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ढाका में भारत के राजदूत को कैबिनेट रैंक, इस एक कदम से बीजिंग और इस्लामाबाद तक पहुंचा कड़ा संदेशबिहार
25 जून 2026, 11:45 pm (33 दिन पहले)· 2

ढाका में भारत के राजदूत को कैबिनेट रैंक, इस एक कदम से बीजिंग और इस्लामाबाद तक पहुंचा कड़ा संदेश

ढाका में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी को कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया गया है। यह सिर्फ प्रोटोकॉल का मामला नहीं, बल्कि चीन और पाकिस्तान की बढ़ती सक्रियता के बीच बांग्लादेश को लेकर भारत की बड़ी कूटनीतिक चाल मानी जा रही है।

बांग्लादेश की राजधानी ढाका में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी को अब कैबिनेट रैंक का दर्जा दे दिया गया है। होम मिनिस्ट्री ने एक मेमोरेंडम के जरिए इस फैसले की जानकारी दी है। ऊपरी तौर पर यह महज एक प्रशासनिक बदलाव लगता है, लेकिन जिस वक्त और जिस हालात में यह कदम उठाया गया है, वह इसे एक बड़ा कूटनीतिक संदेश बना देता है। बांग्लादेश से रिश्ते हमेशा से भारत की विदेश नीति की धुरी रहे हैं, और बीते कुछ समय में दोनों देशों के बीच तनाव और उतार-चढ़ाव साफ दिखा है।

शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने कमान संभाली थी, और अब तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बन चुके हैं। ऐसे बदले हुए माहौल में भारत अपने रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाना चाहता है। दिनेश त्रिवेदी को यह ऊंचा दर्जा देकर भारत ने सीधा मैसेज दिया है कि वह ढाका मिशन को कितनी अहमियत देता है। और इसी एक फैसले में चीन और पाकिस्तान के लिए भी एक कड़ा संकेत छिपा है।

कैबिनेट रैंक का असली मतलब क्या है

दिनेश त्रिवेदी कोई आम राजनयिक नहीं हैं। वह पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं और किसी रेगुलर आईएफएस अधिकारी की तरह नहीं हैं। अप्रैल के महीने में उन्हें ढाका में भारत का नया हाई कमिश्नर बनाया गया था, और अब उन्हें यूनियन कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा मिल गया है।

यह दर्जा सिर्फ प्रोटोकॉल के लिए काम करेगा। टेबल ऑफ प्रेसिडेंस में कोई स्थायी बदलाव नहीं किया गया है। इसके बावजूद यह एक बहुत बड़ा कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि आमतौर पर किसी राजदूत को इतना ऊंचा रैंक नहीं दिया जाता। इस फैसले से त्रिवेदी को ढाका में सबसे ऊंचे स्तर पर बातचीत करने का अधिकार मिल गया है। अब राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के साथ होने वाली मीटिंग में उन्हें ज्यादा तरजीह मिलेगी। साफ है कि नई दिल्ली इस मिशन को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता में रख रही है।

तारिक रहमान का चीन दौरा और भारत की बेचैनी

बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद से वहां के हालात तेजी से बदले हैं। साल 2024 में शेख हसीना की सरकार अचानक गिर गई थी, और उसके बाद नोबेल विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम सरकार बनी थी। इसी दौरान भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में काफी खटास आ गई थी। अब वहां तारिक रहमान के नेतृत्व में नई लोकतांत्रिक सरकार काम कर रही है।

तारिक रहमान इस वक्त एक जरूरी दौरे पर चीन गए हुए हैं, और यही बात भारत के लिए गहरी चिंता का विषय है। बांग्लादेश अपने संबंध चीन और पाकिस्तान के साथ तेजी से गहरे कर रहा है। ये दोनों ही देश दक्षिण एशिया में भारत के प्रभाव को कम करने की कोशिश में लगे हैं। यही वजह है कि भारत को अपना पावर गेम मजबूत करना पड़ा है, और दिनेश त्रिवेदी का बढ़ा हुआ कद इसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

तीस्ता प्रोजेक्ट और फाइटर जेट डील का खतरा

चीन लगातार अपने पड़ोसी बांग्लादेश में अपनी पैठ बढ़ा रहा है। नई रिपोर्ट्स के मुताबिक ढाका अब चीनी फाइटर जेट खरीदने की तैयारी कर रहा है। ये वही फाइटर जेट हैं जिनका इस्तेमाल पाकिस्तान पहले कर चुका है। साल 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिन का छोटा युद्ध, जिसे ऑपरेशन सिंदूर कहा गया, हुआ था और उस वक्त पाकिस्तान ने इन्हीं चीनी जेट्स का प्रयोग किया था। ऐसे में यह डील भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।

इसके साथ ही चीन की नजर तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट पर भी टिकी हुई है। बीजिंग इस प्रोजेक्ट को विकसित करने में बहुत दिलचस्पी दिखा रहा है। तीस्ता नदी का मुद्दा नई दिल्ली के लिए हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। ऐसे नाजुक समय में दिनेश त्रिवेदी की नियुक्ति और भी अहम हो जाती है, क्योंकि भारत हर हाल में अपने पड़ोसी को चीन के चंगुल में जाने से रोकना चाहता है।

क्या पहले भी किसी राजदूत को मिला है यह दर्जा

कूटनीति के लंबे इतिहास में ऐसा कदम बिल्कुल नया नहीं है, लेकिन यह बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलता है। जब किसी डिप्लोमेटिक मिशन को राजनीतिक वजन देना होता है, तभी इस तरह के फैसले लिए जाते हैं। बीते वर्षों में कुछ कद्दावर नेताओं को यह खास रैंक मिल चुका है।

वी के कृष्ण मेनन को जब यूनाइटेड किंगडम में हाई कमिश्नर बनाया गया था, तब उन्हें भी वहां काम करने के लिए कैबिनेट का दर्जा दिया गया था। इसी तरह दुर्गा प्रसाद धर को सोवियत संघ का एंबेसडर नियुक्त किया गया और साल 1975 में उन्हें यह बड़ा सम्मान मिला था। इंदर कुमार गुजराल और त्रिलोकी नाथ कौल भी सोवियत संघ में इसी रैंक पर रहे थे। यूनाइटेड किंगडम में डॉक्टर एल एम सिंघवी को भी कैबिनेट रैंक से नवाजा गया था। दिनेश त्रिवेदी का नाम अब इसी चुनिंदा सूची में जुड़ गया है।

बांग्लादेशियों के लिए फिर खुला टूरिस्ट वीजा

भारत ने बांग्लादेश के आम नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा दोबारा शुरू कर दिया है। जुलाई 2024 के भारी विद्रोह के बाद यह सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई थी और करीब दो साल तक यह कड़ा सस्पेंशन लागू रहा। गुरुवार को दिनेश त्रिवेदी ने ढाका के जमुना फ्यूचर पार्क में एक बड़ा ऐलान किया, जहां एक बड़ा इंडियन वीजा एप्लीकेशन सेंटर मौजूद है। यह केंद्र भारत के सबसे बड़े वीजा सहायता केंद्रों में से एक है। त्रिवेदी ने यहां चल रही वीजा प्रक्रिया का जायजा भी लिया। उन्होंने कहा, ‘मुझे जनरल ट्रेवल वीजा सेवा फिर से शुरू करने की घोषणा करते हुए बहुत खुशी हो रही है।’

घोषणा के मुताबिक टूरिस्ट वीजा के आवेदन 28 जून 2026 से शुरू होंगे, और यह सुविधा राजधानी ढाका समेत पांच वीजा केंद्रों पर उपलब्ध रहेगी।

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सवाल-जवाब

दिनेश त्रिवेदी को क्या दर्जा दिया गया है?
ढाका में भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी को यूनियन कैबिनेट मंत्री के बराबर कैबिनेट रैंक का दर्जा दिया गया है। यह दर्जा सिर्फ प्रोटोकॉल के लिए है।
इस फैसले की जानकारी किसने दी?
होम मिनिस्ट्री ने एक मेमोरेंडम के जरिए इस फैसले की जानकारी दी है।
दिनेश त्रिवेदी को ढाका में हाई कमिश्नर कब बनाया गया था?
उन्हें अप्रैल के महीने में ढाका में भारत का नया हाई कमिश्नर नियुक्त किया गया था। वह पहले केंद्र सरकार में मंत्री रह चुके हैं।
बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री कौन हैं?
शेख हसीना की सरकार गिरने और मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के बाद अब तारिक रहमान बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बन चुके हैं।
भारत की चिंता क्या है?
तारिक रहमान का चीन दौरा, बांग्लादेश का चीन और पाकिस्तान से बढ़ता रिश्ता, चीनी फाइटर जेट खरीदने की तैयारी और तीस्ता रिवर प्रोजेक्ट में चीन की दिलचस्पी भारत के लिए चिंता का विषय हैं।
टूरिस्ट वीजा कब से शुरू होगा?
बांग्लादेशी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा के आवेदन 28 जून 2026 से शुरू होंगे और यह सुविधा ढाका समेत पांच वीजा केंद्रों पर मिलेगी।
टूरिस्ट वीजा सेवा कब और क्यों बंद हुई थी?
जुलाई 2024 के भारी विद्रोह के बाद यह सेवा पूरी तरह बंद कर दी गई थी और करीब दो साल तक यह सस्पेंशन लागू रहा।
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