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दुर्गा पूजा में मांसाहारी दुकानों पर धीरेंद्र शास्त्री के बयान से बंगाल की सियासत गरमाईपश्चिम बंगाल
7 सित॰ 2026, 9:48 pm (5 दिन पहले)· 2

दुर्गा पूजा में मांसाहारी दुकानों पर धीरेंद्र शास्त्री के बयान से बंगाल की सियासत गरमाई

बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी दुकानों को बंद रखने की मांग की है, जिस पर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है।

बागेश्वर धाम के आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा पश्चिम बंगाल में दिए गए एक बयान के बाद वहां की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हाल ही में वह तीन दिनों के एक धार्मिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बंगाल पहुंचे थे, जहां उन्होंने दुर्गा पूजा के पवित्र अवसर पर राज्य में नौ दिनों तक मांसाहारी खाद्य पदार्थों की बिक्री बंद करने की पुरजोर वकालत की। उनके इस कड़े बयान के बाद से सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चाओं का बाजार गर्म है और विभिन्न दलों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

हावड़ा के कार्यक्रम में की थी अपील

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हावड़ा जिले के लिलुआ में 4, 5 और 6 सितंबर को तीन दिवसीय हनुमान कथा और दिव्य दरबार का आयोजन किया गया था। इस भव्य धार्मिक अनुष्ठान में शिरकत करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान ही आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दुर्गा पूजा और मांसाहार को लेकर अपनी बात रखी थी, जिसके बाद से पश्चिम बंगाल में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है।

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पूजा पंडालों के पास नॉन-वेज की बिक्री पर रोक की मांग

अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दिनों में मांसाहारी भोजन से पूरी तरह परहेज करने की अपील की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उत्सव के इन नौ दिनों के दौरान मटन और अन्य मांसाहारी चीजों की दुकानें पूरी तरह बंद रहनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पूजा मंडपों के आसपास नॉन-वेज भोजन की खुलेआम बिक्री पर रोक लगाने की मांग की और आम हिंदुओं से नवरात्रि के पावन पर्व पर शुद्ध रूप से शाकाहारी भोजन अपनाने का आह्वान किया।

बयान के बाद उठा विवाद और पाखंडी शब्द पर चर्चा

बात यहीं नहीं रुकी, बल्कि धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन करने वाले हिंदुओं को पाखंडी तक करार दे दिया। उनके इस विवादास्पद बयान के तुरंत बाद इंटरनेट मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। आलोचकों और जानकारों का यह तर्क है कि बंगाल में दुर्गा पूजा के समय मांसाहारी भोजन करने की पुरानी सामाजिक परंपरा कई परिवारों में पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है। ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणियां स्थानीय लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को आहत कर सकती हैं। हालांकि, अभी तक इस मामले को लेकर सड़कों पर कोई बड़ा प्रत्यक्ष विरोध प्रदर्शन तो देखने को नहीं मिला है, लेकिन राजनीतिक और वर्चुअल मंचों पर यह बहस का मुख्य विषय बन चुका है.

स्थानीय परंपराओं को लेकर भाजपा की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने अपनी बात रखते हुए कहा कि बंगाल में महाष्टमी और नवमी के पावन दिनों में मटन खाने की एक दीर्घकालिक सांस्कृतिक परंपरा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पारंपरिक व्यवस्था में किसी भी तरह के बदलाव की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि देश के किसी भी संत या प्रचारक को अपनी बात और विचार रखने की पूरी स्वतंत्रता है।

टीएमसी का कड़ा विरोध और तीखा हमला

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के विधायक कुणाल घोष ने आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस बयान पर बेहद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों से आकर बंगाल की संस्कृति और बंगालियों का अपमान किया जा रहा है। कुणाल घोष ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य की मुख्यमंत्री और पूरी कैबिनेट ऐसे लोगों को आमंत्रित करके उनका भव्य स्वागत कर रही है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब कुछ सोची-समझी रणनीति के तहत बंगालियों का अपमान करने के लिए किया जा रहा है और बंगाल की जनता सब कुछ बहुत गौर से देख रही है।

बंगाल में सांस्कृतिक आस्था और खान-पान पर छिड़ी बहस

आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस एक बयान ने पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा से जुड़ी गहरी धार्मिक आस्था और स्थानीय खान-पान की सदियों पुरानी परंपराओं को एक बार फिर से राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया है। एक तरफ जहां उनके समर्थकों और अनुयायियों के लिए यह एक शुद्ध धार्मिक और आध्यात्मिक अपील है, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दलों और सामाजिक आलोचकों का साफ तौर पर यह मानना है कि बंगाल की प्राचीन सांस्कृतिक विरासतों और लोक-परंपराओं पर टिप्पणी करने से पहले वहां की स्थानीय जनभावनाओं का पूरा सम्मान और ध्यान रखा जाना चाहिए। इसी बीच, शुभेंदु अधिकारी द्वारा दुर्गापूजा को लेकर किए गए कई बड़े ऐलान भी काफी चर्चा में बने हुए हैं।

सवाल-जवाब

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पश्चिम बंगाल क्यों गए थे?
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले के लिलुआ में तीन दिवसीय हनुमान कथा और दिव्य दरबार में शामिल होने गए थे।
धीरेंद्र शास्त्री ने दुर्गा पूजा को लेकर क्या मांग की थी?
उन्होंने दुर्गा पूजा के दौरान नौ दिनों तक मांसाहारी दुकानें बंद रखने और पूजा मंडपों के पास नॉन-वेज की बिक्री पर रोक लगाने की मांग की थी।
शमिक भट्टाचार्य ने इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल में नवमी के दिन मटन खाने की परंपरा है और संत अपनी बात रखने के लिए स्वतंत्र हैं।
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने क्या आरोप लगाया?
टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने आरोप लगाया कि बाहर से आकर बंगालियों का अपमान किया जा रहा है और मुख्यमंत्री व कैबिनेट ऐसे लोगों का स्वागत कर रही है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

यह बयान ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय पहचान और सांस्कृतिक खान-पान के मुद्दे राजनीतिक बहसों के केंद्र में हैं। बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार की परंपरा का पुराना इतिहास रहा है, और ऐसे बयानों से ध्रुवीकरण की राजनीति तेज होने की पूरी आशंका है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय संगठनों के बीच वैचारिक टकराव का एक नया माध्यम बन सकता है, जिससे चुनावी समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

इस बयानबाजी से सार्वजनिक व्यवस्था और कानून-लॉ एंड ऑर्डर के मोर्चे पर संवेदनशीलता बढ़ गई है। हालांकि अभी तक कोई बड़ा सड़क पर विरोध प्रदर्शन नहीं हुआ है, लेकिन इस तरह के वैचारिक टकराव अक्सर वर्चुअल प्लेटफॉर्म से निकलकर ज़मीनी तनाव में बदल सकते हैं। पुलिस और स्थानीय प्रशासन को त्योहारों के दौरान किसी भी संभावित सांप्रदायिक तनाव या अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अपनी खुफिया तंत्र और सुरक्षा व्यवस्था को बेहद चाक-चौबंद रखना होगा।

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