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दौसा में उपसभापति मतदान से ठीक पहले प्रवेश द्वार पर टकराव, विधायक डीसी बेरवा और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी बहसराजस्थान
22 सित॰ 2026, 5:40 pm (3 दिन पहले)· 1

दौसा में उपसभापति मतदान से ठीक पहले प्रवेश द्वार पर टकराव, विधायक डीसी बेरवा और पुलिस अधिकारी के बीच तीखी बहस

दौसा नगर परिषद में उपसभापति चुनाव की वोटिंग से पूर्व प्रवेश को लेकर विधायक डीसी बेरवा और एएसपी शंकरलाल मीणा में तीखी नोकझोंक हुई।

राजस्थान के दौसा नगर परिषद परिसर में उपसभापति पद के मतदान की शुरुआत से ऐन पहले जबरदस्त सियासी सरगर्मी और गहमागहमी देखने को मिली। कांग्रेस खेमे के जनप्रतिनिधियों के मतदान स्थल पर पहुंचने के दौरान मुख्य द्वार पर कांग्रेस विधायक डीसी बेरवा और एएसपी शंकरलाल मीणा के मध्य तीखी तकरार हो गई। प्रवेश को लेकर शुरू हुआ यह विवाद देखते ही देखते काफी बढ़ गया, जिससे मतदान केंद्र के बाहर कुछ देर के लिए तनाव की स्थिति बन गई।

प्रवेश द्वार पर विवाद की असल वजह

मतदान केंद्र के मुख्य द्वार पर उपजे इस विवाद की मुख्य वजह एक बाहरी व्यक्ति का प्रवेश कराने का प्रयास था। विधायक डीसी बेरवा मतदान करने जा रहे पार्षदों के साथ एक अतिरिक्त व्यक्ति को भी नगर परिषद भवन के भीतर भेजने की मांग कर रहे थे। मौके पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे एएसपी शंकरलाल मीणा ने नियमों का हवाला देते हुए अनाधिकृत व्यक्ति को भीतर जाने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया। पुलिस अधिकारी के इस रुख के बाद दोनों पक्षों के बीच जोरदार नोकझोंक शुरू हो गई। विवाद गहराने पर एएसपी ने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी तुरंत रिटर्निंग ऑफिसर को दी।

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प्रशासन का कड़ा रुख और नियमों का हवाला

गेट पर बने गतिरोध को दूर करने के लिए तहसीलदार गजानंद मीणा तुरंत मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। तहसीलदार ने प्रशासनिक स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिस पार्षद के साथ सहयोगी को भेजने का प्रयास किया जा रहा था, उन्होंने नामांकन पत्रों में स्वयं को साक्षर दर्ज कराया था। निर्वाचन नियमों के अनुसार जब कोई जनप्रतिनिधि स्वयं साक्षर घोषित है, तो मतदान कक्ष में उनके साथ किसी सहायक या अन्य व्यक्ति को जाने की वैधानिक इजाजत कतई नहीं दी जा सकती। प्रशासन के इस स्पष्ट निर्णय के बाद माहौल शांत हुआ और मतदान प्रक्रिया आगे बढ़ी।

उपसभापति की कुर्सी के लिए सीधा मुकाबला

दौसा नगर परिषद में उपसभापति पद के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ चरम पर है। इस अहम पद के लिए भारतीय जनता पार्टी ने जितेंद्र शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस की तरफ से सुनीता सैनी अपनी दावेदारी पेश कर रही हैं। इन दोनों प्रमुख दलों के बीच आमने-सामने की जंग चल ही रही थी कि एक निर्दलीय प्रत्याशी द्वारा नामांकन फॉर्म खरीदे जाने से दलीय गणित और ज्यादा उलझ गया है। निर्दलीय की इस सक्रियता ने दोनों ही दलों के रणनीतिकारों को अपनी रणनीति नए सिरे से परखने पर मजबूर कर दिया है।

सभापति चुनाव के नतीजों की पृष्ठभूमि

उपसभापति चुनाव में कांग्रेस बढ़े हुए मनोबल के साथ उतरी है, जिसका मुख्य कारण हाल ही में संपन्न हुआ सभापति का चुनाव है। सभापति पद के कड़े मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी रेखा गुर्जर ने 31 मत हासिल करके शानदार जीत दर्ज की थी। दूसरी ओर, बीजेपी उम्मीदवार कविता गुर्जर को केवल 24 वोटों से ही संतोष करना पड़ा था। सभापति की कुर्सी पर कब्जा जमाने के बाद अब कांग्रेस उपसभापति पद पर भी अपना परचम लहराने के पूरे प्रयास में है, वहीं बीजेपी इस चुनाव के जरिए अपनी पिछली हार का बदला लेने और वापसी करने की पुरजोर कोशिश कर रही है।

सवाल-जवाब

दौसा नगर परिषद के बाहर विवाद क्यों हुआ?
विधायक डीसी बेरवा पार्षदों के साथ एक अन्य व्यक्ति को अंदर भेजना चाहते थे, जिसे एएसपी ने अनुमति देने से मना कर दिया।
तहसीलदार गजानंद मीणा ने प्रवेश को लेकर क्या नियम स्पष्ट किया?
उन्होंने बताया कि संबंधित पार्षद नामांकन में साक्षर दर्ज हैं, इसलिए उनके साथ किसी दूसरे व्यक्ति को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
उपसभापति पद के लिए मुख्य उम्मीदवार कौन हैं?
बीजेपी की तरफ से जितेंद्र शर्मा और कांग्रेस की तरफ से सुनीता सैनी उपसभापति पद के लिए चुनाव मैदान में हैं।
हाल ही में हुए सभापति चुनाव का क्या परिणाम रहा था?
कांग्रेस प्रत्याशी रेखा गुर्जर ने 31 वोट पाकर जीत हासिल की थी, जबकि बीजेपी की कविता गुर्जर को 24 वोट मिले थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

साक्षर होने पर भी साथ में आदमी ले जाने की जिद करना, ये नेता लोग नियमों को क्या अपनी जेब की चीज़ समझते हैं?

Sophie Laurent@sophie-laurent·2 दिन पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही कहा आपने। नेताओं को लगता है कि नियम आम जनता के लिए हैं, उनके लिए नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए, फिर चाहे विधायक ही क्यों न हों। जबरदस्ती अंदर घुसना गलत है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

साक्षर होने पर भी साथ में आदमी ले जाने की जिद करना, नेताजी को नियम नहीं पता थे क्या?

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

करन जी, बात तो सही है आपकी। पर क्या सच में नेताजी को नियम नहीं पता थे या फिर बात सिर्फ रौब दिखाने की थी?

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