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देश सूखे की चपेट में, फिर लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में सामान्य से 96 परसेंट ज्यादा बारिश क्यों? जानिए वजहभारत
17 जून 2026, 6:29 pm (45 दिन पहले)· 2

देश सूखे की चपेट में, फिर लद्दाख के ठंडे रेगिस्तान में सामान्य से 96 परसेंट ज्यादा बारिश क्यों? जानिए वजह

जहां पूरे भारत में मानसून की बारिश 40 परसेंट तक घट गई है, वहीं लद्दाख में सामान्य से करीब दोगुना पानी बरस रहा है। वैज्ञानिक इस उलटफेर को पहाड़ों के लिए खतरे की घंटी मान रहे हैं।

इस साल मानसून की चाल भारत के ज्यादातर हिस्सों में बेहद धीमी पड़ गई है, और इसका असर साफ दिख रहा है। मैदानी इलाकों के कई राज्य बारिश की एक-एक बूंद को तरस रहे हैं, खेतों में दरारें पड़ने लगी हैं और सूखे जैसे हालात बनते जा रहे हैं। लेकिन ठीक इसी समय देश का एक कोना ऐसा है जहां मौसम ने पूरी तस्वीर पलट दी है। लद्दाख का वही ठंडा रेगिस्तान, जहां आमतौर पर बारिश के नाम पर कुछ नहीं होता, इस बार पानी से भीग रहा है।

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देशभर में मानसूनी बारिश में 40 परसेंट की भारी गिरावट दर्ज की गई है। जून के पहले दो हफ्तों में पूरे देश में मिलाकर सिर्फ 39.7 मिलीमीटर पानी बरसा। इसके उलट लद्दाख में सामान्य से 96 परसेंट ज्यादा बारिश हुई है, यानी जितनी होनी चाहिए थी उससे लगभग दोगुनी। यही विरोधाभास वैज्ञानिकों के माथे पर बल डाल रहा है।

लद्दाख में अचानक इतना पानी कहां से आया

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी वजह उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है। इसके साथ आसपास के इलाकों से खिंचकर आई नमी ने मिलकर इस ऊंचे, सूखे इलाके में बारिश को कई गुना बढ़ा दिया है। आंकड़ों में बात करें तो जून के महीने में लद्दाख में आमतौर पर सिर्फ 2.2 मिलीमीटर बारिश होती है, जबकि इस बार अब तक 4.3 मिलीमीटर पानी गिर चुका है।

संख्या भले छोटी लगे, लेकिन एक ऐसे इलाके के लिए जहां पानी गिनती में ही आता है, यह बहुत बड़ी बात है। दिलचस्प यह है कि मानसून की मुख्य हवाएं इस वक्त मध्य और पश्चिमी भारत में जहां की तहां ठहरी हुई हैं, फिर भी पहाड़ी इलाकों में स्थानीय मौसम तंत्र की वजह से लगातार बादल बरस रहे हैं।

मानसून अभी कहां तक पहुंचा है

मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल 18°N/60°E, 18°N/65°E और 18°N/70°E से होते हुए हरनई, सोलापुर, हैदराबाद, भद्राचलम, कोरापुट, फुलबनी, रांची, जमुई, मुजफ्फरपुर और 28.3°N/83°E से गुजर रही है। विभाग का कहना है कि आगे मानसून के और बढ़ने के लिए हालात अनुकूल बने हुए हैं।

वैज्ञानिक इस बदलाव से क्यों डरे हुए हैं

हिमालय के इस हिस्से में मौसम का यह नया मिजाज किसी अच्छे संकेत की ओर इशारा नहीं करता। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिन ऊंचाई वाले इलाकों में पहले सिर्फ बर्फबारी होती थी, वहां अब तेज बारिश हो रही है। यही बदलाव सबसे ज्यादा चिंता की जड़ है। तेज बारिश से पहाड़ों में फ्लैश फ्लड यानी अचानक आने वाली बाढ़ और लैंडस्लाइड का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसके अलावा ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने पर अचानक बाढ़ की घटनाएं भी सामने आ सकती हैं।

बाकी देश का क्या हाल है

दूसरी तरफ महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों में बारिश में 60 से 100 परसेंट तक की कमी दर्ज की गई है। हालांकि राहत की उम्मीद बाकी है। मौसम विभाग को भरोसा है कि 20 जून के बाद अरब सागर की ओर से आने वाली नमी देश में मानसून को दोबारा रफ्तार देगी और रुकी हुई बारिश आगे बढ़ेगी।

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सवाल-जवाब

इस साल देश में मानसून की बारिश कितनी कम हुई है?
IMD के मुताबिक देशभर में मानसूनी बारिश में 40 परसेंट की कमी आई है और जून के पहले दो हफ्तों में सिर्फ 39.7 मिलीमीटर पानी बरसा है।
लद्दाख में सामान्य से कितनी ज्यादा बारिश हुई है?
लद्दाख में सामान्य से 96 परसेंट ज्यादा बारिश दर्ज की गई है, जहां जून में आमतौर पर 2.2 मिलीमीटर होती है वहां इस बार 4.3 मिलीमीटर पानी गिर चुका है।
लद्दाख में अचानक इतनी बारिश क्यों हो रही है?
उत्तर भारत में सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और आसपास से आई नमी इसकी मुख्य वजह है, जिससे इस सूखे इलाके में बारिश बढ़ गई है।
मानसून के दोबारा मजबूत होने की उम्मीद कब है?
IMD को उम्मीद है कि 20 जून के बाद अरब सागर से आने वाली नमी देश में मानसून को फिर से रफ्तार देगी।
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