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हिमाचल के नाहन में उफनती रुण नदी के बीच 5 घंटे फंसे रहे दो लोग, वायु सेना के हेलीकॉप्टर और NDRF ने ऐसे बचाई जानहिमाचल प्रदेश
2 सित॰ 2026, 8:48 am (20 दिन पहले)· 2

हिमाचल के नाहन में उफनती रुण नदी के बीच 5 घंटे फंसे रहे दो लोग, वायु सेना के हेलीकॉप्टर और NDRF ने ऐसे बचाई जान

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में भारी बारिश के बाद रुण नदी में आई बाढ़ में एक बुजुर्ग और उन्हें बचाने गया युवक 5 घंटे तक फंसे रहे, जिन्हें बाद में वायु सेना के हेलीकॉप्टर और एनडीआरएफ की टीमों ने सुरक्षित निकाला।

हिमाचल प्रदेश में मानसून की तेज बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं। मंगलवार को सिरमौर जिले के नाहन विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाले बर्मा पापड़ी इलाके में रुण नदी में आई अचानक बाढ़ के कारण एक बेहद चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा। यहां रुण नदी के तेज बहाव के बीच बने एक छोटे टापू पर एक बुजुर्ग और उन्हें बचाने गए स्थानीय युवा करीब 5 घंटे तक मौत के साये में फंसे रहे। देर रात करीब 9 बजे भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और होमगार्ड के जवानों के संयुक्त प्रयासों से दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

भैंसों को बचाने गए बुजुर्ग और उनकी मदद में उतरा साहसी युवा

घटनाक्रम के अनुसार, बर्मा पापड़ी के स्थानीय निवासी बनारसी दास मंगलवार को अपने मवेशियों (भैंसों) को चरने के बाद नदी क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रुण नदी के पास गए थे। इसी दौरान पहाड़ी इलाकों में हुई भारी बारिश की वजह से नदी का जलस्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ गया। पानी के प्रचंड वेग के कारण बनारसी दास नदी के बीचोबीच बने एक टापू पर फंस गए। उन्हें संकट में देखकर जल शक्ति विभाग में कार्यरत स्थानीय युवा अंशुल ने बिना अपनी जान की परवाह किए नदी में छलांग लगा दी। अंशुल बुजुर्ग बनारसी दास को सुरक्षित तट तक लाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि वे खुद भी बुजुर्ग के साथ उसी टापू पर फंस गए।

बहाव के कारण जमीनी प्रयास विफल, वायु सेना से ली गई मदद

स्थानीय लोगों द्वारा घटना की सूचना दिए जाने के तुरंत बाद पुलिस, होमगार्ड और एनडीआरएफ की टीमें राहत सामग्री तथा रेस्क्यू उपकरणों के साथ मौके पर पहुंचीं। हालांकि, रुण नदी में पानी का बहाव इतना तेज था कि नाव या रस्सियों के सहारे टापू तक पहुंचना बेहद खतरनाक साबित हो रहा था। जमीनी टीमों द्वारा रेस्क्यू करने में असमर्थ रहने के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने राज्य के मुख्यमंत्री कार्यालय से संपर्क साधा। इसके पश्चात भारतीय वायु सेना से आपातकालीन हेलीकॉप्टर सेवा की मांग की गई। सूचना मिलते ही वायु सेना का एक हेलीकॉप्टर तुरंत मौके पर पहुंचा और उफनती नदी के ऊपर मंडराते हुए बुजुर्ग बनारसी दास को सुरक्षित एयरलिफ्ट कर लिया।

एनडीआरएफ का सफल अभियान और प्रशासनिक तालमेल

बुजुर्ग को एयरलिफ्ट किए जाने के कुछ समय बाद नदी के जलस्तर और बहाव में थोड़ी कमी दर्ज की गई। इसका फायदा उठाते हुए एनडीआरएफ और होमगार्ड के जांबाज जवानों ने नदी में उतरकर जल शक्ति विभाग के कर्मचारी अंशुल का सुरक्षित रेस्क्यू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल भी मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने प्रशासन और मुख्यमंत्री कार्यालय से लगातार समन्वय बनाए रखा ताकि रेस्क्यू टीम को सहायता मिल सके। इस घटना का एक वीडियो और विवरण X पोस्ट के माध्यम से भी साझा किया गया, जिसमें युवा अंशुल की बहादुरी की जमकर सराहना की गई। रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद डॉ. बिंदल ने वीडियो कॉल के जरिए स्थानीय ग्रामीणों की बातचीत मुख्यमंत्री से करवाई, जहां ग्रामीणों ने राहत दल और राज्य सरकार का आभार व्यक्त किया।

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सवाल-जवाब

यह हादसा हिमाचल प्रदेश के किस जिले और नदी में हुआ?
यह हादसा हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की नाहन विधानसभा के अंतर्गत बर्मा पापड़ी स्थित रुण नदी में हुआ।
रुण नदी की बाढ़ में कौन-कौन से दो लोग फंस गए थे?
इस घटना में स्थानीय बुजुर्ग बनारसी दास और उन्हें बचाने गए जल शक्ति विभाग के युवा कर्मचारी अंशुल फंस गए थे।
रेस्क्यू ऑपरेशन में किन एजेंसियों और बलों ने भाग लिया?
रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय वायु सेना के हेलीकॉप्टर, एनडीआरएफ, होमगार्ड और स्थानीय पुलिस के जवानों ने भाग लिया।
दोनों लोग नदी में कितने समय तक फंसे रहे?
दोनों लोग लगभग 5 घंटे तक उफनती रुण नदी के बीच बने टापू पर फंसे रहे, जिसके बाद उन्हें सुरक्षित निकाला गया।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

यह घटना आपदा प्रबंधन और अंतर-एजेंसी समन्वय की एक मजबूत मिसाल पेश करती है, जहां स्थानीय प्रशासन, एनडीआरएफ और वायु सेना ने समय रहते त्वरित कार्रवाई की। हालांकि, ऐसे पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ (फ्लैश फ्लड) से निपटने के लिए संवेदनशील नदी क्षेत्रों में शुरुआती चेतावनी प्रणाली (प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली) और स्थानीय स्तर पर त्वरित प्रतिक्रिया दलों को और अधिक मजबूत किए जाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में मवेशियों को बचाने या अन्य कारणों से नदी पार करने वाले नागरिकों की जान जोखिम में न पड़े।

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे अचानक आने वाली बाढ़ पहाड़ी क्षेत्रों में जनजीवन को पलभर में खतरे में डाल सकती है। जिला प्रशासन और वायु सेना की त्वरित प्रतिक्रिया ने एक बड़ा हादसा टाल दिया, लेकिन इस तरह के मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि स्थानीय स्तर पर रिवरबेड्स के पास निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए ताकि मवेशियों या अन्य कारणों से नदी पार करने वाले लोग असमय संकट में न फंसें।

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