भारतीय वायुसेना के बेड़े की ताकत बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी एचएएल ने स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमान एलसीए एमके-1ए की आपूर्ति को लेकर नया खाका तैयार किया है। देश की रक्षा तैयारियों के लिहाज से यह विमान बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि वायुसेना के सामने वर्तमान में लड़ाकू विमानों के स्क्वाड्रन की संख्या घटने की चुनौती बनी हुई है। पड़ोसी देशों की सीमाओं पर लगातार बढ़ रही सुरक्षा चिंताओं के बीच दो मोर्चों पर युद्ध जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भारतीय वायुसेना को बड़ी संख्या में आधुनिक विमानों की जरूरत है। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए सरकार ने देश में ही अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को विकसित करने के साथ-साथ फ्रांस से राफेल विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी है।
उत्पादन और डिलीवरी से जुड़ी ताजा स्थिति
हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक रवि के. ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि इस वर्ष के अंत तक भारतीय वायुसेना को पहले एलसीए एमके-1ए विमान सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। विमान में लगे रडार से जुड़ी कुछ तकनीकी खामियों और हथियारों के एकीकरण के परीक्षणों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इन छोटी-मोटी अड़चनों को दूर करने के लिए लगभग एक महीने का समय तय किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक रडार संबंधी कुछ अंतिम सुधार और वेपन सिस्टम के ट्रायल का काम अभी चल रहा है। ये सभी चरण पूरे होने के बाद विमानों को सेना को सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया जाएगा।
विशाल अनुबंध और विमानों की संख्या
भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े को नया विस्तार देने के लिए कुल 180 एलसीए एमके-1ए विमानों का बड़ा सौदा किया गया है, जिनकी अनुमानित कुल लागत करीब 1.1 लाख करोड़ रुपये है। इस योजना के तहत पहला समझौता फरवरी 2021 में 83 विमानों के लिए हुआ था, जबकि सितंबर 2025 में 97 और अतिरिक्त विमानों का दूसरा बड़ा अनुबंध किया गया। एचएएल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान लगभग 10 एमके-1ए विमानों की आपूर्ति करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कंपनी को जीई एयरोस्पेस से अब तक 10 इंजन प्राप्त हो चुके हैं, जबकि कुल 27 विमानों के एयरफ्रेम पहले से ही तैयार अवस्था में रखे हुए हैं। उपलब्ध इंजनों की संख्या को आधार बनाते हुए शुरुआती 10 विमानों की डिलीवरी तय समय पर की जा सकेगी।
उत्पादन और इंजन आपूर्ति की चुनौतियां
इस पूरे कार्यक्रम को अपनी शुरुआती समयसीमा के मुकाबले कुछ देरी का सामना करना पड़ा है। वर्ष 2021 के पहले अनुबंध के तहत पहले बैच के विमानों की आपूर्ति मार्च 2024 तक हो जानी चाहिए थी, लेकिन जीई एयरोस्पेस द्वारा एफ404-इन20 इंजनों की आपूर्ति समय पर न होने और जरूरी प्रमाणन प्रक्रियाओं में विलंब होने के कारण यह लक्ष्य पीछे छूट गया। इसके बावजूद एचएएल ने अपनी उत्पादन रणनीति जारी रखी है और इंजनों की अनुपस्थिति में भी एयरफ्रेम का निर्माण लगातार किया जा रहा है ताकि इंजन मिलते ही विमानों को तुरंत जोड़ा जा सके। कंपनी की मौजूदा विनिर्माण क्षमता हर साल 24 एमके-1ए विमान तैयार करने की है और यदि इंजनों की आपूर्ति बिना किसी बाधा के मिलती रही, तो मौजूदा अनुबंध को तीन से चार साल की अवधि में पूरा किया जा सकता है।
स्वदेशी तकनीक और भविष्य की तैयारियां
वर्ष 2025 में किए गए 97 अतिरिक्त विमानों के अनुबंध में देश में ही निर्मित उपकरणों की हिस्सेदारी को और अधिक बढ़ाने की योजना पर काम चल रहा है। इन नए विमानों में अत्याधुनिक स्वदेशी उत्तम एईएसए रडार और स्वयम् रक्षा कवच जैसे उन्नत इलेक्ट्रॉनिक युद्धक प्रणालियों को शामिल किया जाएगा। कंपनी के अनुसार पहले 83 विमानों में उपयोग होने वाले लगभग 40 आयातित तंत्रों को दूसरे चरण के ऑर्डर के दौरान पूरी तरह स्वदेशी विकल्पों से बदल दिया जाएगा। इसके साथ ही, अधिक उन्नत संस्करण एलसीए एमके-2 का विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहा है, जिसका ढांचा तैयार होने के बाद इसके प्रमुख हिस्सों को आपस में जोड़ा जा चुका है और मार्च 2027 तक इसके पहले ग्राउंड रन तथा उसी वर्ष पहली उड़ान का लक्ष्य रखा गया है।
















