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गुजरात में आरक्षण पर छिड़ा सियासी घमासान, शंकरसिंह वाघेला और बीजेपी नेता यज्ञेश दवे आमने-सामनेगुजरात
3 अक्तू॰ 2026, 7:26 pm (25 दिन पहले)· 6

गुजरात में आरक्षण पर छिड़ा सियासी घमासान, शंकरसिंह वाघेला और बीजेपी नेता यज्ञेश दवे आमने-सामने

आरक्षण के बचाव में शंकरसिंह वाघेला द्वारा मैला ढोने पर 50,000 रुपये मासिक देने की चुनौती पर बीजेपी नेता यज्ञेश दवे ने तीखा पलटवार किया है.

गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला की एक हालिया टिप्पणी को लेकर राज्य के सियासी गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई है. आरक्षण के समर्थन में बोलते हुए 86 वर्षीय नेता ने कहा कि यदि पटेल, बनिया या ब्राह्मण समुदाय के लोग मैला ढोने का काम करने को तैयार हों, तो वह उन्हें प्रति माह 50,000 रुपये देने के लिए तैयार हैं. उनके इस बयान पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने कड़ा एतराज जताया है और उन पर समाज में जातिगत वैमनस्य फैलाने का आरोप लगाया है.

सागबारा की जनसभा में वाघेला ने क्या कहा

नर्मदा जिले के आदिवासी बहुल इलाके सागबारा में 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर एक जनसभा आयोजित की गई थी. इस सभा को संबोधित करते हुए राज्यसभा के पूर्व सदस्य शंकरसिंह वाघेला ने आरक्षण समाप्त करने की वकालत करने वालों की कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि आरक्षण किसी की दया पर नहीं मिला है, बल्कि यह पीढ़ियों से झेले गए सामाजिक कष्टों के बदले मिला एक अर्जित अधिकार है.

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वाघेला ने आरक्षण का विरोध करने वाले वर्गों को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि यदि वे इन परिस्थितियों को समझना चाहते हैं, तो उन्हें मैला ढोने का कार्य करना होगा. उन्होंने कहा, “अगर आप मैला ढोने का काम करने को तैयार हैं, तो मैं आपको 50,000 रुपये मासिक वेतन दूंगा और इन लोगों का मल साफ करने का काम दूंगा.” वाघेला ने तर्क दिया कि जब तक कोई व्यक्ति आदिवासी समुदायों जैसी कठिन परिस्थितियों में नहीं रहेगा, तब तक उसे उनकी वास्तविक जमीनी सच्चाई का भान नहीं हो सकता. उन्होंने आरक्षण को ऐतिहासिक अन्याय की भरपाई का एक जरूरी जरिया बताया. यह बयान ऐसे राजनीतिक माहौल में आया है जब उनके दोबारा कांग्रेस पार्टी में शामिल होने को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं.

बीजेपी नेता यज्ञेश दवे का कड़ा पलटवार

वाघेला की इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा हमला बोला है. पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में गिने जाने वाले नेता यज्ञेश दवे ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि समाज में अलग-अलग जातियों और समुदायों के बीच कटुता या मतभेद पैदा करना पूरी तरह अनुचित है. उन्होंने याद दिलाया कि देश में मैला ढोने की प्रथा को कानूनन बहुत पहले ही समाप्त किया जा चुका है. दवे के अनुसार पिछली और वर्तमान सरकारों ने लगातार ऐसे कदम उठाए हैं जिससे वंचित वर्ग के लोग सम्मान और न्याय के साथ जीवन व्यतीत कर सकें.

दवे ने वाघेला को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि ब्राह्मण, पटेल और बनिया समुदायों को इस तरह पैसे देने की बात कहना आपत्तिजनक है. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा, “मेरा उन्हें संदेश है कि इस नेक काम की शुरुआत उन्हें अपने ही समुदाय से करनी चाहिए. आप खुद इसकी शुरुआत करें. मेरे घर का कचरा साफ करें, मैं आपको पांच लाख रुपये दूंगा.” दवे ने चेतावनी दी कि ब्राह्मण समुदाय को भड़काने वाले ऐसे बयानों को कतई नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और वाघेला को अपनी इस बयानबाजी के सियासी परिणामों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए.

सवाल-जवाब

शंकरसिंह वाघेला ने क्या बयान दिया था?
उन्होंने कहा कि अगर पटेल, बनिया या ब्राह्मण समुदाय के लोग मैला ढोने का काम करने को तैयार हों तो वह उन्हें 50,000 रुपये मासिक वेतन देंगे.
वाघेला ने यह टिप्पणी कब और कहां की?
उन्होंने 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के अवसर पर गुजरात के नर्मदा जिले के सागबारा में एक जनसभा में यह टिप्पणी की.
भाजपा नेता यज्ञेश दवे ने वाघेला को क्या चुनौती दी?
यज्ञेश दवे ने कहा कि वाघेला खुद इस काम की शुरुआत करें और उनके घर का कचरा साफ करने पर वह वाघेला को 5 लाख रुपये देंगे.
यज्ञेश दवे ने मैला ढोने की प्रथा पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
दवे ने कहा कि देश में मैला ढोने की प्रथा पहले ही खत्म की जा चुकी है और सरकारें वंचित वर्गों के सम्मानजनक जीवन के लिए काम कर रही हैं.
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टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·25 दिन पहले

गुजरात की राजनीति में हमेशा कुछ न कुछ नया तमाशा होता रहता है। बापू के इस बयान ने सचमुच माहौल गरमा दिया है, और यज्ञेश दवे का जवाब भी तुरंत आ गया।

Arjun Mehta@arjun-mehta·25 दिन पहले

बापूजी के जन्मदिन पर ऐसी बातें सुनकर बहुत बुरा लगा। चुनाव पास आते ही नेताओं को सिर्फ जातियां लड़ानी याद आती हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·25 दिन पहले

अर्जुन, आपकी बात सही है। पर क्या सच में किसी नेता के ऐसा कहने से चुनाव के समीकरण सचमुच बदल जाते हैं?

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

नेता लोग जनता को लड़ाने के लिए हर बात को जाति से क्यों जोड़ देते हैं? क्या चुनाव पास आते ही ऐसा बयान देना जरूरी हो जाता है?

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

करण भाई, बात सिर्फ चुनाव की नहीं है। वाघेला जी 86 साल के हैं, शायद उनका गुस्सा इतिहास की उस कड़वी सच्चाई को लेकर है जिसे लोग आज आसानी से भूल जाते हैं।

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