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हरियाणा में 30 हजार रुपये घूस लेते धरी गईं असिस्टेंट DGFT हेमलता हेडाऊ, CBI की रेड में पकड़ाया रेल अधिकारी भीहरियाणा
20 अग॰ 2026, 12:16 am (33 दिन पहले)· 2

हरियाणा में 30 हजार रुपये घूस लेते धरी गईं असिस्टेंट DGFT हेमलता हेडाऊ, CBI की रेड में पकड़ाया रेल अधिकारी भी

पानीपत में EPCG फाइल क्लियर करने के एवज में 30 हजार रुपये रिश्वत मांगने पर सीबीआई ने असिस्टेंट DGFT हेमलता हेडाऊ को गिरफ्तार कर लिया। एजेंसी ने छत्तीसगढ़ में रेलवे इंजीनियर के पास से 77 लाख कैश भी बरामद किया है।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हरियाणा के पानीपत में विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) कार्यालय में तैनात असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल हेमलता हेडाऊ को 30 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जारी इस कार्रवाई के तहत सीबीआई ने अधिकारी को उस वक्त पकड़ा जब वह एक कारोबारी की लंबित फाइल को आगे बढ़ाने के एवज में रिश्वत की रकम ले रही थीं। इसके साथ ही केंद्रीय जांच एजेंसी ने हाल के दिनों में भारतीय रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा है, जहां भिलाई में पदस्थ सीनियर इंजीनियर के परिसरों से 77 लाख रुपये नकद और 14 लाख रुपये के सोने के आभूषण बरामद किए गए थे।

पानीपत में असिस्टेंट DGFT के खिलाफ सीबीआई का ट्रैप ऑपरेशन

सीबीआई द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के मुताबिक पानीपत स्थित संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशालय के दफ्तर में पदस्थ असिस्टेंट DGFT हेमलता हेडाऊ के खिलाफ 19 अगस्त 2026 को भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला पंजीकृत किया गया था। आरोप है कि शिकायतकर्ता के क्लाइंट ने एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल Goods (EPCG) योजना के तहत ऑथराइजेशन के लिए आवेदन किया था। इस फाइल में दर्ज कुछ तकनीकी कमियों को दूर करने और ऑथराइजेशन जारी करने की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए महिला अधिकारी ने 30 हजार रुपये की अवैध मांग रखी थी।

शिकायत मिलने के बाद जांच एजेंसी ने मामले का सत्यापन किया और 19 अगस्त को ही पानीपत में एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी अधिकारी को 30 हजार रुपये की रिश्वत सौंपी, सीबीआई की टीम ने हेमलता हेडाऊ को मौके पर ही धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद सीबीआई अधिकारियों ने पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में आरोपी को पेश करने की प्रक्रिया शुरू की। इसके साथ ही एजेंसी की टीमों ने पानीपत और पंचकूला स्थित अधिकारी के आवास एवं दफ्तरी ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया ताकि भ्रष्टाचार से जुड़े अन्य दस्तावेजों और संपत्तियों का सुराग हासिल किया जा सके।

क्या है EPCG योजना और किस काम के बदले मांगी गई थी रिश्वत

एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल Goods यानी EPCG केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण व्यापारिक प्रोत्साहन व्यवस्था है। इस योजना के जरिए भारत से माल और सेवाओं का निर्यात करने वाले उत्पादक या कंपनियां बिना सीमा शुल्क दिए अथवा रियायती शुल्क पर गुणवत्तापूर्ण पूंजीगत सामान और आधुनिक मशीनरी का आयात कर सकती हैं। बदले में संबंधित कंपनियों को तय समय सीमा के भीतर आयातित मशीनरी के मूल्य का छह गुना निर्यात लक्ष्य पूरा करना होता है।

व्यापारियों और निर्यातकों के लिए EPCG ऑथराइजेशन हासिल करना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इसके बिना सीमा शुल्क छूट का लाभ नहीं मिलता। आरोप है कि इसी महत्वपूर्ण मंजूरी से जुड़ी फाइल में त्रुटि सुधारने और उसे स्वीकृत करने के नाम पर असिस्टेंट DGFT हेमलता हेडाऊ ने 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। सीबीआई के अधिकारियों का कहना है कि फाइल रोकने और जानबूझकर बाधाएं खड़ी करने वाले लोक सेवकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

छत्तीसगढ़ के भिलाई में रेलवे के सीनियर DME पर भी सीबीआई का शिकंजा

सरकारी विभागों में जारी घूसखोरी पर प्रहार करते हुए सीबीआई ने इससे ठीक पहले छत्तीसगढ़ में भी एक बड़े रेल अधिकारी को रिश्वतखोरी के मामले में सलाखों के पीछे भेजा। साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे (SECR) भिलाई में पदस्थ इंडियन रेलवे सर्विस ऑफ मैकेनिकल इंजीनियर्स (IRSME) कैडर के सीनियर डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियर (DME) पर ठेकेदार के लंबित बिलों का भुगतान करने के बदले भारी रकम मांगने का आरोप लगा था।

सीबीआई में 13 अगस्त 2026 को दर्ज शिकायत के अनुसार सीनियर DME ने ठेकेदार से 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। बाद में बातचीत के दौरान अधिकारी 1 लाख रुपये लेने पर राजी हो गया था। सीबीआई ने 13 अगस्त को ही भिलाई में जाल बिछाया और अधिकारी को रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 50 हजार रुपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। जांच में सामने आया कि यह रकम अधिकारी के निर्देश पर एक बिचौलिए के माध्यम से हासिल की गई थी।

छापेमारी में मिला 77 लाख कैश और 14 लाख के जेवरात

रेल अधिकारी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई की कई टीमों ने उसके रायपुर और भिलाई स्थित रिहाइशी मकानों तथा प्रशासनिक कार्यालयों पर एक साथ छापेमारी की। इस गहन तलाशी के दौरान सीबीआई को अलमारियों और ठिकानों से लगभग 77 लाख रुपये की अघोषित नकदी बरामद हुई। इसके अतिरिक्त लगभग 14 लाख रुपये मूल्य के सोने और चांदी के कीमती आभूषण भी जब्त किए गए। साक्ष्यों के आधार पर सीबीआई ने 14 अगस्त 2026 को आरोपी सीनियर DME को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।

इसके अलावा सीबीआई ने राजस्थान में उत्तर पश्चिम रेलवे से जुड़े एक अन्य घूसखोरी मामले में भी 5 रेलवे अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अधिकारियों का कहना है कि चाहे विदेश व्यापार विभाग हो या भारतीय रेलवे, सार्वजनिक सेवाओं के बदले रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी।

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सवाल-जवाब

सीबीआई ने पानीपत में किस अधिकारी को गिरफ्तार किया है?
सीबीआई ने पानीपत स्थित संयुक्त विदेश व्यापार महानिदेशालय कार्यालय में पदस्थ असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (असिस्टेंट DGFT) हेमलता हेडाऊ को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है।
हेमलता हेडाऊ पर कितने रुपये रिश्वत मांगने का आरोप है?
उन पर शिकायतकर्ता के क्लाइंट की EPCG ऑथराइजेशन फाइल में दर्ज कमी दूर करने और प्रक्रिया आगे बढ़ाने के एवज में 30,000 रुपये रिश्वत मांगने का आरोप है।
EPCG योजना क्या होती है?
एक्सपोर्ट प्रमोशन कैपिटल Goods (EPCG) योजना के तहत निर्यात से जुड़े कारोबारी और कंपनियां बिना सीमा शुल्क दिए या रियायती दर पर पूंजीगत सामान और मशीनरी का आयात कर सकती हैं।
छत्तीसगढ़ में रेलवे अधिकारी के ठिकानों से क्या बरामद हुआ?
सीबीआई ने भिलाई में पदस्थ सीनियर डिविजनल मैकेनिकल इंजीनियर के आवास और कार्यालय से लगभग 77 लाख रुपये नकद और 14 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात बरामद किए।
सीबीआई गिरफ्तार आरोपी अधिकारी को किस अदालत में पेश करेगी?
सीबीआई आरोपी असिस्टेंट DGFT हेमलता हेडाऊ को पंचकूला की नामित सीबीआई अदालत में पेश करेगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·33 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि किस तरह प्रशासनिक स्तर पर लालफीताशाही और अनुपालन प्रक्रियाएं भ्रष्टाचार को जन्म देती हैं। जब विदेश व्यापार जैसी संवेदनशील व्यवस्थाओं में फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए रिश्वत की मांग की जाती है, तो यह सीधे तौर पर व्यापार सुगमता और आर्थिक विकास को बाधित करता है। यूरोपीय संदर्भ में भी ऐसी संस्थागत कमियों से निपटने के लिए पारदर्शी डिजिटल प्रणालियों और कड़ी जवाबदेही पर जोर दिया जाता है, ताकि व्यापारिक प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ वास्तविक निर्माताओं तक पारदर्शी तरीके से पहुंच सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·33 दिन पहले

सरकारी योजनाओं में इस तरह की रिश्वतखोरी व्यापार सुगमता दावों की हकीकत उजागर करती है। ईपीसीजी जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में फाइलें अटकाकर अवैध वसूली से निर्यातकों का मनोबल गिरता है। देश में प्रशासनिक जवाबदेही और सुधारों के बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार और बड़े पैमाने पर नकद बरामदगी गंभीर चिंता का विषय है।

Ravikash Gupta@ravikash·33 दिन पहले

व्यापार सुगमता के मोर्चे पर ऐसे मामले भारत के आर्थिक और निर्यात परिदृश्य की साख को सीधा नुकसान पहुंचाते हैं। जब ईपीसीजी जैसी योजनाओं में प्रशासनिक स्तर पर अड़ंगे लगाकर उगाही की जाती है, तो देश के लघु और मध्यम निर्यातक प्रभावित होते हैं। वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में प्रतिस्पर्धा के इस दौर में वित्तीय लेन-देन और कागजी मंजूरियों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। इस तरह के मामलों से विदेशी निवेशकों और वैश्विक खरीदारों के बीच देश की व्यापारिक व्यवस्था की छवि पर असर पड़ता है, जिससे व्यापारिक लागत और समय दोनों बढ़ जाते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·33 दिन पहले

यह मामला व्यापारिक नीतियों और सरकारी तंत्र के बीच की उस कमजोरी को उजागर करता है जहाँ ईपीसीजी जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ देने के नाम पर लालफीताशाही का फायदा उठाया जाता है। सीबीआई द्वारा पानीपत में की गई यह त्वरित कार्रवाई और साथ ही छत्तीसगढ़ में रेलवे के एक इंजीनियर के यहाँ से करोड़ों की नकदी बरामद होना इस बात का संकेत है कि केंद्रीय एजेंसियां अब भ्रष्टाचार के ऐसे मामलों में वित्तीय ट्रेल और संपत्तियों की गहन जांच को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है।

Rohan Verma@rohan-verma·33 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे तकनीकी प्रक्रियाओं और फाइलों के निस्तारण में जानबूझकर देरी कर छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों का उत्पीड़न किया जाता है। ईपीसीजी जैसी योजनाएं निर्यात को बढ़ावा देने के लिए हैं, लेकिन स्थानीय स्तर पर बैठे अधिकारी नियमों की आड़ में इनका दुरुपयोग कर अवैध वसूली का जरिया बना लेते हैं। इस तरह के मामलों में केवल घूस लेने वाले अधिकारी पर कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की समीक्षा भी जरूरी है जो ऐसी लालफीताशाही को बढ़ावा देती है ताकि भविष्य में व्यापारियों को दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।

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