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गौर सिटी अंडरपास का काम पूरा, परथला से एक मूर्ति के बीच जाम से जूझ रहे स्थानीय लोगों के मन में कई सवालउत्तर प्रदेश
26 अक्तू॰ 2026, 11:41 pm (2 दिन पहले)· 2

गौर सिटी अंडरपास का काम पूरा, परथला से एक मूर्ति के बीच जाम से जूझ रहे स्थानीय लोगों के मन में कई सवाल

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में गौर सिटी अंडरपास का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और इसके जल्द शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे गाजियाबाद आने-जाने वालों को राहत मिलेगी, लेकिन परथला से एक मूर्ति के बीच लगने वाले जाम से पूरी तरह निजात मिलना अभी बाकी है।

ग्रेटर नोएडा वेस्ट के गौर सिटी अंडरपास का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है और जल्द ही इसके वाहनों के लिए खुलने की संभावना जताई जा रही है। इस नए अंडरपास के शुरू होने से गाजियाबाद की तरफ से आने-जाने वाले चालकों को काफी सहूलियत मिलने की उम्मीद है। खासकर जो वाहन गाजियाबाद से एनएच-2 या एक्सप्रेसवे की तरफ जाते हैं, उनके लिए सफर सुगम हो सकता है। हालांकि, इसके बावजूद परथला से गौर चौक होते हुए एक मूर्ति की तरफ जाने वाले रूट पर ट्रैफिक जाम की समस्या से पूरी तरह छुटकारा मिलने की उम्मीद बहुत कम नजर आ रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में गाड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केवल एक अंडरपास पर्याप्त साबित नहीं होगा और अन्य चौराहों पर भी व्यवस्था सुधारने की जरूरत है।

स्थानीय लोगों और दीपेंदु सिंह की प्रतिक्रिया

क्षेत्र के निवासी दीपेंदु सिंह ने गौर सिटी अंडरपास के निर्माण को एक बहुत ही सराहनीय कदम बताया है और इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल की भी प्रशंसा की है। उनका कहना है कि इस अंडरपास के चालू होने से गाजियाबाद की ओर से आने और जाने वाले ट्रैफिक को सीधा फायदा मिलेगा। हालांकि, उन्होंने ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। उनके अनुसार, इलाके में सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान पर्याप्त ट्रैफिक मैनेजमेंट नजर नहीं आता है। सुबह आठ से 11 बजे और शाम छह से रात 10 बजे तक सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव होता है, लेकिन उस समय यातायात को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार अधिकारी याकर्मी पर्याप्त संख्या में मौजूद नहीं होते हैं।

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परथला से एक मूर्ति तक का सफर और जाम का संकट

दीपेंदु सिंह ने अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बताया कि परथला से एक मूर्ति तक की दूरी तय करने में सामान्य दिनों में महज 15 मिनट का वक्त लगना चाहिए, लेकिन भयंकर जाम के चलते यही छोटा सफर अक्सर आधे घंटे से लेकर एक घंटे तक खिंच जाता है। उनका मानना है कि केवल ढांचागत निर्माण से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर बेहतर ट्रैफिक प्रबंधन की भी सख्त जरूरत है। यही बात एक अन्य स्थानीय निवासी उत्कर्ष ने भी दोहराई। उत्कर्ष का कहना है कि गौर सिटी अंडरपास से ट्रैफिक व्यवस्था में कुछ सुधार तो जरूर आएगा, लेकिन ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बाकी प्रमुख चौराहों पर भी ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है। क्षेत्र में लगातार बढ़ती आबादी के कारण सड़कों पर वाहनों का दबाव हर दिन बढ़ रहा है और सुबह-शाम लगने वाले लंबे जाम से नौकरीपेशा लोगों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन से ठोस कदमों की मांग

स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि गाजियाबाद से एनएच-2 और एक्सप्रेसवे की तरफ जाने वाले वाहनों को तो अंडरपास से निश्चित तौर पर लाभ मिलेगा, जिससे कुछ रास्तों पर गाड़ियों का दबाव घटेगा। लेकिन परथला से एक मूर्ति की तरफ सफर करने वाले लोगों की परेशानी तभी हल हो सकती है जब इस विशिष्ट मार्ग पर ट्रैफिक को सुचारु बनाने के लिए कोई ठोस कार्ययोजना बनाई जाए। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में जिस तेजी से आबादी का विस्तार हो रहा है, उस रफ्तार से यहां की सड़कों और चौराहों के बुनियादी ढांचे को भी अपग्रेड करने की जरूरत है। प्रशासन को उन तमाम ब्लैक स्पॉट्स और व्यस्त चौराहों की पहचान करनी चाहिए जहां हर रोज सबसे ज्यादा जाम लगता है और वहां बिना किसी देरी के सुधार कार्य शुरू किए जाने चाहिए।

अंडरपास के शुरू होने के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट

नागरिकों का मानना है कि गौर सिटी अंडरपास से मिलने वाला वास्तविक लाभ इसके आधिकारिक रूप से शुरू होने के बाद ही सामने आ पाएगा। यह देखना बेहद दिलचस्प और अहम होगा कि इसके खुलने के बाद किन-किन रास्तों पर वाहनों का दबाव कम होता है और किन मार्गों पर पहले की तरह जाम की स्थिति बनी रहती है। फिलहाल लोगों को इस बात की पूरी उम्मीद है कि अंडरपास के चालू होने से गाजियाबाद की तरफ जाने वाले वाहनों की आवाजाही सुगम हो जाएगी, लेकिन परथला से एक मूर्ति तक के हिस्से में रोजाना लगने वाले जाम के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन को एक अलग से विशेष योजना तैयार करनी होगी ताकि आम जनता को इस नासूर बन चुकी समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सके।

सवाल-जवाब

गौर सिटी अंडरपास कहां स्थित है?
गौर सिटी अंडरपास ग्रेटर नोएडा वेस्ट में स्थित है।
इस अंडरपास के बनने से किन यात्रियों को फायदा होगा?
इस अंडरपास से गाजियाबाद की ओर से आने और जाने वाले तथा एनएच-2 या एक्सप्रेसवे की दिशा में सफर करने वाले वाहनों को सहूलियत मिलेगी।
परथला से एक मूर्ति के बीच सफर में आमतौर पर कितना समय लगता है?
सामान्य परिस्थितियों में इस दूरी को तय करने में लगभग 15 मिनट लगने चाहिए, लेकिन जाम के कारण यह सफर आधे घंटे से एक घंटे तक खिंच जाता है।
स्थानीय लोगों ने ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर क्या शिकायत की है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह और शाम के व्यस्त समय में पर्याप्त ट्रैफिक प्रबंधन या अधिकारियों की मौजूदगी नजर नहीं आती है।
दीपेंदु सिंह ने किस पहल की सराहना की है?
दीपेंदु सिंह ने गौर सिटी अंडरपास के निर्माण और इसके लिए की गई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल की सराहना की है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·2 दिन पहले

परथला से एक मूर्ति के बीच रोज़ का यह जाम मेरी रोज़ की परेशानी बन गया है। जब मैं खुद इस रास्ते से निकलती हूँ, तो पंद्रह मिनट का रास्ता एक घंटे में बदल जाता है और ऐसा लगता है कि गाड़ियाँ इंच-इंच सरक रही हैं। अंडरपास बनने से थोड़ी राहत की उम्मीद तो है, पर जब तक चौराहे पर पुलिस वाले मुस्तैदी से खड़े होकर ट्रैफिक नहीं संभालेंगे, तब तक रोज़ की इस भागदौड़ से राहत मिलना नामुमकिन है।

Ravikash Gupta@ravikash·2 दिन पहले

परथला से एक मूर्ति तक का पंद्रह मिनट का रास्ता एक घंटा खिंच जाना सचमुच थका देने वाला है। अंडरपास बनने से गाजियाबाद का ट्रैफिक तो संभल जाएगा, पर जब तक लोकल चौराहों पर पुलिस वाले खड़े नहीं होंगे, रोज ऑफिस जाने वालों की यह मुसीबत कम नहीं होने वाली।

Arjun Mehta@arjun-mehta·2 दिन पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही कहा आपने। अंडरपास से गाजियाबाद वाला रास्ता तो सुधर जाएगा, लेकिन जब तक परथला से एक मूर्ति के बीच ट्रैफिक पुलिस मुस्तैद नहीं होगी, रोज ऑफिस जाने वालों का यह टॉर्चर खत्म नहीं होने वाला।

Rohan Verma@rohan-verma·2 दिन पहले

गौर सिटी अंडरपास का काम पूरा होने की खबर अच्छी है, लेकिन परथला से एक मूर्ति के बीच का जाम कब खत्म होगा? जब तक पीक आवर्स में पुलिसकर्मी तैनात नहीं होंगे, तब तक सिर्फ अंडरपास बनने से क्या ही फर्क पड़ेगा?

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 दिन पहले

रोहन भाई, एकदम सही कहा। पंद्रह मिनट का रास्ता अगर आधे घंटे से एक घंटा बन जाए, तो अंडरपास अकेला क्या ही कर लेगा जब तक सड़क पर पुलिस नहीं दिखेगी।

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