राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत और लोक संस्कृति को अकादमिक स्तर पर स्थापित करने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। इस दिशा में संस्थान के भीतर जल्द ही राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र की स्थापना की जाएगी। इस योजना का प्रस्ताव आगामी बैठकों में एकेडमिक काउंसिल के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, जहाँ से हरी झंडी मिलते ही इसे धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ाई जाएगी।
शोध और अध्ययन को मिलेगा नया मंच
इस नए केंद्र के अस्तित्व में आने से विद्यार्थियों और शोधार्थियों को राजस्थानी भाषा, साहित्य, पारंपरिक लोकगीतों और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े विषयों पर गहराई से अध्ययन करने का अवसर प्राप्त होगा। शेखावाटी क्षेत्र अपनी प्राचीन हवेलियों, अनूठी बोलियों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए वैश्विक स्तर पर जाना जाता है। इस प्रकार के अकादमिक मंच के माध्यम से इन तमाम क्षेत्रीय विशेषताओं को दस्तावेजी रूप में सहेजने और संरक्षित करने में बहुत मदद मिलेगी।
भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ाव
विश्वविद्यालय परिसर में पहले से ही भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र का संचालन किया जा रहा है। अब राजस्थानी भाषा अध्ययन केंद्र के खुलने से स्थानीय ज्ञान और लोक साहित्य को संस्थागत रूप से आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा। दोनों केंद्र मिलकर पारंपरिक ज्ञान, लोक कला और सांस्कृतिक सामग्रियों के दस्तावेजीकरण और संरक्षण की दिशा में मिलकर काम करेंगे, जिससे आने वाली पीढ़ियों को अकादमिक लाभ मिल सके।
राजभवन के निर्देशों का पालन
उल्लेखनीय है कि उच्च शिक्षा और शोध कार्यों में राजस्थानी भाषा को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रदेश के कुल 11 प्रमुख विश्वविद्यालयों में इस तरह के केंद्र खोले जाने का प्रावधान है। राज्यपाल और कुलाधिपति हरिभाऊ बागड़े की विशेष पहल और निर्देशों के बाद राजभवन सचिवालय ने सभी संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को इस संबंध में औपचारिक पत्र जारी कर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
भाषा और संस्कृति का गहरा नाता
राजस्थानी भाषा केवल आपसी संवाद का जरिया भर नहीं है, बल्कि इसके साथ इस आंचल की लोक कथाएं, लोक परंपराएं, रीति-रिवाज और पीढ़ियों पुरानी स्मृतियां भी गहराई से जुड़ी हुई हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर इन विषयों की पढ़ाई शुरू होने से छात्र इन सभी पहलुओं को क्रमबद्ध और वैज्ञानिक तरीके से समझ सकेंगे। रामसिंह सरावग (उपकुलसचिव, शेखावाटी विश्वविद्यालय) ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि केंद्र की स्थापना की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे अकादमिक जगत में स्थानीय संस्कृति को उचित स्थान मिलेगा।


















