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जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना देश का सिरमौर, कैच द रेन अभियान के तीसरे चरण में हासिल किया पहला स्थानछत्तीसगढ़
3 सित॰ 2026, 12:00 am (22 दिन पहले)· 2

जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना देश का सिरमौर, कैच द रेन अभियान के तीसरे चरण में हासिल किया पहला स्थान

जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ ने देश भर में पहला स्थान हासिल किया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नई दिल्ली में राज्य के 5 प्रतिशत मॉडल और सामुदायिक भागीदारी की सफलता को साझा किया।

वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा संचालित 'जल संचय जन भागीदारी' (JSJB) और 'कैच द रेन' अभियान के तीसरे चरण में राज्य ने देश भर में पहला स्थान प्राप्त किया है। नई दिल्ली स्थित सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन के दौरान छत्तीसगढ़ के इस जनभागीदारी मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने राज्य में जल संचयन के लिए किए जा रहे व्यापक प्रयासों का ब्योरा प्रस्तुत किया।

राष्ट्रीय मंच पर जल संरक्षण मॉडल की प्रस्तुति

शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य की उपलब्धियों का उल्लेख किया और बताया कि छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण को केवल एक सरकारी योजना तक सीमित नहीं रखा गया है। इसे ग्राम पंचायतों, किसानों और स्थानीय समुदायों के सक्रिय सहयोग से एक व्यापक जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने साझा किया कि वे स्वयं एक किसान के बेटे हैं और उन्होंने अपने गृह गांव बगिया में खेतों में स्वयं हल चलाकर खेती की है। यही मुख्य कारण है कि वे पानी की वास्तविक कीमत और उसकी उपयोगिता को बहुत गहराई से समझते हैं। देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 4 प्रतिशत हिस्सा रखने वाला छत्तीसगढ़ लगातार जल प्रबंधन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और अन्य राज्यों के लिए प्रेरणा बन रहा है।

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कोरिया जिले का 5 प्रतिशत मॉडल और जनभागीदारी

छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण की इस ऐतिहासिक सफलता का एक प्रमुख आधार कोरिया जिले से शुरू हुआ 5 प्रतिशत मॉडल है। इस अभिनव पहल के तहत राज्य के किसान स्वेच्छा से अपनी कुल कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं के निर्माण के लिए समर्पित करते हैं। इस चिह्नित भूमि पर ऐसे जल ढांचे तैयार किए जाते हैं जो बारिश के बहते पानी को रोकते हैं और उसे धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचाते हैं। खेतों में बनाए गए इन तालाबों, गड्ढों और संचयन ढांचों में बारिश का पानी जमा होता है, जो भूमिगत जल स्तर को लगातार समृद्ध बनाता है। इससे न केवल स्थानीय कुओं और बोरवेल का जल स्तर बेहतर हो रहा है, बल्कि कृषि सिंचाई और दैनिक उपयोग के लिए भी पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित हो रही है। इस मॉडल में विभिन्न सरकारी विभागों के आपसी समन्वय, जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग और जल सखी तथा जल मित्र जैसी जमीनी इकाइयों की सक्रिय भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है।

अभियान के तीनों चरणों में आंकड़ों का लेखा-जोखा

जल शक्ति मंत्रालय के 'जल संचय जन भागीदारी' अभियान के तीनों चरणों में छत्तीसगढ़ का प्रदर्शन निरंतर उत्कृष्ट और अनुकरणीय रहा है। अभियान के पहले चरण यानी JSJB 1.0 में राज्य के भीतर कुल 4,05,561 जल संरचनाओं का निर्माण किया गया, जिसके बल पर छत्तीसगढ़ को देश में दूसरा स्थान मिला था। इसके बाद दूसरे चरण यानी JSJB 2.0 के अंतर्गत कुल 24,07,456 जल संरचनाएं पंजीकृत की गईं। इनमें से 23,07,768 संरचनाओं का निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिससे राज्य ने पुनः राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया। अभियान के तीसरे चरण यानी JSJB 3.0 में राज्य ने बड़ी छलांग लगाते हुए देश में पहला स्थान प्राप्त किया। इस तीसरे चरण में राज्य में कुल 79,775 जल संरचनाएं दर्ज की गईं, जिनमें से 77,719 संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है।

शीर्ष 10 जिलों का प्रदर्शन और जल संकट में सुधार

राज्य स्तरीय सफलता के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के कई जिलों ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी धाक जमाई है। केंद्र सरकार द्वारा जारी देश के शीर्ष 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों की सूची में छत्तीसगढ़ के 5 जिलों ने अपनी जगह बनाई है। इनमें सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले शामिल हैं। इन जिलों में ग्रामीण आबादी, ग्राम पंचायतों और स्थानीय स्वयंसेवकों की मदद से जल संरक्षण कार्यों को रिकॉर्ड समय सीमा में पूरा किया गया। इन निरंतर प्रयासों का सीधा सकारात्मक प्रभाव राज्य की भू-जल स्थिति पर दिखने लगा है। छत्तीसगढ़ में अत्यधिक जल संकट से जूझ रहे ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर अब 19 रह गई है। इसके अतिरिक्त, गंभीर जल संकट वाली श्रेणी में शामिल 5 अन्य ब्लॉकों की स्थिति में भी बड़ा सुधार होने और उनके सामान्य श्रेणी में वापस लौटने का अनुमान लगाया गया है।

राज्य की ओर से दिए गए चार प्रमुख सुझाव

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राष्ट्रीय मंच से देशभर में जल संरक्षण को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाने के लिए केंद्र सरकार को चार महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि प्रत्येक राज्य को अपनी विशेष भौगोलिक और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार अपना अलग 'कैच द रेन' प्लान तैयार करना चाहिए। उनका दूसरा सुझाव यह था कि बेहतर काम करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करने के लिए 'स्टेट वाटर अवार्ड्स' की शुरुआत की जानी चाहिए। तीसरे सुझाव में उन्होंने BISAG-N तकनीक के माध्यम से देश की सभी जल संरचनाओं की डिजिटल मैपिंग कराने पर जोर दिया। चौथे सुझाव के रूप में उन्होंने राज्यों के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन महीने में जल संरक्षण कार्यों की अनिवार्य समीक्षा बैठक आयोजित करने की सिफारिश की। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी बताया कि राज्य सरकार पेयजल स्रोतों के संरक्षण और भावी पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

सवाल-जवाब

कैच द रेन अभियान में किस राज्य को देश में पहला स्थान मिला है?
जल शक्ति मंत्रालय के 'जल संचय जन भागीदारी' (JSJB 3.0) और 'कैच द रेन' अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ को देश में पहला स्थान मिला है।
छत्तीसगढ़ का 5 प्रतिशत जल संरक्षण मॉडल क्या है?
इस मॉडल के तहत किसान अपनी कृषि भूमि का 5 प्रतिशत हिस्सा भू-जल पुनर्भरण संरचनाओं और वर्षा जल संचयन के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध कराते हैं।
छत्तीसगढ़ के कौन से जिले देश के शीर्ष 10 में शामिल हुए हैं?
सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम जिले देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।
जल संरक्षण प्रयासों से छत्तीसगढ़ में क्या सुधार आया है?
राज्य में जल की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है और 5 गंभीर ब्लॉकों की स्थिति सामान्य होने का अनुमान है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार को क्या सुझाव दिए हैं?
उन्होंने हर राज्य का अपना 'कैच द रेन' प्लान, 'स्टेट वाटर अवार्ड्स', BISAG-N द्वारा मैपिंग और मुख्य सचिव स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा का सुझाव दिया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·22 दिन पहले

छत्तीसगढ़ की यह सफलता दिखाती है कि जब जल संरक्षण को केवल प्रशासनिक योजना न रखकर सामुदायिक जन-आंदोलन बनाया जाता है, तो भू-जल पुनर्भरण जैसे तकनीकी काम में ज़मीनी स्तर पर ऐतिहासिक परिणाम मिलते हैं। कोरिया जिले का पांच प्रतिशत मॉडल, जिसमें किसानों ने स्वेच्छा से अपनी जमीन का हिस्सा जल संचयन के लिए दिया, यह साबित करता है कि कृषि प्रधान राज्यों में किसानों की सीधी भागीदारी ही सबसे बड़ा और प्रभावी नीतिगत समाधान है। आने वाले समय में उत्तर भारत के उन पहाड़ी और मैदानी राज्यों के लिए भी यह एक बेहतरीन केस स्टडी बन सकता है जो गंभीर जल संकट और घटते भू-जल स्तर से जूझ रहे हैं, बशर्ते इस मॉडल को पारदर्शिता और जियो-टैगिंग के साथ अन्य क्षेत्रों में भी उतनी ही दृढ़ता से लागू किया जाए।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 दिन पहले

छत्तीसगढ़ की यह सफलता दिखाती है कि प्रशासनिक नीतियों को जब जमीनी जन-आंदोलन और स्थानीय समुदायों का साथ मिलता है, तो परिणाम कितने दूरगामी होते हैं। कोरिया जिले के '5 प्रतिशत मॉडल' के तहत किसानों द्वारा स्वेच्छा से जमीन देना और जल सखी व जल मित्र जैसी इकाइयों की सक्रियता ने साबित कर दिया है कि विकेंद्रीकृत भू-जल प्रबंधन राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत प्रेरणा बन सकता है। आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए इस सामुदायिक सहभागिता मॉडल को अपनाना जल सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

छत्तीसगढ़ की इस सफलता का आर्थिक और कृषि बाजार पर गहरा असर पड़ेगा। जब कृषि भूमि के पाँच प्रतिशत हिस्से का उपयोग भू-जल पुनर्भरण के लिए होता है, तो दीर्घकालिक रूप से भू-जल स्तर सुधरता है। इससे सिंचाई के लिए पानी की अनिश्चितता कम होती है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिर और मजबूत बनाने में मदद करता है। निवेशक और नीति निर्माता इस बात को समझते हैं कि जल सुरक्षा ही टिकाऊ कृषि और ग्रामीण विकास की मूल नींव है, जिससे आने वाले वित्तीय वर्षों में फसल उत्पादन और कृषि-संबद्ध उद्योगों को भी मजबूती मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

छत्तीसगढ़ का यह जल प्रबंधन मॉडल सिर्फ एक कृषि या पर्यावरण उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग और सामुदायिक सुरक्षा से जुड़ा एक अहम मामला है। जल संरक्षण सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था, भू-जल स्तर की स्थिरता और भविष्य के जल संकट से जुड़े अपराधों या विवादों को रोकने में मदद करता है। यदि इस जनभागीदारी मॉडल और जियो-टैगिंग की प्रक्रिया को कड़ाई से लागू किया जाए, तो यह सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता का एक पुख्ता कानूनी और सामाजिक ढांचा बन सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

रोहन वर्मा के अनुसार, छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले से उपजा '5 प्रतिशत मॉडल' और 'जल सखी' जैसी जमीनी इकाइयों की सक्रियता यह साबित करती है कि शासन में जब स्थानीय समुदायों को जोड़ा जाता है, तो भू-जल पुनर्भरण जैसे तकनीकी काम भी जन-आंदोलन बन जाते हैं। यह सफलता केवल कृषि सिंचाई को सुदृढ़ नहीं करती, बल्कि ग्रामीण स्तर पर पानी के अभाव से पैदा होने वाले संभावित सामाजिक तनावों और संघर्षों को रोकने में भी एक प्रभावी प्रशासनिक ढाल का काम कर सकती है।

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