भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने देश भर में सक्रिय मानसून को लेकर एक व्यापक और बेहद अहम चेतावनी जारी की है, जिसमें 25 जुलाई तक भारत के कई बड़े हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। मौसम विभाग के ताजा बुलेटिन के अनुसार, उत्तर-पश्चिम, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में अगले एक सप्ताह तक मौसम का मिजाज बेहद आक्रामक रहने वाला है, जिससे आम जनजीवन के बुरी तरह प्रभावित होने की पूरी आशंका है। इसके विपरीत, पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां अपेक्षाकृत थोड़ी सुस्त रहेंगी। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पहले ही कई उत्तरी इलाकों में भारी तबाही मचा दी है, जिसके चलते स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमों को आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल आपातकालीन कदम उठाने पड़े हैं।
पहाड़ी राज्यों में बारिश का कहर
मौजूदा समय में नाजुक हिमालयी क्षेत्र मानसून के सबसे भयंकर रूप का सामना कर रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही का मंजर पैदा कर दिया है। यहां कई जिलों में अचानक आई बाढ़ (फ्लैश फ्लड), बादल फटने की डरावनी घटनाओं और भयानक भूस्खलन (लैंडस्लाइड) की वजह से बड़े पैमाने पर संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया है और जनजीवन संकट में पड़ गया है। मौसम विभाग ने स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए चेतावनी दी है कि जम्मू-कश्मीर में 20 से 22 जुलाई के बीच अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल आशंका है, जो मौजूदा संकट को और गहरा कर सकती है।
पड़ोसी पहाड़ी राज्यों में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। उत्तराखंड में खराब मौसम और भारी बारिश के खतरे को देखते हुए, राज्य प्रशासन ने ऐहतियात के तौर पर सोमवार, 20 जुलाई को सभी सरकारी और निजी स्कूलों को बंद रखने का सख्त निर्देश दिया है, ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। राज्य में 19 और 20 जुलाई को मूसलाधार वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। इसी तरह, हिमाचल प्रदेश में भी मौसम के बेहद खराब रहने की चेतावनी दी गई है, जहां 20 और 21 जुलाई को भयानक बारिश होने का स्पष्ट पूर्वानुमान है। इसके अलावा, पूरे उत्तर-पश्चिम भारत, जिसमें हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड शामिल हैं, में 25 जुलाई तक बिना रुके व्यापक रूप से बारिश का दौर जारी रहेगा, जिसके लिए लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।
मैदानी इलाकों में मानसून की रफ्तार
पहाड़ों से नीचे मैदानी क्षेत्रों की बात करें, तो वहां भी मूसलाधार बारिश से कोई राहत मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है। हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब के निवासियों को 20 से 23 जुलाई के बीच तेज बारिश के लंबे दौर के लिए तैयार रहने को कहा गया है, जिससे शहरी इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो सकती है। वहीं, देश के सबसे बड़े सूबे उत्तर प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में 24 जुलाई तक अच्छी खासी और लगातार बारिश दर्ज होने का अनुमान है।
पड़ोसी राज्य राजस्थान में भी मौसम तेजी से करवट ले रहा है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, पूर्वी राजस्थान में 23 से 25 जुलाई के दौरान बारिश का दौर काफी तेज रहेगा, जबकि अमूमन सूखे रहने वाले पश्चिमी राजस्थान के भी कई इलाकों में इस बार अच्छी वर्षा देखने को मिल सकती है। हालात की गंभीरता को देखते हुए, मौसम विभाग ने जम्मू-कश्मीर, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में तेज गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने का कड़ा अलर्ट भी जारी किया है। इन राज्यों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने का भी अनुमान है, जिससे पेड़ों के उखड़ने, कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचने और बिजली आपूर्ति बुरी तरह बाधित होने का खतरा बना रहेगा।
पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए रेड अलर्ट
भारत के पूर्वी और पूर्वोत्तर हिस्सों में भी मौसम के मोर्चे पर अत्यधिक खराब हालात की चेतावनी दी गई है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार, ओडिशा और सिक्किम में अगले 7 दिनों तक बारिश का सिलसिला अनवरत जारी रहेगा। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम के लिए तो अत्यंत भारी बारिश का विशेष रेड अलर्ट जारी किया गया है, जहां बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसके साथ ही, बिहार, झारखंड और ओडिशा के कई जिलों में भारी बारिश और तेज हवाओं की वजह से जनजीवन और कृषि प्रभावित होने की आशंका है।
पूर्वोत्तर भारत के राज्यों जैसे अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी 25 जुलाई तक भारी से बहुत भारी बारिश का दौर चलने वाला है। मेघालय में अत्यंत भारी बारिश की गंभीर चेतावनी जारी की गई है। इस मूसलाधार बारिश का बुरा असर वहां के बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा है; पूर्वोत्तर के कई हिस्सों में तेज बारिश के कारण प्रमुख सड़कें कट गई हैं और कई दूरदराज के इलाकों का संपर्क पूरी तरह से टूट गया है। असम और अन्य पड़ोसी राज्यों में भी कई स्थानों पर मौसम बेहद खराब रहने और नदियों का जलस्तर बढ़ने का अनुमान है।
मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत का हाल
मध्य भारत के राज्यों में भी आने वाले दिनों में अच्छी बारिश और तूफानी मौसम की उम्मीद है। छत्तीसगढ़, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के साथ-साथ विदर्भ क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की भविष्यवाणी की गई है। छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में तो बहुत भारी वर्षा होने की प्रबल संभावना है। इन सभी मध्य भारतीय राज्यों में बारिश के साथ तेज तूफानी हवाओं और गरज-चमक का भी पूर्वानुमान है।
पश्चिमी भारत के तटीय इलाकों में मानसून की सक्रियता पूरी तरह से बरकरार है। कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र और गुजरात क्षेत्र में लगातार बारिश का दौर चलता रहेगा। हालांकि, दक्षिण भारत की तरफ बढ़ने पर मानसूनी बारिश का जोर थोड़ा कम नजर आता है। केरल, तटीय कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के अंदरूनी हिस्सों में मुख्य रूप से हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि कुछ सीमित स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है। समग्र रूप से, देश के बाकी हिस्सों की तुलना में पश्चिम-मध्य और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में मानसूनी बारिश कुछ हद तक कमजोर और नियंत्रित रहेगी।
सुरक्षा उपाय और मौसम विभाग की अहम सलाह
खराब मौसम के इस व्यापक और खतरनाक पूर्वानुमान को देखते हुए, भारत मौसम विज्ञान विभाग ने खतरे वाले राज्यों और इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बेहद जरूरी सुरक्षा दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने आम जनता से पुरजोर अपील की है कि वे उफनती नदियों, तेज बहाव वाले नालों और भूस्खलन की आशंका वाले पहाड़ी क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। लोगों को सख्त सलाह दी गई है कि वे जब तक मौसम साफ न हो जाए, तब तक बिना किसी जरूरी काम के यात्रा करने से बचें और आपदा प्रबंधन तथा स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी की जा रही ताजा चेतावनियों का पूरी तरह से पालन करें।


















