देश में बढ़ते डिजिटल अपराधों, डेटा चोरी और संवेदनशील संस्थानों पर होने वाले साइबर हमलों के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आईआईटी कानपुर स्थित साइबर सिक्योरिटी टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब, यानी सी3आईहब ने भारतीय सेना की सेंट्रल कमांड के सैन्यकर्मियों को उच्चस्तरीय साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण देने का कार्य सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया है। इस विशेष पहल के तहत आयोजित छह महीने लंबे हाइब्रिड साइबर सुरक्षा कार्यक्रम के दूसरे बैच का समापन हो चुका है। लखनऊ स्थित सेंट्रल कमांड मुख्यालय में आयोजित एक औपचारिक समारोह के दौरान पाठ्यक्रम पूरा करने वाले 70 सैन्यकर्मियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। इसके साथ ही इस संस्थान से अब तक कुल 140 सैन्यकर्मी आधुनिक साइबर सुरक्षा तकनीकों का गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
छह महीने के हाइब्रिड मॉडल और आधुनिक टूल्स पर केंद्रित गहन प्रशिक्षण
सेना के जवानों को डिजिटल युद्ध के मैदान में सक्षम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया यह पाठ्यक्रम कुल छह महीने की अवधि का है। इसे दो स्पष्ट चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें शुरुआती तीन महीने बेसिक मॉड्यूल के लिए और उसके बाद के तीन महीने एडवांस्ड मॉड्यूल के लिए निर्धारित किए गए हैं। इस पूरे प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित नहीं रखा जाता, बल्कि उन्हें वास्तविक डिजिटल हमलों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव भी दिया जाता है।
पाठ्यक्रम के अंतर्गत सैन्यकर्मियों को लिनक्स सिस्टम, कंप्यूटर नेटवर्किंग, साइबर थ्रेट इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑपरेशन सेंटर (SOC) के संचालन की बारीकियां सिखाई जाती हैं। इसके अतिरिक्त डिजिटल फॉरेंसिक, मैलवेयर एनालिसिस, साइबर अटैक की पहचान, AI आधारित सुरक्षा प्रणालियों, VAPT (वल्नरेबिलिटी असेसमेंट एंड पेनिट्रेशन टेस्टिंग) तथा साइबर डिफेंस जैसी आधुनिक तकनीकों पर विशेष जोर दिया गया है। वास्तविक समय के साइबर खतरों का सामना करने और प्रणालियों को सुरक्षित रखने की क्षमता विकसित करने के लिए जवानों को बर्प सूट, वायरशार्क, एनमैप, स्प्लंक और नेसस जैसे वैश्विक स्तर पर उपयोग किए जाने वाले प्रोफेशनल सॉफ्टवेयर टूल्स का अभ्यास कराया जाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा और पुलिस बलों के लिए केंद्र बना सी3आईहब
आईआईटी कानपुर का सी3आईहब पिछले कुछ वर्षों में देश की डिजिटल सुरक्षा तैयारियों को सुदृढ़ करने वाला एक प्रमुख संस्थान बनकर उभरा है। यह संस्थान न केवल सशस्त्र बलों बल्कि विभिन्न राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय एजेंसियों के लिए भी प्रशिक्षण का बड़ा आधार बन गया है। गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से इसी केंद्र में देश के पहले साइबर कमांडो दस्ते को तैयार किया गया था। इस पहले बैच में विभिन्न राज्यों की पुलिस प्रणाली तथा केंद्रीय पुलिस संगठनों से चुने गए अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया था।
इसके अलावा सी3आईहब द्वारा समय-समय पर भारतीय सेना, देश के बंदरगाह प्राधिकरणों और कई अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्थानों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए भी लक्षित साइबर सुरक्षा सत्र आयोजित किए जाते रहे हैं। महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल संपत्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे बहुस्तरीय प्रशिक्षण अभियानों का संचालन अत्यंत कारगर साबित हो रहा है।
डिजिटल युद्ध के नए दौर में प्रशिक्षित मानव संसाधन की अनिवार्यता
वर्तमान समय में जिस तेजी से बैंकिंग धोखाधड़ी, ऑनलाइन वित्तीय ठगी, डेटा सेंधमारी और सरकारी व औद्योगिक संस्थानों को निशाना बनाने वाले साइबर हमले बढ़ रहे हैं, उसे देखते हुए तकनीकी रूप से कुशल अधिकारियों की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां केवल भौगोलिक सीमाओं या पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि इंटरनेट और डिजिटल स्पेस भी युद्ध का एक प्रमुख मोर्चा बनकर उभरेगा।
ऐसी स्थिति में थल सेना, वायु सेना, नौसेना और पुलिस बलों के जवानों को आधुनिक साइबर वारफेयर, साइबर डिफेंस और डिजिटल जांच तकनीकों से लैस रखना राष्ट्र की प्राथमिकता बन चुका है। आईआईटी कानपुर इसी दूरदर्शी सोच के साथ देश के रक्षा और सुरक्षा तंत्र को डिजिटल युग के अनुसार तैयार करने में जुटा है। संस्थान आने वाले समय में और अधिक सुरक्षा एजेंसियों, पुलिस विभागों और सैन्य दस्तों को आधुनिक साइबर तकनीकों का प्रशिक्षण देने की योजना पर निरंतर काम कर रहा है।



















