मानसून की दस्तक के साथ ही गन्ने के खेतों में पोक्का बोइंग नाम की घातक फफूंद बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है। समय रहते इस पर ध्यान न दिया जाए, तो यह बीमारी किसानों की पूरी फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। हालांकि, महंगे रासायनिक कीटनाशकों के बिना भी सिर्फ नियमित देखरेख और साधारण यांत्रिक तकनीकों को अपनाकर इस फफूंद के फैलाव को शुरुआती दौर में ही रोका जा सकता है। सही पहचान, प्रभावित हिस्सों की छंटाई और स्वच्छता प्रबंधन से बिना किसी भारी लागत के फसल सुरक्षित रखी जा सकती है।
पोक्का बोइंग के मुख्य लक्षण और पहचान का तरीका
पोक्का बोइंग गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाने वाला एक प्रमुख फफूंद जनित रोग है। बारिश के मौसम में वातावरण में छाई उमस और अधिक नमी के कारण इस बीमारी के रोगाणु तेजी से पनपते हैं। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान के अनुसार, इस बीमारी का हमला सबसे पहले गन्ने की ऊपरी पत्तियों पर होता है। शुरुआती चरण में गन्ने की नई पत्तियां मुड़ने लगती हैं और उनमें ऐंठन या चूड़ीनुमा घुमावदार आकार बनने लगता है। संक्रमण गहराने पर प्रभावित पत्तियों और तनों से सिरके जैसी तीखी गंध आने लगती है, जो इसकी पहचान का सबसे पक्का संकेत है।
यांत्रिक सफाई और गड्ढा खोदकर निपटाने की सही विधि
रासायनिक खर्चों से बचते हुए फसल को सुरक्षित रखने के लिए खेत का रोजाना निरीक्षण करना बेहद जरूरी है। यदि किसी पौधे में पोक्का बोइंग के लक्षण नजर आएं, तो संक्रमित हिस्से को पौधे से थोड़ा नीचे से काटकर अलग कर देना चाहिए। कटी हुई पत्तियों को कभी भी खुले खेत में न छोड़ें, क्योंकि हवा और बारिश की बूंदों के जरिए इनके बीजाणु आसपास के स्वस्थ पौधों तक पहुंचकर उन्हें भी बीमार कर सकते हैं।
संक्रमित पत्तियों और पौधों के कटे हुए हिस्सों को तुरंत एक बड़ी पॉलिथीन की थैली में जमा करें। इसके बाद इन्हें खेत से दूर ले जाकर दो से तीन फीट गहरे गड्ढे में डालकर ऊपर से मिट्टी से पूरी तरह से ढंक दें। यांत्रिक और जैविक स्वच्छता की यह प्रक्रिया खेत में फफूंद के दोबारा फैलाव को रोकती है और बिना किसी अतिरिक्त लागत के स्वस्थ पौधों को सुरक्षा प्रदान करती है।
संक्रमण बढ़ने पर रासायनिक उपचार के उपाय
यदि बीमारी खेत के बड़े हिस्से में फैलने लगे या नियंत्रित न हो रही हो, तो यांत्रिक उपायों के साथ रासायनिक दवाओं का छिड़काव किया जा सकता है। फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान के मुताबिक, बीमारी के बीजाणुओं और माइसीलियम को खत्म करने के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव बेहद असरदार साबित होता है। इसके अलावा कार्बेन्डाजिम का उपयोग करके भी फफूंद को नष्ट किया जा सकता है। इन दवाओं के सही छिड़काव से बीजाणु पूरी तरह निष्प्रभावी हो जाते हैं और गन्ने की फसल सुरक्षित बची रहती है।



















