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ग्यारह साल की मासूम को बनाया हवस का शिकार, बिलासपुर कोर्ट ने सौतेले पिता को सुनाई मरते दम तक जेल की सजाछत्तीसगढ़
24 जून 2026, 11:54 am (35 दिन पहले)· 2

ग्यारह साल की मासूम को बनाया हवस का शिकार, बिलासपुर कोर्ट ने सौतेले पिता को सुनाई मरते दम तक जेल की सजा

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में एक सौतेले पिता ने अपनी 11 साल की बेटी से दुष्कर्म कर उसे गर्भवती कर दिया। विशेष पॉक्सो कोर्ट ने दोषी को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा और पीड़िता को सात लाख रुपये मुआवजे की सिफारिश की है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने पिता और बेटी के सबसे भरोसेमंद रिश्ते की मर्यादा को शर्मसार कर दिया। एक सौतेले पिता ने अपनी ही 11 साल की मासूम बेटी को हवस का शिकार बनाया और उसे गर्भवती कर दिया। अब बिलासपुर की विशेष पॉक्सो अदालत ने इस दरिंदे को सबसे कड़ी सजा सुनाते हुए कहा है कि वह जिंदगी की आखिरी सांस तक जेल की सलाखों के पीछे रहेगा।

अपर सत्र न्यायाधीश पूजा जायसवाल की अदालत ने फैसला सुनाते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने साफ कहा कि यह कोई मामूली अपराध नहीं है, बल्कि एक मासूम बच्ची के भरोसे और उसके संवैधानिक व सामाजिक संरक्षण के अधिकार पर सीधा हमला है। अदालत ने इस घिनौने कृत्य को पूरी तरह अक्षम्य मानते हुए दोषी से पीड़िता को सात लाख रुपये मुआवजा दिलाने की मजबूत सिफारिश भी की, ताकि यह रकम बच्ची के पुनर्वास और उसकी मदद में काम आ सके।

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कोरोना काल में टूटा परिवार, फिर हुआ ‘चूड़ी विवाह’

इस केस की शुरुआत वहां से होती है, जब पीड़िता की मां का पहला पति कोरोना काल के मुश्किल दौर में उसे और उसकी छोटी बच्ची को बेसहारा छोड़कर चला गया। अकेली पड़ी इस महिला के सामने अपनी और बेटी की जिंदगी चलाने की चुनौती थी। ऐसे में उसने समाज के रिवाज के मुताबिक आरोपी के साथ ‘चूड़ी विवाह’ कर लिया। इसके बाद दोनों एक ही घर में पति-पत्नी की तरह रहने लगे।

मुंबई में अकेला पाकर की दरिंदगी

परिवार चलाने और रोजी-रोटी के लिए आरोपी इस महिला और उसकी 11 साल की बेटी को लेकर मुंबई चला गया। वहां वह एक निर्माणाधीन तीन मंजिला इमारत में सुरक्षा गार्ड का काम करने लगा। एक दिन जब उसकी पत्नी घर पर नहीं थी, तो मौके का फायदा उठाकर उसने मासूम बच्ची के साथ जबरदस्ती की और दुष्कर्म किया। इसके बाद उसने एक नहीं, कई बार हैवानियत की हदें पार कीं।

आयुष्मान सर्वे में खुला राज

दिसंबर के महीने में जब यह परिवार मुंबई से लौटकर छत्तीसगढ़ के अपने गांव रतनपुर पहुंचा, तब सरकार की ओर से चल रहे आयुष्मान सर्वे के दौरान स्थानीय मितानिन स्मृति गोपाल की नजर बच्ची के काफी फूले हुए पेट पर पड़ी। उन्होंने तुरंत बच्ची की मां को इसकी जानकारी दी और बिना देर किए बड़े अस्पताल ले जाने की सलाह दी।

मितानिन की बात मानकर महिला अपनी बच्ची को लेकर सिम्स अस्पताल पहुंची। वहां डॉक्टरों ने सोनोग्राफी की, तो रिपोर्ट ने सबको हिला दिया। पता चला कि 11 साल की वह मासूम बच्ची आठ महीने की गर्भवती है।

DNA रिपोर्ट ने पकड़ा असली गुनहगार

शुरुआत में महिला ने लोकलाज के डर से नशेड़ी युवकों पर दुष्कर्म का शक जताया था। लेकिन इस केस की जांच कर रहे तत्कालीन रतनपुर थाना प्रभारी रजनीश सिंह को उसके बयान पर पूरा भरोसा नहीं हुआ। उनका शक सीधे घर के भीतर रहने वाले सौतेले पिता पर गया। पुलिस ने बच्ची और उसके सौतेले पिता का DNA सैंपल लिया, जो नवजात शिशु से शत-प्रतिशत मैच कर गया। इसी अहम सबूत के सामने आते ही आरोपी का घिनौना जुर्म अदालत में पूरी तरह साबित हो गया।

सवाल-जवाब

बिलासपुर कोर्ट ने दोषी को क्या सजा सुनाई?
विशेष पॉक्सो अदालत ने सौतेले पिता को आखिरी सांस तक जेल में रहने की सजा सुनाई है।
पीड़िता को कितना मुआवजा मिलेगा?
अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास और मदद के लिए सात लाख रुपये मुआवजे की सिफारिश की है।
बच्ची की उम्र कितनी थी और मामला कैसे खुला?
बच्ची 11 साल की थी। रतनपुर में आयुष्मान सर्वे के दौरान मितानिन स्मृति गोपाल ने उसके फूले पेट को देखकर मां को सतर्क किया, जिसके बाद मामला सामने आया।
बच्ची कितने महीने की गर्भवती निकली?
सिम्स अस्पताल में हुई सोनोग्राफी में पता चला कि बच्ची आठ महीने की गर्भवती है।
आरोपी की पहचान कैसे हुई?
तत्कालीन रतनपुर थाना प्रभारी रजनीश सिंह को शक हुआ और पुलिस ने बच्ची व सौतेले पिता का DNA सैंपल लिया, जो नवजात से शत-प्रतिशत मैच हो गया।
मां और आरोपी के बीच क्या रिश्ता था?
कोरोना काल में पहला पति छोड़कर चले जाने के बाद महिला ने आरोपी के साथ ‘चूड़ी विवाह’ किया था और दोनों एक ही घर में रहते थे।
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