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धौलपुर की ऐतिहासिक चोपड़ा बावड़ी की गिरी दीवार, अगले महीने से सुधारी जाएगी पुरानी धरोहरराजस्थान
29 अग॰ 2026, 11:29 am (27 दिन पहले)· 2

धौलपुर की ऐतिहासिक चोपड़ा बावड़ी की गिरी दीवार, अगले महीने से सुधारी जाएगी पुरानी धरोहर

धौलपुर की ऐतिहासिक चोपड़ा बावड़ी का एक हिस्सा ढहने से स्थानीय लोगों और पर्यटकों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और पुरातत्व विभाग ने अगले महीने से इसकी मरम्मत शुरू होने की बात कही है।

धौलपुर शहर की पुरानी विरासत और प्राचीन जल संरक्षण प्रणाली की बेजोड़ मिसाल मानी जाने वाली ऐतिहासिक चोपड़ा बावड़ी इस समय चर्चा में है। अपनी भव्य वास्तुकला के लिए मशहूर इस धरोहर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हाल ही में अचानक ढह गया, जिससे स्थानीय निवासियों और यहां आने वाले लोगों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। घटना करीब पंद्रह दिन पहले की है जब इस प्राचीन संरचना की एक बड़ी पाल भरभराकर नीचे आ गिरी। गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त आसपास कोई भी सैलानी या स्थानीय नागरिक मौजूद नहीं था, वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

दीवार गिरने के इस हादसे के बाद से ही पूरे इलाके में सुरक्षा को लेकर डर का माहौल बना हुआ है। जो लोग रोजाना सुबह और शाम के समय इस परिसर में टहलने के लिए आते थे, उन्होंने अब यहां आना बंद कर दिया है। इसके अलावा ऐतिहासिक स्थल पर घूमने आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी खासी गिरावट दर्ज की गई है। आम जनता का साफ कहना है कि जब तक इस क्षतिग्रस्त हिस्से को पूरी तरह से दुरुस्त नहीं किया जाता, तब तक इस परिसर में कदम रखना सुरक्षित नहीं है क्योंकि लोगों को डर सता रहा है कि संरचना का कोई अन्य हिस्सा भी कभी भी ढह सकता है।

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मरम्मत और प्रशासनिक कार्रवाई की मांग

केवल दीवार ही नहीं, बल्कि चोपड़ा बावड़ी परिसर के भीतर पैदल चलने वाले रास्तों पर लगाई गई टाइल्स भी कई जगहों से उखड़ चुकी हैं। इन टूटी और उखड़ी हुई टाइल्स के कारण राहगीरों को आवाजाही में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, और गिरने या पैर फिसलने का खतरा भी हर वक्त बना रहता है। मानसून के मौसम में पानी के बहाव और नमी के कारण भी बावड़ी की दीवारों और आसपास के ढांचों पर बुरा असर पड़ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि लंबे वक्त से इस प्राचीन धरोहर की देखरेख और मरम्मत पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है। यदि अब भी क्षतिग्रस्त हिस्सों की सुध नहीं ली गई तो इस ऐतिहासिक इमारत के बाकी हिस्सों को भी बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। जनता लगातार जिला प्रशासन और पुरातत्व विभाग से गुहार लगा रही है कि इस ऐतिहासिक धरोहर की जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए।

ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, इस चोपड़ा बावड़ी का निर्माण कार्य साल 1856 में धौलपुर रियासत के महाराज राणा भगवंत सिंह के मामा राजधार कन्हैयालाल द्वारा करवाया गया था। अपनी नायाब बनावट और पुराने इतिहास के चलते यह जगह धौलपुर की पहचान का एक अहम हिस्सा है, जिसे बचाए रखना बेहद जरूरी है।

अगले महीने से शुरू हो सकता है सुधार कार्य

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए पुरातत्व विभाग की सर्किल सुप्रीडेंट धर्मजीत कौर ने बताया कि विभाग को बावड़ी की पाल ढहने की घटना की पूरी जानकारी है। घटना वाले दिन ही विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया था। इसके तुरंत बाद मरम्मत के लिए एक नया प्रस्ताव उच्च अधिकारियों के पास भेज दिया गया था।

उन्होंने आगे जानकारी दी कि फिलहाल मचकुंड क्षेत्र में स्थित मंदिरों के जीर्णोद्धार का काम जोर-शोर से चल रहा है। अब चोपड़ा बावड़ी की मरम्मत के काम को भी इसी मौजूदा योजना के अंतर्गत शामिल कर लिया गया है। पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि अगले महीने से यहां मरम्मत का काम धरातल पर शुरू हो जाएगा। योजना के तहत सबसे पहले टूटी हुई दीवार और क्षतिग्रस्त हिस्सों को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाएगा। इसके बाद जरूरत के हिसाब से परिसर के अन्य हिस्सों में भी सुधार कार्य किए जाएंगे। इसके साथ ही विभाग इस बात की भी तकनीकी जांच करवा रहा है कि आखिर किन कारणों से बावड़ी का हिस्सा बार-बार ढह रहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की समस्याओं से स्थायी तौर पर बचा जा सके।

सवाल-जवाब

चोपड़ा बावड़ी किस शहर में स्थित है?
चोपड़ा बावड़ी राजस्थान के धौलपुर शहर में स्थित है।
चोपड़ा बावड़ी का निर्माण किसने करवाया था?
इस बावड़ी का निर्माण वर्ष 1856 में धौलपुर रियासत के महाराज राणा भगवंत सिंह के मामा राजधार कन्हैयालाल ने करवाया था।
बावड़ी की दीवार कब ढही थी?
बावड़ी की एक बड़ी पाल घटना से करीब पंद्रह दिन पहले अचानक ढह गई थी।
इस घटना में कितने लोग घायल हुए?
गनीमत यह रही कि हादसे के वक्त वहां कोई पर्यटक या स्थानीय व्यक्ति मौजूद नहीं था, इसलिए कोई हताहत नहीं हुआ।
बावड़ी की मरम्मत का काम कब शुरू होने की उम्मीद है?
पुरातत्व विभाग के अनुसार अगले महीने से चोपड़ा बावड़ी की मरम्मत का काम शुरू होने की उम्मीद है।
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