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जन्माष्टमी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील, विरासत और सामाजिक समरसता को बनाएं जीवन का आधारउत्तर प्रदेश
31 अग॰ 2026, 9:38 am (59 दिन पहले)· 3

जन्माष्टमी पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अपील, विरासत और सामाजिक समरसता को बनाएं जीवन का आधार

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की बधाई दी है और समाज के हर वर्ग के साथ खड़े रहने के संदेश को अपनाने की अपील की है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों के नाम अपने संदेश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने इस पावन पर्व पर जनता से अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करने, समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखने और एक उन्नत एवं गौरवशाली उत्तर प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेने का आह्वान किया है।

श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन और संदेश

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्य रात्रि को मथुरा के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था, जिससे अन्याय और असत्य के अंधकार के बीच सत्य और धर्म का प्रकाश फैला था। उन्होंने उल्लेख किया कि भगवान की बाल लीलाएं केवल आनंद देने वाली कथाएं नहीं हैं, बल्कि उनमें गहरे आध्यात्मिक मूल्य छिपे हुए हैं। माखन चोरी में सरलता, गोपियों के साथ प्रेम और आत्मीयता में समरसता तथा कालिय नाग के वध से अधर्म पर धर्म की जीत का संदेश मिलता है।

प्रकृति और सामूहिक सहकारिता का महत्व

भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें यह सिखाता है कि समाज की असली ताकत सामूहिक सहकारिता में बसती है। गोवर्धन पर्वत को उठाकर उन्होंने पर्यावरण, पशुओं और कृषि पर आधारित जीवन शैली की रक्षा करने के साथ-साथ सबको एकजुट रहने का बड़ा संदेश दिया था। वृंदावन, बरसाना और नंदगांव की गलियों में आज भी वह दिव्य चेतना महसूस की जा सकती है।

समरसता और सच्चे रिश्तों की मिसाल

श्रीकृष्ण केवल उच्च वर्ग या कुलीनता के नहीं बल्कि सामाजिक समरसता के प्रतीक माने जाते हैं, जो हमेशा समाज के हर तबके के साथ खड़े नजर आए। वे एक तरफ द्वारकाधीश हैं तो दूसरी तरफ सुदामा के सच्चे और आत्मीय मित्र भी हैं। सांदीपनि आश्रम में शिक्षा ग्रहण करने वाले श्रीकृष्ण ने सुदामा के साथ अपनी दोस्ती से यह साबित कर दिया कि रिश्ते पद और धन से नहीं बल्कि दिल से जुड़ते हैं। आज के समय में इसी समानता और आत्मीयता की सबसे ज्यादा जरूरत है।

लोककल्याणकारी शासन की प्रेरणा

योगेश्वर श्रीकृष्ण का जीवन शासन की उन मूल भावनाओं से परिचित कराता है जिनका उद्देश्य जनता का कल्याण करना है। अन्याय का विरोध करना, धर्म की रक्षा करना, कमजोर वर्ग की सुरक्षा करना और सबका भला करना उनके दर्शन के मुख्य स्तंभ रहे हैं। वर्तमान सरकार भी इन्हीं आदर्शों पर चलते हुए समाज के सबसे निचले पायदान पर मौजूद व्यक्ति को सम्मान और सुरक्षा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।

उत्तर प्रदेश में लोककल्याण के प्रयास

प्रदेश सरकार गरीबी को दूर करने, प्रतिभाशाली युवाओं को रोजगार के अवसर देने, किसानों को संबल प्रदान करने और बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने के मौके देने के लिए काम कर रही है। गीता के माध्यम से श्रीकृष्ण ने कर्म और कर्तव्य का जो मार्ग दिखाया है, वह हर युग की चुनौतियों से निपटने में मददगार साबित होता है। मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव जैसे पवित्र स्थल हमारी सनातन संस्कृति के जीवित प्रतीक हैं।

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सवाल-जवाब

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनता को क्या संदेश दिया है?
मुख्यमंत्री ने श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर जनता से विरासत के संरक्षण और सामाजिक समरसता का संकल्प लेने की अपील की है।
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म कहाँ हुआ था?
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की अर्धरात्रि को हुआ था।
संदेश में उत्तर प्रदेश के किन प्रमुख धार्मिक स्थलों का जिक्र है?
संदेश में मथुरा, गोकुल, वृंदावन, गोवर्धन, बरसाना और नंदगांव का उल्लेख किया गया है।
श्रीकृष्ण का जीवन हमें क्या सिखाता है?
उनका जीवन समाज की शक्ति सामूहिक सहकारिता में निहित होने और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
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