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धौलपुर नगर परिषद के वार्ड 48 में 9 सितंबर को मतदान, स्थानीय मुद्दों और जनप्रतिनिधि की जवाबदेही पर अड़े नागरिकराजस्थान
29 अग॰ 2026, 12:57 pm (27 दिन पहले)· 2

धौलपुर नगर परिषद के वार्ड 48 में 9 सितंबर को मतदान, स्थानीय मुद्दों और जनप्रतिनिधि की जवाबदेही पर अड़े नागरिक

राजस्थान के धौलपुर नगर परिषद चुनाव को लेकर वार्ड नंबर 48 में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 1,877 मतदाता 9 सितंबर को टूटी सड़कों, गंदे पानी की निकासी और लटकती बिजली की तारों जैसे मुख्य मुद्दों पर अपना नया वार्ड प्रतिनिधि चुनेंगे।

राजस्थान में स्थानीय निकाय चुनावों की तिथियां नजदीक आते ही राजनीतिक गलियारों में चहल-पहल काफी बढ़ गई है। धौलपुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर 48 में चुनावी बिगुल बजने के बाद स्थानीय निवासियों ने भी अपने क्षेत्र के विकास और जनप्रतिनिधियों के दावों का आकलन करना शुरू कर दिया है। नामांकन की आधिकारिक शुरुआत के बाद से जहां विभिन्न दलों और निर्दलीय प्रत्याशी मतदाताओं के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं, वहीं क्षेत्र की जनता इस बार केवल वादों पर नहीं, बल्कि धरातलीय काम पर वोट देने का मूड बना चुकी है। मतदाताओं का कहना है कि हर चुनाव में चेहरे बदल जाते हैं, लेकिन वार्ड की बुनियादी समस्याएं कई सालों से हल नहीं हो सकी हैं।

सड़क, नाली और बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसते नागरिक

वार्ड संख्या 48 के विभिन्न हिस्सों का अवलोकन करने पर बुनियादी नागरिक सुविधाओं की जर्जर हालत साफ दिखाई देती है। गलियों की सड़कें जगह-जगह से उखड़ी हुई हैं और गिट्टियां बाहर निकल आई हैं, जिससे पैदल चलने वालों और वाहन चालकों दोनों को हर दिन दुर्घटनाओं का जोखिम उठाना पड़ता है। बारिश के मौसम में यह स्थिति और भी भयावह रूप ले लेती है। नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण गंदा पानी सड़कों पर बहता रहता है, जिससे पूरे क्षेत्र में बदबू फैलती है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि समुचित जल निकासी व्यवस्था न होने की वजह से थोड़ी सी बारिश में भी पूरा इलाका जलमग्न हो जाता है, जिससे स्कूली बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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झूलती बिजली की तारें बनीं जानलेवा खतरा

सड़क और नालियों के अलावा वार्ड 48 में बिजली के बुनियादी ढांचे की खस्ताहाली भी एक बड़ी चिंता का विषय बनी हुई है। क्षेत्र की तंग गलियों में बिजली के नंगे और पुराने तार बेहद निचले स्तर पर झूलते हुए देखे जा सकते हैं। कई स्थानों पर तो ये तार मकानों के छज्जों और बाल्कनियों को लगभग छू रहे हैं, जिससे हर समय किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है। वार्डवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई बार संबंधित विद्युत विभाग और स्थानीय प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित कराया गया, परंतु आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस बार मतदाता चुनाव में उतरने वाले प्रत्याशियों से इन खतरनाक तारों को व्यवस्थित कराने का स्पष्ट आश्वासन मांग रहे हैं।

पूर्व कार्यकाल से नाराजगी और जनप्रतिनिधि की सुध-बुध

क्षेत्र के लोगों ने पिछले नगर निकाय कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों को लेकर अपनी भारी निराशा व्यक्त की है। वार्डवासियों के अनुसार, पिछले चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर पूनम वार्ड पार्षद चुनी गई थीं। हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि उनके पांच साल के कार्यकाल में क्षेत्र का कोई उल्लेखनीय विकास नहीं हो सका। नागरिकों का कहना है कि उन्होंने अपने प्रतिनिधि को इसलिए चुना था ताकि वह नगर परिषद की बैठकों में वार्ड की वास्तविक समस्याओं को मजबूती से उठाकर उनका समाधान करा सकें, लेकिन मुख्य समस्याएं जस की तस बनी रहीं। यही वजह है कि इस बार लोग किसी भी प्रत्याशी के चुनाव चिह्नों के बजाय उसके पूर्व में किए गए सामाजिक कार्यों और उसकी कार्यक्षमता को प्राथमिकता दे रहे हैं।

शिक्षित और जिम्मेदार नेतृत्व की तलाश: 'बिकाऊ नहीं, टिकाऊ'

वार्ड 48 के मतदाताओं ने इस बार अपना मन स्पष्ट कर लिया है और प्रत्याशियों के सामने अपनी शर्तें रख दी हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें ऐसा प्रतिनिधि चाहिए जो शिक्षित हो, साफ-सुथरी छवि रखता हो और चुनाव जीतने के बाद भी जनता के बीच आसानी से उपलब्ध रहे। अक्सर देखा जाता है कि चुनाव जीतते ही प्रतिनिधि गायब हो जाते हैं और जनता अपनी छोटी-छोटी समस्याओं के लिए नगर परिषद के चक्कर काटती रहती है। मतदाताओं ने खुलकर नारा दिया है कि उन्हें 'बिकाऊ नहीं, बल्कि टिकाऊ' पार्षद की जरूरत है जो किसी तरह के लालच या व्यक्तिगत स्वार्थ में न आकर वार्ड के विकास और सार्वजनिक हित के लिए नगर परिषद के अधिकारियों से लगातार जवाबदेही तय कर सके।

1,877 मतदाता तय करेंगे राजनीतिक भविष्य

आंकड़ों के अनुसार, धौलपुर नगर परिषद के वार्ड 48 में कुल 1,877 पंजीकृत मतदाता हैं जो आगामी 9 सितंबर को अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। नामांकन प्रक्रिया के तेजी पकड़ने के साथ ही अब उम्मीदवारों का जनसंपर्क अभियान भी गति पकड़ रहा है। इस बार का चुनाव केवल पारंपरिक राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या दलीय आधार पर सीमित नहीं रहने वाला है। स्थानीय नागरिक बुनियादी सुविधाओं, सफाई, सुरक्षा और पारदर्शिता जैसे जमीनी मुद्दों पर सवाल पूछ रहे हैं। अब देखना यह होगा कि चुनावी मैदान में उतरे प्रत्याशियों में से कौन सा उम्मीदवार इन बुनियादी समस्याओं का समाधान करने का भरोसा जीत पाता है और 9 सितंबर को मतदाता किसे अपना समर्थन देकर नगर परिषद भेजते हैं।

सवाल-जवाब

धौलपुर नगर परिषद के वार्ड 48 में मतदान किस तारीख को होगा?
वार्ड नंबर 48 में आगामी 9 सितंबर को मतदान कराया जाएगा।
वार्ड 48 में कुल कितने पंजीकृत मतदाता हैं?
वार्ड 48 में कुल 1,877 पंजीकृत मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
वार्ड 48 के नागरिकों की मुख्य समस्याएं क्या हैं?
स्थानीय निवासियों की मुख्य समस्याएं टूटी सड़कें, नालियों में गंदा पानी, जलभराव और गलियों में नीची झूलती बिजली की तारें हैं।
पिछले कार्यकाल में वार्ड 48 से पार्षद कौन थीं?
पिछले कार्यकाल में कांग्रेस पार्टी की ओर से पूनम वार्ड 48 की पार्षद चुनी गई थीं।
इस चुनाव में मतदाता प्रत्याशियों से क्या उम्मीद कर रहे हैं?
मतदाता शिक्षित, स्वच्छ छवि वाले और लगातार क्षेत्र में उपलब्ध रहने वाले ऐसे जनप्रतिनिधि की मांग कर रहे हैं जो वार्ड की समस्याओं का समाधान करा सके।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·26 दिन पहले

धौलपुर के वार्ड 48 का यह मामला सिर्फ बुनियादी सुविधाओं का चुनाव नहीं, बल्कि स्थानीय प्रशासन और विद्युत विभाग की गंभीर लापरवाही का है जो नागरिक सुरक्षा अधिनियम के तहत सीधे तौर पर सार्वजनिक जीवन को जोखिम में डालती है। नंगे झूलते तार और उखड़ी सड़कें किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं। यदि चुनाव के बाद भी इन समस्याओं पर प्रशासनिक जवाबदेही तय नहीं हुई, तो यह स्थिति नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन साबित होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·26 दिन पहले

यह धरातलीय रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि शहरी निकायों में केवल कागजी विकास दिखाया जाता है जबकि धरातल पर सीवर और विद्युत जैसी बुनियादी सेवाएं चरमराई हुई हैं। यदि इन स्थानीय चुनावों में जनता ने मुखर होकर जवाबदेही तय नहीं की, तो प्रशासन की यह उदासीनता भविष्य में किसी बड़े जानमाल के नुकसान का कारण बन सकती है, जिसे अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

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