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गुलाबी नगरी में बप्पा की अगवानी की तैयारी पूरी, मोती डूंगरी के गणेश मंदिर में नौ दिन चलेगा गणेशोत्सव, 3 हजार किलो मोदकों की झांकी बनेगी खास आकर्षणराजस्थान
7 सित॰ 2026, 12:02 am (18 दिन पहले)· 1

गुलाबी नगरी में बप्पा की अगवानी की तैयारी पूरी, मोती डूंगरी के गणेश मंदिर में नौ दिन चलेगा गणेशोत्सव, 3 हजार किलो मोदकों की झांकी बनेगी खास आकर्षण

जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर में 7 से 15 सितंबर तक नौ दिवसीय गणेशोत्सव मनाया जाएगा, जिसमें 9 सितंबर को 3 हजार किलो मोदकों की झांकी और 14 सितंबर को भव्य जन्मोत्सव मुख्य आकर्षण होंगे.

राजस्थान की राजधानी जयपुर में इस बार गणेश चतुर्थी का पर्व बेहद भव्य रूप में मनाया जाने वाला है. शहर के प्रसिद्ध आराध्य देव मोती डूंगरी गणेश मंदिर में इस महोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं और मंदिर प्रबंधन के साथ-साथ भक्तों में भी गजानन महाराज के स्वागत को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. नौ दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त करेंगे.

9 दिन तक चलेगा उत्सव, फूलों-रोशनी से सजेगा मंदिर परिसर

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी महोत्सव 7 सितंबर से शुरू होकर 15 सितंबर तक यानी पूरे 9 दिनों तक चलेगा. इन नौ दिनों के दौरान मंदिर परिसर को फूलों और विद्युत रोशनी से दुल्हन की तरह सजाया जाएगा. हर दिन अलग-अलग झांकियां सजाई जाएंगी और कई धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे. इन नौ दिनों में पूरा जयपुर शहर बप्पा की भक्ति के रंग में रंगा नजर आएगा.

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14 सितंबर को जन्मोत्सव, विशेष पूजा-अभिषेक और हवन होगा

महोत्सव के दौरान 14 सितंबर की तारीख सबसे खास मानी जा रही है, क्योंकि इसी दिन गणपति महाराज का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा. इस अवसर पर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के साथ अभिषेक और हवन का आयोजन होगा. भगवान गणेश को नई पोशाक पहनाई जाएगी और खास श्रृंगार किया जाएगा. इस विशेष स्वरूप के दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

9 सितंबर: 3 हजार किलो मोदकों की झांकी, दो मोदक 251-251 किलो के

गणेशोत्सव के तीसरे दिन यानी 9 सितंबर को मंदिर परिसर में एक अनूठी झांकी सजाई जाएगी, जिसमें कुल 3 हजार किलो मोदक भगवान को अर्पित किए जाएंगे. इस विशाल मोदक-भोग में सबसे बड़ा आकर्षण दो विशेष मोदक होंगे, जिनका वजन 251-251 किलोग्राम रखा गया है. इन बड़े मोदकों को देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी श्रद्धालु मंदिर पहुंचेंगे. भगवान को अर्पित होने वाला यह महाभोग पहले से ही शहरभर में चर्चा का विषय बना हुआ है.

13 सितंबर सिंजारा: चांदी के सिंहासन पर विराजेंगे बप्पा, 3500 किलो मेहंदी लगेगी

गणेश चतुर्थी से ठीक एक दिन पहले, यानी 13 सितंबर को मंदिर में परंपरागत सिंजारा उत्सव मनाया जाएगा. इस दिन गणपति महाराज एक भव्य चांदी के सिंहासन पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देंगे. इस विशेष आयोजन के लिए करीब 3500 किलोग्राम मेहंदी का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे सिंजारे की रौनक और परंपरा दोनों और निखर उठेंगी.

19 घंटे से ज्यादा खुले रहेंगे मंदिर के पट, 15 सितंबर को निकलेगी शोभायात्रा

भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर के कपाट सामान्य से कहीं ज्यादा लंबे समय तक खुले रखे जाएंगे. इस दिन श्रद्धालु 19 घंटे से भी अधिक समय तक लगातार गजानन महाराज के दर्शन कर सकेंगे. इसके बाद महोत्सव के आखिरी दिन यानी 15 सितंबर को शाम 4 बजे गणपति महाराज की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी. यह शोभायात्रा शहर के कई प्रमुख मार्गों से गुजरेगी, जहां जगह-जगह पुष्प वर्षा कर बप्पा का स्वागत किया जाएगा. इस तरह यह नौ दिवसीय आयोजन जयपुरवासियों के लिए एक यादगार अनुभव साबित होगा.

सवाल-जवाब

मोती डूंगरी मंदिर में गणेशोत्सव कब से कब तक चलेगा?
यह उत्सव 7 सितंबर से 15 सितंबर तक, यानी कुल 9 दिनों तक चलेगा.
गणपति महाराज का जन्मोत्सव किस दिन मनाया जाएगा?
जन्मोत्सव 14 सितंबर को विशेष पूजा, अभिषेक और हवन के साथ मनाया जाएगा.
9 सितंबर को कौन-सी खास झांकी सजाई जाएगी?
9 सितंबर को 3 हजार किलो मोदकों की झांकी सजाई जाएगी, जिसमें दो मोदक 251-251 किलोग्राम के होंगे.
सिंजारा उत्सव कब मनाया जाएगा और इसकी क्या खासियत है?
सिंजारा 13 सितंबर को मनाया जाएगा, जब गणपति महाराज चांदी के सिंहासन पर विराजेंगे और करीब 3500 किलोग्राम मेहंदी का उपयोग होगा.
गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर कितने घंटे खुला रहेगा?
गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर के पट 19 घंटे से अधिक समय तक खुले रहेंगे.
शोभायात्रा कब और किस समय निकलेगी?
शोभायात्रा 15 सितंबर को शाम 4 बजे निकलेगी और शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेगी.
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टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·18 दिन पहले

मोती डूंगरी गणेश मंदिर के इस भव्य आयोजन का पैमाना सांस्कृतिक पर्यटन के लिहाज़ से बहुत बड़ा है। 3 हजार किलो मोदक और 3500 किलो मेहंदी के उपयोग जैसे अनूठे विवरण न केवल स्थानीय भक्ति को दर्शाते हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सांस्कृतिक उत्सवों के लाइव प्रसारण और ट्रैवल व्लॉगिंग के बढ़ते रुझान को भी बढ़ावा देते हैं। ऐसे मेगा-इवेंट्स अब धार्मिक आस्था से आगे बढ़कर फेस्टिव इकॉनमी और रीजनल टूरिज्म को एक बड़ा बूस्ट देने लगे हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·18 दिन पहले

मोती डूंगरी के इस विशाल आयोजन में धार्मिक आस्था के साथ-साथ जयपुर के पर्यटन और स्थानीय आर्थिकी को भी बड़ा बढ़ावा मिलने की पूरी संभावना है। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही से जहाँ परिवहन, आतिथ्य और लघु व्यापार क्षेत्र में आर्थिक गतिशीलता आएगी, वहीं यह भव्यता सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक सद्भाव को भी मजबूत करती है।

Ravikash Gupta@ravikash·18 दिन पहले

मोती डूंगरी के इस आयोजन से स्थानीय आर्थिकी में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिलेगा। पर्यटन सीजन की इस शानदार शुरुआत से होटल, परिवहन और हस्तशिल्प जैसे क्षेत्रों में भारी नकदी प्रवाह होगा, जो छोटे कारोबारियों और स्थानीय वेंडर्स के लिए आय का एक मजबूत जरिया बनेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

मोती डूंगरी के इस आयोजन में जिस पैमाने पर 3 हजार किलो मोदक और 3500 किलो मेहंदी का उपयोग हो रहा है, वह स्पष्ट करता है कि यह उत्सव केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गुलाबी नगरी की आर्थिकी, पर्यटन और बड़े पैमाने पर जन-प्रबंधन की एक बहुत बड़ी परीक्षा भी है। इस तरह के आयोजनों के दौरान 19 घंटे तक कपाट खुले रखने से जिला प्रशासन और पुलिस तंत्र पर सुरक्षा तथा यातायात नियंत्रण का भारी दबाव रहेगा, जिससे यह देखना अहम होगा कि जयपुर प्रशासन इस भारी भीड़ को कैसे संभालता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·18 दिन पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए एक क्राइम रिपोर्टर के रूप में मेरा मानना है कि मोती डूंगरी मंदिर में 19 घंटे तक कपाट खुले रहने और लाखों श्रद्धालुओं के उमड़ने पर कानून-व्यवस्था और क्राउड मैनेजमेंट सबसे बड़ी चुनौती होगी। 3500 किलो मेहंदी और 3 हजार किलो मोदक जैसी विशाल सामग्री के वितरण, भारी भीड़ में भगदड़ रोकने, वीवीआईपी मूवमेंट और सुचारू यातायात के लिए पुलिस को अतिरिक्त जाब्ता तैनात करना होगा। ऐसे आयोजनों में खुफिया तंत्र और एंटी-सबोटेज चेकिंग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है ताकि सुरक्षा में कोई चूक न हो।

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