलन का नेतृत्व किया?
मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और आम नागरिकों ने मिलकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग क्या थी?
प्रदर्शनकारी मतदाता सूचियों व एसआईआर में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे और उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई।
मुंबई के प्रदर्शन में कहां-कहां से लोग शामिल होने पहुंचे थे?
शिवाजी पार्क के प्रदर्शन में मुंबई के अलावा पुणे और आसपास के अन्य इलाकों से भी नागरिक पहुंचे थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·27 दिन पहले

चुनाव आयोग पर सवाल तो ठीक हैं, पर इस्तीफे की मांग से समस्या कैसे हल होगी यह समझ नहीं आया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·27 दिन पहले

गांधी जयंती के दिन दिल्ली और मुंबई दोनों जगहों पर प्रशासन ने इतनी सख्ती क्यों दिखाई, जबकि लोग शांति से अपनी बात रख रहे थे?

Riya Menon@riya-menon·27 दिन पहले

अरे अर्जुन, कल दिल्ली में जब मैं अपनी किसी पुरानी दोस्त से मिलने जंतर-मंतर के पास से गुजर रही थी, तो वहां के हालात देखकर सचमुच डर लग गया था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·27 दिन पहले

मतदाता सूचियों में गड़बड़ी के आरोप गंभीर हैं और अगर जांच नहीं हुई तो जनता का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·27 दिन पहले

करण भाई, बात बिल्कुल सही है। अगर चुनाव आयोग पर से ही भरोसा उठ गया, तो लोकतंत्र कहां बचेगा?

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp