रायपुर में बीमारी ठीक करने के बहाने महिला से 15 तोला सोना और नकदी ऐंठी, 3 फर्जी साधु फरारदिल्ली के झारखंड भवन में लिफ्ट अटकने से पूर्व सांसद घूरन राम के परिवार के 6 सदस्य हुए अचेत, परिसर में फूटा गुस्सावृश्चिक राशिफल 1 अक्टूबर: आर्थिक फैसलों में बरतें संयम, रिश्तों में धैर्य और सुनने की आदत से बनेगी बातअक्टूबर की शुरुआत में 19 किलो वाला कमर्शियल गैस सिलेंडर हुआ महंगा, जानिए प्रमुख शहरों में नए दामअजय देवगन की दृश्यम 3 के कलाकारों का मेहनताना आया सामने, मुख्य अभिनेता से तब्बू को मिली सात गुना कम रकमसर्दियों में रंग-बिरंगे फूलों से महकेगा घर, अक्टूबर के महीने में गमलों में लगाएं ये सात खास किस्मेंकम सामग्री में घर पर बनाएं छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लाल भाजी और आलू की सूखी सब्जीप्रशांत महासागर में अल नीनो के उभार से कमजोर पड़ा मानसून, 2001 के बाद दर्ज हुई चौथी सबसे सूखी स्थितिबिना फ्राई किए ओवन में बनाएं सुपर क्रिस्पी चिकन श्नाइटल, रसदार स्वाद और कम तेल का आसान तरीकाकिसान के बेटे डॉ. भागचंद बधाल का RAS से IAS कैडर में हुआ प्रमोशन, सरकारी स्कूल से शुरू हुआ था सफर
इंस्टाग्राम पर दोस्त को 'सुंदर' कहना अपराध नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट ने कॉलेज छात्र के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कीकर्नाटक
22 जुल॰ 2026, 3:38 pm (71 दिन पहले)· 0

इंस्टाग्राम पर दोस्त को 'सुंदर' कहना अपराध नहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट ने कॉलेज छात्र के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक 20 साल के कॉलेज छात्र के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला खारिज कर दिया है, जिस पर अपनी 21 साल की महिला सहपाठी को इंस्टाग्राम पर 'सुंदर' कहने का आरोप था। अदालत ने कहा कि निजी बातचीत में आज की पीढ़ी की भाषा का उपयोग करना कोई अपराध नहीं है और पुलिस की कार्रवाई को कानून का दुरुपयोग बताया।

बेंगलुरु के एक 20 वर्षीय कॉलेज छात्र को मंगलवार को बड़ी कानूनी राहत मिली है। इस युवक पर अपनी एक 21 वर्षीय महिला सहपाठी को सोशल मीडिया पर संदेश भेजकर उसकी तारीफ करने के कारण गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। कर्नाटक हाईकोर्ट ने मामले में दखल देते हुए छात्र के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी (एफआईआर) को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। आधुनिक समय की बातचीत के तरीकों पर एक अहम फैसला सुनाते हुए, न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि किसी निजी डिजिटल बातचीत में दोस्त की तारीफ करना कोई आपराधिक कृत्य नहीं है। अदालत ने दृढ़ता से कहा कि आज के दौर की सामान्य शब्दावली का इस्तेमाल करके की गई तारीफ को महिला का पीछा करने या उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाने जैसे गंभीर अपराधों के बराबर नहीं माना जा सकता।

निजी बातचीत पर पुलिस केस

इस पूरे कानूनी विवाद की शुरुआत लोकप्रिय फोटो शेयरिंग प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर हुए एक सीधे संदेश के जरिए हुई थी। याचिकाकर्ता युवक और 21 वर्षीय शिकायतकर्ता युवती कोई अजनबी नहीं थे, बल्कि वे एक ही शिक्षण संस्थान में पढ़ने वाले दोस्त थे। अपनी इस एकांत डिजिटल बातचीत के दौरान, युवक ने अपनी क्लासमेट को प्यारी और सुंदर कहते हुए एक संदेश भेजा था। हालांकि यह बातचीत पूरी तरह से व्यक्तिगत थी और केवल उन दोनों के बीच तक ही सीमित थी, लेकिन हालात तब बिगड़ गए जब युवती के पिता ने इस चैट को देख लिया। चूंकि युवती के पिता एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हैं, इसलिए इस निजी बातचीत ने तुरंत एक औपचारिक पुलिस केस का रूप ले लिया।

ये भी पढ़ें

पिता के संज्ञान में बात आते ही तेजी से पुलिस शिकायत दर्ज करा दी गई। जांच एजेंसियों ने कॉलेज छात्र के खिलाफ देश के नए आपराधिक कानून, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की कई सख्त धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया। इसके अतिरिक्त, पुलिस ने उस पर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की धारा 66ए के तहत भी केस दर्ज किया। इस त्वरित पुलिस कार्रवाई का मतलब था कि दो कॉलेज छात्रों के बीच हुआ एक सामान्य सा संवाद अचानक एक ऐसी गंभीर कानूनी लड़ाई में बदल गया, जिसने युवक की स्वतंत्रता को ही खतरे में डाल दिया था।

आज के दौर की भाषा को समझना

जब यह मामला न्यायपालिका के सामने पहुंचा, तो एकल न्यायाधीश की पीठ की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने स्थिति का बेहद व्यावहारिक नजरिए से आकलन किया। उन्होंने छात्र द्वारा इस्तेमाल किए गए विशिष्ट शब्दों और उस संदर्भ का विश्लेषण किया जिसमें वे शब्द कहे गए थे। न्यायाधीश ने इस शब्दावली को जेन जी लिंगो यानी आज की युवा पीढ़ी द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली आम भाषा के रूप में पहचाना। पीठ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह संवाद पूरी तरह से दो लोगों के बीच की निजी चैट थी, न कि कोई सार्वजनिक घोषणा या कोई अवांछित सार्वजनिक टिप्पणी।

अपना फैसला सुनाते हुए, अदालत ने एक दोस्ताना तारीफ और दुर्भावनापूर्ण व्यवहार के बीच स्पष्ट अंतर रेखांकित किया। कार्यवाही के दौरान अदालत ने कहा, "यह चैट सार्वजनिक नहीं है।" न्यायाधीश ने विस्तार से बताया कि इसमें इस्तेमाल की गई भाषा आधुनिक छात्रों की सामान्य बातचीत शैली को दर्शाती है। इसलिए, किसी निजी स्थान पर सामान्य तौर पर किसी को सुंदर कहना कानूनी रूप से पीछा करने (स्टॉकिंग), छिपकर देखने (वॉयरिज्म), या किसी महिला के सम्मान को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कृत्य की परिभाषा में फिट नहीं बैठता। पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि इस तरह के हानिरहित संवादों पर आपराधिक कानून लागू करना न्याय की घोर गलत व्याख्या है।

कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर रोक

सिर्फ विशिष्ट संदेशों का विश्लेषण करने के अलावा, हाईकोर्ट ने ऐसे मामले दर्ज किए जाने के व्यापक परिणामों पर भी गहरी चिंता व्यक्त की। जस्टिस नागप्रसन्ना ने उन विनाशकारी प्रभावों के बारे में कड़ी चेतावनी दी जो अनुचित आपराधिक मुकदमों के कारण युवाओं पर पड़ सकते हैं। जब छात्रों को मामूली व्यक्तिगत बातों पर आपराधिक न्याय प्रणाली में घसीटा जाता है, तो उनकी पढ़ाई, करियर की संभावनाएं और उनका पूरा भविष्य भारी जोखिम में पड़ जाता है।

पीठ ने घोषणा की कि इस विशेष पुलिस जांच को आगे जारी रहने देना कानूनी प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग होगा। युवक के किसी भी तरह के आगे के उत्पीड़न को रोकने के लिए, अदालत ने दर्ज एफआईआर को सिरे से खारिज कर दिया। इसके अलावा, पुलिस जांच के कारण हुई परेशानी को स्वीकार करते हुए, न्यायाधीश ने जांच अधिकारी को तत्काल आदेश जारी किए। पुलिस को निर्देश दिया गया कि वे जांच के दौरान छात्र से जब्त किए गए सभी व्यक्तिगत सामान तुरंत वापस करें, जिसमें विशेष रूप से उसके इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिना किसी देरी के लौटाना सुनिश्चित किया जाए।

सवाल-जवाब

छात्र के खिलाफ एफआईआर क्यों दर्ज की गई थी?
छात्र ने अपनी महिला सहपाठी को इंस्टाग्राम पर 'सुंदर' कहते हुए एक निजी संदेश भेजा था, जिसे लड़की के आईपीएस पिता ने देख लिया और पुलिस में शिकायत दर्ज करा दी।
यह अहम फैसला किस अदालत ने सुनाया?
यह फैसला कर्नाटक हाईकोर्ट की एकल पीठ के न्यायाधीश जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने सुनाया है।
छात्र पर कौन से कानून लगाए गए थे?
पुलिस ने कॉलेज छात्र के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं और आईटी अधिनियम की धारा 66ए के तहत मामला दर्ज किया था।
चैट की भाषा पर जज ने क्या टिप्पणी की?
न्यायाधीश ने कहा कि बातचीत में इस्तेमाल किए गए शब्द आम 'जेन जी लिंगो' हैं और निजी चैट में ऐसी भाषा का उपयोग पीछा करने या अपराध की श्रेणी में नहीं आता।
छात्र के जब्त किए गए सामान का क्या होगा?
अदालत ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया है कि वे जांच के दौरान जब्त किए गए सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण तुरंत छात्र को वापस कर दें।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp