मध्य प्रदेश और दक्षिण भारत के बीच आवाजाही करने वाले यात्रियों और कारोबारियों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। इंदौर से हैदराबाद को आपस में जोड़ने वाले 743 किलोमीटर लंबे इकोनॉमिक ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण तेजी से पूरा किया जा रहा है। लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली यह विशाल सड़क परियोजना मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से होकर गुजरेगी। इस आधुनिक फोर-लेन एक्सप्रेसवे के बन जाने से न केवल तीन राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच कनेक्टिविटी को एक नया आयाम मिलेगा, बल्कि खरगोन जिले में औद्योगिक विकास, व्यापार और रोजगार के नए अवसरों का बड़ा मार्ग प्रशस्त होगा।
यात्रा समय में भारी कटौती और 20 शहरों को बड़ा फायदा
वर्तमान समय में इंदौर से तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद तक सड़क मार्ग से जाने में करीब 16 घंटे से भी अधिक का समय लग जाता है। लेकिन इस नए एक्सप्रेसवे के चालू होते ही यह लंबी दूरी महज 7 घंटे के आसपास पूरी की जा सकेगी। यानी यात्रियों के समय में लगभग 9 घंटे की सीधी बचत होगी। इस नए ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से इंदौर और हैदराबाद के बीच की भौगोलिक दूरी में करीब 171 किलोमीटर की बड़ी कमी आएगी, जिससे वाहनों का ईंधन बचेगा और माल ढुलाई की लागत में भी भारी गिरावट देखने को मिलेगी। यह 743 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे मध्य प्रदेश के इंदौर, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर जिलों से गुजरते हुए महाराष्ट्र और तेलंगाना के लगभग 20 प्रमुख शहरों को सीधे हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ेगा।
सुरंगों का निर्माण और 80 प्रतिशत काम पूरा
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत इस चार लेन वाले सेमी-एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा किया जा रहा है। इस पूरी परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य सफलता पूर्वक पूरा कर लिया गया है। इंदौर के तेजाजी नगर से लेकर खरगोन जिले के बलवाड़ा तक फैले कठिन और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में सफर को सुगम बनाने के लिए तीन विशेष सुरंगों का निर्माण किया जा रहा है। इनमें 575 मीटर लंबी भेरूघाट सुरंग, 550 मीटर लंबी चोरल घाट सुरंग और 480 मीटर लंबी बाईग्राम सुरंग शामिल हैं। ये तीनों सुरंगें न केवल पहाड़ी रास्तों पर लगने वाले जाम और दुर्घटनाओं से सुरक्षा प्रदान करेंगी, बल्कि तेज गति से वाहनों की आवाजाही भी सुनिश्चित करेंगी। एनएचएआई का लक्ष्य इस महत्वाकांक्षी कॉरिडोर को 2026 के अंत तक पूरी तरह शुरू करने का है।
किसानों, व्यापारियों और उद्योगों के लिए गेम चेंजर
खरगोन जिले के लिए यह एक्सप्रेसवे एक आर्थिक गेम चेंजर की भूमिका निभाने वाला है। अब तक खरगोन से देश के बड़े औद्योगिक केंद्रों तक कृषि उपज और तैयार माल को पहुंचाने में काफी समय और भारी परिवहन खर्च लगता था। लेकिन इस हाई-स्पीड मार्ग के बन जाने से स्थानीय किसानों द्वारा उगाए जाने वाले मुख्य उत्पाद जैसे कपास, मिर्च, केला और अन्य कृषि फसलें बहुत ही कम समय में देश की बड़ी मंडियों तक पहुंच सकेंगी। इससे किसानों को अपनी फसल का बेहतर मूल्य मिलेगा और परिवहन में होने वाला नुकसान भी कम होगा। इसके साथ ही, जिले में लॉजिस्टिक्स पार्क, बड़े वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट हब और कृषि आधारित प्रसंस्करण उद्योगों की स्थापना की संभावनाएं कई गुना बढ़ जाएंगी, जिससे स्थानीय युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर मिलेंगे।
पर्यटन और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई उड़ान
उद्योग और व्यापार के अलावा, इस एक्सप्रेसवे के जरिए मालवा और निमाड़ अंचल में पर्यटन को भी जबरदस्त गति मिलेगी। मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों जैसे ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और महेश्वर के ऐतिहासिक घाटों तक देश भर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की पहुंच बेहद आसान हो जाएगी। हैदराबाद और महाराष्ट्र की ओर से आने वाले पर्यटक सीधे और सुरक्षित मार्ग से इन दार्शनिक स्थलों तक पहुंच सकेंगे, जिससे स्थानीय होटल व्यवसाय, परिवहन और हस्तशिल्प उद्योग को भी आर्थिक लाभ पहुंचेगा। दीर्घकालिक दृष्टिकोण से देखें तो यह 15 हजार करोड़ रुपये की बुनियादी ढांचा परियोजना पूरे खरगोन जिले की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।



















