पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालसंघर्षों को मात देकर सिनेमा में बनाई मुकाम, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता दिव्या दत्ता की अनूठी दास्तानतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त, डॉलर मजबूतगोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवालनागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपाय
एक रुपये की गिट्टी से शुरुआत कर कोटा की द्वारिका गौड़ ने खड़ा किया सफल बुटिक, आज 17 महिलाओं को दे रहीं रोजगारराजस्थान
15 सित॰ 2026, 5:28 pm (10 दिन पहले)· 0

एक रुपये की गिट्टी से शुरुआत कर कोटा की द्वारिका गौड़ ने खड़ा किया सफल बुटिक, आज 17 महिलाओं को दे रहीं रोजगार

कोटा की द्वारिका गौड़ ने महज एक सिलाई मशीन और एक रुपये की धागे की गिट्टी से घर पर काम शुरू किया था, जो आज एक बड़ा बुटिक बनकर 17 महिलाओं को आजीविका प्रदान कर रहा है।

महिला सशक्तीकरण और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में राजस्थान के कोटा शहर की द्वारिका गौड़ ने एक असाधारण उदाहरण पेश किया है। उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और हुनर के दम पर शून्य से शुरुआत करके एक सफल बुटिक और डिजाइनिंग व्यवसाय खड़ा किया है। मूल रूप से बूंदी जिले के हिंडोली कस्बे की रहने वाली द्वारिका गौड़ ने न केवल अपने परिवार को एक मजबूत आर्थिक आधार दिया है, बल्कि अपने साथ करीब 17 अन्य महिलाओं को भी रोजगार से जोड़कर उनके घरों में खुशहाली लाने का काम किया है।

संघर्षपूर्ण शुरुआत और शुरुआती सफर

द्वारिका गौड़ की इस उद्यमशीलता की कहानी की शुरुआत दशकों पहले हुई थी। साल 1983 में उनकी शादी हुई थी, जिसके बाद घरेलू परिस्थितियों के कारण कॉलेज के दूसरे वर्ष में ही उनकी पढ़ाई छूट गई थी। बचपन से ही अपनी मां के कामों में हाथ बंटाने की शौकीन द्वारिका एक शिक्षिका बनना चाहती थीं, लेकिन पारिवारिक और परिस्थितिजन्य कारणों से उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका। ऐसे में उन्होंने निराश होने के बजाय अपने सिलाई-कढ़ाई के हुनर को ही अपनी ताकत बनाने का फैसला किया और इसे एक पेशे के रूप में अपना लिया।

ये भी पढ़ें

उनके इस सफर की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई थी। शुरुआती दिनों में उनके पास व्यवसाय के नाम पर केवल एक सिलाई मशीन थी और काम शुरू करने के लिए उन्होंने मात्र एक रुपये की धागे की गिट्टी खरीदी थी। उन्होंने बिना किसी बाहरी पूंजी या भारी-भरकम निवेश के अपने घर से ही काम करना शुरू किया। ग्राहकों को उनका काम पसंद आने लगा और धीरे-धीरे उनके काम की चर्चा फैलने लगी, जिससे ग्राहकों का दायरा बढ़ता चला गया।

दुकान की स्थापना और महिला रोजगार का जरिया

जैसे-जैसे ग्राहकों का भरोसा और काम का दबाव बढ़ता गया, वैसे-वैसे घर के भीतर से काम संभालना थोड़ा मुश्किल होने लगा। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने अपने मकान के निचले हिस्से में ही एक छोटी सी दुकान खोल ली। इस बदलाव ने उनके व्यवसाय को एक नया आयाम दिया और काम को और अधिक व्यवस्थित तरीके से संभालने में मदद की।

वर्तमान में उनके इस बुटिक से 16-17 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिन्हें नियमित रोजगार मिल रहा है। काम के प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए उन्होंने इसे दो हिस्सों में विभाजित किया है। इनमें से 10 महिलाएं दुकान पर ही बैठकर सिलाई और अन्य मुख्य काम संभालती हैं। वहीं, 5-6 महिलाओं को घर से ही काम करने की सुविधा दी गई है, जो साड़ी फॉल लगाने, हैंडवर्क करने और कपड़ों की फिनिशिंग जैसे जरूरी काम अपने घरों से ही पूरा करती हैं।

विशिष्ट उत्पाद और प्रतिष्ठित ग्राहक वर्ग

द्वारिका गौड़ के बुटिक की पहचान कोटा शहर में काफी मजबूत है क्योंकि यहाँ हर तरह के पारंपरिक और आधुनिक परिधान तैयार किए जाते हैं। उनके यहाँ सूट, ब्लाउज, फैंसी ड्रेस, लहंगा-चोली के साथ-साथ साड़ी फॉल और दुपट्टे का काम भी बड़ी बारीकी से किया जाता है। इसके अलावा, उनके बुटिक की एक और बड़ी खासियत भगवान के वस्त्र और मंदिरों के लिए विशेष श्रृंगार तैयार करना है।

इस विशेष सेवा के लिए ग्राहक मंदिर की मूर्ति की तस्वीर या उसका सटीक आकार भेज देते हैं, जिसके आधार पर द्वारिका और उनकी टीम बेहद खूबसूरत और सटीक फिटिंग वाले भगवान के वस्त्र तैयार करती हैं। उनके इस हुनर के चलते शहर के विज्ञान नगर, महावीर नगर और सेंट पॉल व सेंट जॉन स्कूल के शिक्षकों के साथ-साथ सीएफसीएल (CFCL) और रावतभाटा (आरईपीपी) जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों से भी लोग कपड़े सिलवाने और विशेष आर्डर देने पहुँचते हैं। घर और परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाते हुए द्वारिका गौड़ आज समाज में महिलाओं की आत्मनिर्भरता का एक मजबूत प्रतीक बन चुकी हैं।

सवाल-जवाब

द्वारिका गौड़ कौन हैं और उनका बुटिक कहाँ स्थित है?
द्वारिका गौड़ एक सफल महिला उद्यमी हैं, जिनका बुटिक राजस्थान के कोटा शहर में स्थित है। वे मूल रूप से बूंदी जिले के हिंडोली कस्बे की रहने वाली हैं।
उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत कैसे की थी?
उन्होंने अपने व्यवसाय की शुरुआत घर से ही की थी। तब उनके पास केवल एक सिलाई मशीन और एक रुपये की धागे की गिट्टी थी और उन्होंने इसमें कोई बड़ा निवेश नहीं किया था।
उनके बुटिक की विशेष सेवाएँ क्या हैं?
उनका बुटिक आम सूट, ब्लाउज और लहंगे के अलावा विशेष रूप से भगवान के वस्त्र और मंदिर का विशेष श्रृंगार तैयार करता है। इसके लिए वे केवल मूर्ति का आकार या फोटो देखकर वस्त्र बनाती हैं।
द्वारिका गौड़ का उद्यम अन्य महिलाओं को किस प्रकार रोजगार दे रहा है?
उनके साथ कुल 16-17 महिलाएं काम कर रही हैं। इनमें से 10 महिलाएं सीधे दुकान पर बैठकर सिलाई का काम करती हैं, जबकि 5-6 महिलाएं घर से ही फॉल, हैंडवर्क और फिनिशिंग का काम संभालती हैं।
उनके मुख्य ग्राहक वर्ग में कौन-कौन शामिल हैं?
उनके ग्राहकों में विज्ञान नगर, महावीर नगर के निवासियों के अलावा सेंट पॉल व सेंट जॉन स्कूल के शिक्षक और सीएफसीएल (CFCL) व रावतभाटा (आरईपीपी) जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के लोग शामिल हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

द्वारिका गौड़ की यह सफलता दर्शाती है कि सूक्ष्म-उद्यमिता और स्थानीय कौशल किस तरह जमीनी स्तर पर महिला सशक्तीकरण और रोजगार सृजन का सशक्त माध्यम बनते हैं। नीतिगत दृष्टिकोण से देखें तो जब ऐसे व्यक्तिगत प्रयासों को सरकारी कौशल विकास कार्यक्रमों, माइक्रो-फाइनेंस सहायताओं और बाजार संपर्क से संस्थागत रूप से जोड़ा जाता है, तब अर्ध-शहरी क्षेत्रों में स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलती है। शासन स्तर पर ऐसे सफल घरेलू मॉडलों को प्रोत्साहन देना असंगठित क्षेत्र के सशक्तीकरण के लिए आवश्यक है।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

अर्जुन की टिप्पणी सही दिशा दर्शाती है। आर्थिक विश्लेषण के दृष्टिकोण से, द्वारिका जी का यह मॉडल दिखाता है कि कैसे बिना किसी संस्थागत पूंजी के भी एक 'हाइपर-लोकल वैल्यू चेन' खड़ी की जा सकती है। जब घरेलू स्तर की सूक्ष्म इकाइयां विकेंद्रीकृत कार्यबल (घर से काम करने वाली महिलाएं) को जोड़ती हैं, तो यह असंगठित क्षेत्र में वित्तीय जोखिम को कम करता है। यदि ऐसे जमीनी उपक्रमों को डिजिटल भुगतानों और ई-कॉमर्स चैनलों के माध्यम से सीधे बाजारों से जोड़ दिया जाए, तो न्यूनतम कार्यशील पूंजी में भी इनका राजस्व कई गुना बढ़ सकता है, जो टियर-2 और टियर-3 शहरों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का एक टिकाऊ ढांचा है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

न्यूनतम पूंजी से शुरू हुआ यह जमीनी प्रयास दर्शाता है कि कौशल-आधारित सूक्ष्म उद्यमिता कैसे छोटे शहरों में महिला सशक्तीकरण और रोजगार सृजन का मजबूत आधार बन सकती है। ऑन-साइट और घर से काम करने का यह विकेंद्रीकृत मॉडल छोटे और मध्यम शहरों के अनौपचारिक क्षेत्र के लिए बेहद व्यावहारिक है। बिना किसी भारी पूंजी या बड़े बुनियादी ढांचे के स्थानीय स्तर पर आजीविका का यह ढांचा साबित करता है कि यदि हुनर को सही व्यावसायिक दिशा दी जाए, तो जमीनी अर्थव्यवस्था को आर्थिक मजबूती दी जा सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

रोहन की बात को आगे बढ़ाते हुए कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा के दृष्टिकोण से देखें तो आर्थिक आत्मनिर्भरता अपराध नियंत्रण की सबसे मजबूत अदृश्य ढाल है। जब महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका मिलती है, तो वे आर्थिक तंगी से पैदा होने वाले शोषण, घरेलू हिंसा और धोखाधड़ी जैसी सामाजिक-कानूनी असुरक्षाओं से बची रहती हैं। अनौपचारिक क्षेत्र में ऐसा आत्मनिर्भर मॉडल परिवारों को वित्तीय अपराधों और मानव तस्करी जैसे खतरों के प्रति कम संवेदनशील बनाता है। जमीनी स्तर पर आर्थिक सुरक्षा देना वास्तव में सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने का व्यावहारिक तरीका है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp