जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में हुए एक दर्दनाक आतंकवादी हमले में छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। मृतकों में मालखरौदा विकासखंड की ग्राम पंचायत बुंदेली के निवासी 21 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय बोपिंदर शामिल हैं। शुक्रवार की देर रात अज्ञात आतंकवादियों ने एक ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे मजदूरों पर बहुत करीब से अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस दुखद घटना की खबर मिलते ही मृतक के गृह गांव बुंदेली और हरदीडीह में शोक की लहर दौड़ गई है, जहां ग्रामीण और परिजन गहरे सदमे में हैं।
केल्लम गांव में हमले की वारदात और अस्पताल की स्थिति
यह हिंसक घटना कुलगाम जिले के अंतर्गत आने वाले केल्लम गांव में शुक्रवार रात को हुई। वहां एक स्थानीय ईंट-भट्ठे पर मजदूर रोजमर्रा का काम निपटा रहे थे, तभी आतंकवादियों ने आकर उन पर अचानक करीब से फायरिंग कर दी। गोलियों की चपेट में आने से 21 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय बोपिंदर गंभीर रूप से घायल होकर जमीन पर गिर पड़े। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों की मदद से दोनों घायलों को इलाज के लिए अनंतनाग शहर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों के निरंतर प्रयासों के बावजूद दीपक रात्रे ने घावों के ताव न सहते हुए दम तोड़ दिया। वहीं दूसरे मजदूर बोपिंदर की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई थी। अनंतनाग के डॉक्टरों ने बोपिंदर की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें विशेष चिकित्सा और आपातकालीन देखभाल के लिए शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि, गहन चिकित्सा के बावजूद शनिवार की सुबह बोपिंदर की भी इलाज के दौरान मौत हो गई।
रोजगार के लिए पलायन और पारिवारिक पृष्ठभूमि
परिवार का पालन-पोषण करने और बेहतर आजीविका कमाने के उद्देश्य से दीपक रात्रे लगभग एक साल पहले अपने पिता उमाशंकर रात्रे के साथ जम्मू-कश्मीर गए थे। वह कुलगाम स्थित ईंट-भट्ठे पर कड़ी मजदूरी करते थे। उनके साथ उनकी पत्नी और भाई भी उसी भट्ठे पर काम करके परिवार के भरण-पोषण में सहयोग दे रहे थे। कड़ी मेहनत से मिलने वाली मजदूरी ही उनके घर का मुख्य सहारा थी।
दीपक का अपने मामा के गांव हरदीडीह से बचपन से गहरा जुड़ाव रहा था। उन्होंने अपना बचपन हरदीडीह में ही अपने मामा के घर रहकर बिताया था और वहीं से अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी की थी। इसके अलावा उनका विवाह भी हरदीडीह गांव में ही संपन्न हुआ था। अपने माता-पिता के इकलौते बेटे होने के कारण दीपक पूरे परिवार का एकमात्र आर्थिक आधार थे। उनकी अचानक हुई मौत के बाद उनके पीछे पत्नी और एक मासूम बच्चा छूट गए हैं, जिससे परिवार के सामने जीवन-यापन का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
पुलिस प्रशासन की कार्रवाई और गांव में पसरा सन्नाटा
शुक्रवार देर रात घटना की आधिकारिक पुष्टि होते ही पुलिस प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। सक्ती जिले के पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर स्थानीय जैजैपुर थाना पुलिस की एक विशेष टीम को देर रात ही हरदीडीह गांव भेजा गया। पुलिस टीम ने परिजनों के घर पहुंचकर उन्हें इस अत्यंत दुखद घटना की आधिकारिक जानकारी दी।
जैसे ही हमले की खबर परिजनों तक पहुंची, पूरे घर में चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते बुंदेली और हरदीडीह दोनों गांवों में मातम छा गया। शनिवार को दिनभर पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए स्थानीय ग्रामीणों, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों का तांता लगा रहा। हर कोई इस अचानक आई विपदा से स्तब्ध नजर आया।
सरकारी मुआवजे और आर्थिक मदद की गुहार
इस दुखद हादसे के बाद मृतक दीपक के नाना और मामा के साथ-साथ क्षेत्र के ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ सरकार और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि पीड़ित परिवार को मानवीय आधार पर तत्काल उचित आर्थिक सहायता और मुआवजा प्रदान किया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि दीपक ही अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य था और उसी की कमाई पर पूरा घर निर्भर था। उसकी असामयिक मृत्यु के बाद उसकी पत्नी, मासूम बच्चे और बुजुर्ग आश्रितों का भविष्य अंधकारमय हो गया है। इसलिए दोनों सरकारों को संवेदनशीलता दिखाते हुए परिवार के पुनर्वास और सहायता के लिए शीघ्र कदम उठाने चाहिए।



















