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जयपुर नगर निगम मेयर की कुर्सी के लिए मंथन तेज, सुनील कोठारी और पुनीत कर्नावट रेस में सबसे आगेराजस्थान
18 सित॰ 2026, 8:14 pm (1 दिन पहले)· 0

जयपुर नगर निगम मेयर की कुर्सी के लिए मंथन तेज, सुनील कोठारी और पुनीत कर्नावट रेस में सबसे आगे

जयपुर नगर निगम में मेयर के चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल काफी तेज हो गई है। पार्टी नेतृत्व पुनीत कर्नावट और सुनील कोठारी के नामों पर विचार कर रहा है, जबकि मतदान 25 सितंबर को होना तय किया गया है।

जयपुर नगर निगम के भीतर मेयर पद की कुर्सी पर काबिज होने के लिए राजनीतिक गहमागहमी अपने चरम पर पहुंच गई है। चुनावी परिणाम सामने आने के बाद से ही सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है कि आखिर पार्टी किस पार्षद के कंधों पर शहर की कमान सौंपेगी। इस रेस में फिलहाल पुनीत कर्नावट और सुनील कोठारी के नाम सबसे आगे चल रहे हैं, जिन्हें लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बीच बैठकों और मंत्रणा का दौर लगातार जारी है। हालांकि, संगठन की तरफ से अभी तक किसी भी नाम पर औपचारिक मुहर नहीं लगाई गई है और अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान के स्तर पर ही लिया जाना है।

पार्षदों की राय और समीकरणों पर जोर

मेयर पद के लिए केवल नामों पर चर्चा ही नहीं हो रही, बल्कि पार्टी के शीर्ष नेता स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और पार्षदों की व्यक्तिगत राय को भी पूरी अहमियत दे रहे हैं। दोनों प्रमुख नामों को लेकर अलग-अलग स्तर पर मंथन चल रहा है और सभी पहलुओं को बारीकी से परखा जा रहा है। भाजपा के पार्षदों की चल रही बाड़ेबंदी के बीच इस पद को लेकर लगातार चल रही चर्चाओं ने राजधानी जयपुर की स्थानीय राजनीति के तापमान को काफी बढ़ा दिया है। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि बोर्ड गठन के समय किसी तरह की अंदरूनी कलह या असंतोष की स्थिति पैदा न हो।

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रेस में शामिल चेहरों की स्थिति

जयपुर के मेयर पद की इस महत्वपूर्ण दौड़ में पुनीत कर्नावट और सुनील कोठारी के नाम सबसे प्रमुखता से उभरकर सामने आए हैं। इन दोनों प्रबल दावेदारों को लेकर संगठन के भीतर विभिन्न स्तरों पर लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। सुनील कोठारी ने वार्ड 112 से शानदार चुनावी जीत हासिल की है और चुनाव परिणाम आते ही उनका नाम चर्चाओं के केंद्र में आ गया था। दूसरी तरफ, पुनीत कर्नावट का नाम भी पार्टी के उन संभावित और अनुभवी चेहरों में शामिल है जिन पर संगठन भरोसा जता सकता है।

नेतृत्व जल्द ले सकता है अंतिम निर्णय

पार्टी का शीर्ष नेतृत्व जल्द ही मेयर के नाम को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगाने की तैयारी में है। नामांकन की प्रक्रिया बेहद नजदीक आ चुकी है, जिसके चलते पार्टी कार्यालयों और बैठकों में सरगर्मी काफी बढ़ गई है। मेयर के चयन के साथ-साथ नगर निगम में नए बोर्ड के गठन की तैयारियों को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है, जिसमें पार्षदों के आपसी समीकरणों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जयपुर नगर निगम के कुल 150 वार्डों में से भाजपा के पास अपने 78 पार्षद हैं, जो कि बहुमत के जादुई आंकड़े 76 से दो सीटें ज्यादा हैं।

जोगाराम पटेल का बड़ा राजनीतिक दावा

इसी बीच, संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने जयपुर और जोधपुर दोनों जगह मेयर पद और बोर्ड गठन को लेकर बड़ा और स्पष्ट बयान दिया है। पटेल ने विश्वास जताया है कि दोनों ही महत्वपूर्ण नगर निगमों में केवल भाजपा का ही बोर्ड अस्तित्व में आएगा। उन्होंने स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार समर्थित बोर्ड के गठन का दावा किया है। मंत्री के इस बयान के बाद मेयर की कुर्सी और बोर्ड गठन की पूरी प्रक्रिया को लेकर सियासी सरगर्मी और अधिक तेज हो गई है।

जोधपुर में बदला हुआ सियासी समीकरण

जोगाराम पटेल ने जोधपुर के राजनीतिक हालात का जिक्र करते हुए वहां भी पार्टी की जीत का पूरा भरोसा जताया है। जोधपुर नगर निगम के हालिया चुनावों के बाद भाजपा के पास अपने 45 पार्षद हैं, जबकि कांग्रेस के खाते में 44 पार्षद आए हैं। कुल सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन से भाजपा का पलड़ा भारी हो गया है और उनके साथ आने के बाद भाजपा का आंकड़ा 52 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। सौ सदस्यीय इस निकाय में बहुमत हासिल करने के लिए कम से कम 51 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता होती है।

नामांकन और मतदान की तारीखें

जयपुर में बहुमत का जादुई आंकड़ा होने के बावजूद सबसे बड़ा सवाल मेयर की कुर्सी को लेकर बना हुआ है। पार्टी के भीतर पुनीत कर्नावट और सुनील कोठारी के नाम पर माथापच्ची जारी है और अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान को ही करना है। इसके साथ ही पार्षदों के रुख, स्थानीय समीकरणों और बोर्ड के गठन की पूरी रूपरेखा पर कड़ी नजर रखी जा रही है। मेयर के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसके लिए मतदान आगामी 25 सितंबर को होना तय किया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में भाजपा के द्वारा लिए जाने वाले फैसले पर ही जयपुर नगर निगम का पूरा राजनीतिक भविष्य टिका हुआ है।

सवाल-जवाब

जयपुर नगर निगम मेयर पद के लिए किन नामों पर चर्चा चल रही है?
मेयर पद की दौड़ में पुनीत कर्नावट और सुनील कोठारी के नाम सबसे आगे चल रहे हैं।
जयपुर नगर निगम चुनाव में मेयर पद के लिए मतदान कब होगा?
जयपुर नगर निगम मेयर चुनाव के लिए मतदान 25 सितंबर को होना तय किया गया है।
जयपुर में भाजपा के पास कुल कितने पार्षद हैं?
जयपुर में भाजपा के पास 150 में से 78 पार्षद हैं, जो बहुमत के आंकड़े से दो ज्यादा हैं।
जोगाराम पटेल ने जोधपुर को लेकर क्या दावा किया है?
संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने दावा किया है कि जोधपुर नगर निगम में भी भाजपा अपना बोर्ड बनाएगी।
जोधपुर में भाजपा के पास कुल कितने पार्षदों का समर्थन बताया जा रहा है?
जोधपुर में निर्दलीय पार्षदों के समर्थन के बाद भाजपा का आंकड़ा 52 तक पहुंचने की बात सामने आई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·20 घंटे पहले

जयपुर नगर निगम चुनाव में भाजपा के पास ७८ पार्षदों का स्पष्ट बहुमत है, लेकिन सुनील कोठारी और पुनीत कर्नावट के बीच चल रही खींचतान और पार्षदों की बाड़ेबंदी यह दर्शाती है कि शहरी स्थानीय निकायों में भी आंतरिक संतुलन साधना कितना संवेदनशील होता है। हालांकि पार्टी के पास जादुई आंकड़ा ७६ से दो सीटें अधिक हैं, फिर भी नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना होगा कि आगामी बोर्ड गठन के समय असंतोष की कोई गुंजाइश न बचे, क्योंकि प्रशासनिक स्थिरता पर्यटन और हेरिटेज शहर के विकास के लिए भी बेहद जरूरी है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 घंटे पहले

जयपुर नगर निगम में भाजपा के पास 150 में से 78 पार्षदों का बहुमत है, जो जादुई आंकड़े 76 से दो सीटें अधिक है। पुनीत कर्नावट और सुनील कोठारी के बीच चल रही इस रस्साकशी के बीच, पार्टी के सामने केवल मेयर चुनने की चुनौती नहीं है, बल्कि बाड़ेबंदी के दौर में असंतोष को रोककर एकजुटता बनाए रखना भी बड़ी परीक्षा है। आगामी 25 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शीर्ष नेतृत्व आंतरिक समीकरणों को कैसे साधता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 घंटे पहले

जयपुर नगर निगम के चुनाव में भाजपा के पास 78 पार्षदों का बहुमत है, जो 76 के जादुई आंकड़े से थोड़ा ही अधिक है। यह मामूली बढ़त पार्टी के लिए राहत तो है, लेकिन साथ ही एक बड़ी रणनीतिक चुनौती भी पेश करती है। दो सीटों का यह अंतर क्रॉस-वोटिंग या भीतरघात के खतरे को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, यही वजह है कि पार्टी को पुनीत कर्नावट और सुनील कोठारी के बीच चयन करते वक्त बेहद सतर्क रहना होगा। 25 सितंबर के मतदान से पहले बाड़ेबंदी का सहारा लेना यह साबित करता है कि नेतृत्व असंतोष को लेकर जोखिम नहीं उठाना चाहता। यदि हाईकमान ने सभी गुटों को भरोसे में नहीं लिया, तो मामूली बहुमत वाली इस जीत में भी बोर्ड गठन के बाद आंतरिक कलह उभरने की पूरी आशंका बनी रहेगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

भाजपा के पास 150 में से 78 पार्षदों का बहुमत होने के बावजूद 'बाड़ेबंदी' का सहारा लेना और शीर्ष नेताओं का इस स्तर पर मंथन करना यह स्पष्ट करता है कि पार्टी क्रॉस-वॉटिंग या आंतरिक असंतोष को लेकर बेहद सतर्क है। पुनीत कर्नावट और सुनील कोठारी के बीच चल रहा यह मुकाबला केवल पदों का नहीं, बल्कि स्थानीय गुटों में संतुलन साधने की चुनौती है। 25 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले हाईकमान को अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने के लिए फूंक-फूंक कर कदम रखना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

78 पार्षदों के बहुमत के बावजूद बाड़ेबंदी इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि स्थानीय स्तर पर असंतोष और क्रॉस-वॉटिंग का खतरा गंभीर है। सुनील कोठारी और पुनीत कर्नावट के बीच मची इस खींचतान में यदि हाईकमान ने वार्ड स्तर के समीकरणों और पार्षदों की नाराजगी को समय रहते नहीं संभाला, तो 25 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले पार्टी के भीतर की यह गुटबाजी सार्वजनिक हो सकती है। बोर्ड गठन के समय ऐसी सेंधमारी से बचने के लिए अनुशासन का कड़ा चाबुक चलाना ही एकमात्र विकल्प बचेगा।

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