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जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर रहेगा खास आयोजन, 3100 किलो मेहंदी और नौलखा हार से सजेगा दरबारराजस्थान
13 सित॰ 2026, 2:17 pm (12 दिन पहले)· 0

जयपुर के प्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी पर रहेगा खास आयोजन, 3100 किलो मेहंदी और नौलखा हार से सजेगा दरबार

जयपुर स्थित मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का भव्य पर्व मनाया जाएगा। इस अवसर पर 150 साल पुरानी परंपरा के अनुसार भगवान गजानन को विशेष नौलखा हार और 3100 किलो मेहंदी अर्पित की जाएगी।

राजस्थान की राजधानी जयपुर में गणेश चतुर्थी उत्सव को लेकर व्यापक तैयारियां जारी हैं। शहर के सुप्रसिद्ध मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में इस पर्व पर वर्षों पुरानी परंपराएं निभाई जाती हैं। करीब 150 साल पुरानी श्रृंगार परंपरा के तहत भगवान गणेश का अद्भुत और भव्य रूप में अभिषेक व सजावट की जाती है। इस वर्ष 14 सितंबर को मंदिर में गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी, जिसके लिए भक्तों और मंदिर प्रशासन की ओर से विशेष भव्य तैयारियां की जा रही हैं। सिंजारा और मेहंदी उत्सव के साथ शुरू होने वाले इन कार्यक्रमों में हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं।

3 महीने की मेहनत से तैयार होता है नौलखा हार

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी के मुख्य अवसर पर भगवान गणपति को ऐतिहासिक नौलखा हार पहनाया जाता है। इस विशेष हार को तैयार करने में महंत परिवार को लगभग 3 महीने का समय लगता है। इसे बनाने की प्रक्रिया में 3 किलो लाख की चपड़ी को पिघलाया जाता है और प्राकृतिक रंगों तथा फॉइल्स की मदद से सुंदर फूल तैयार किए जाते हैं। इस हार में सोने, पन्ने, हीरे और रूबी जैसे अमूल्य रत्नों को जड़ा जाता है, जिससे इसका स्वरूप अत्यंत आकर्षक हो जाता है।

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रत्नजड़ित मुकुट और चांदी की धोती से दिव्य सजावट

नौलखा हार के अलावा, भगवान गजानन के विशेष श्रृंगार में अन्य पारंपरिक पोशाकें और आभूषण भी शामिल होते हैं। भगवान को रत्नों से जड़ा हुआ स्वर्ण मुकुट पहनाया जाता है। इसके साथ ही, गजानन के ननिहाल से आई कोलकाता की विशेष जरदोजी और रत्नजड़ित पोशाक, चांदी की धोती, सोने और चांदी के कड़े, कुंडल तथा पारंपरिक आयुध भी धारण कराए जाते हैं। यह 150 साल पुरानी परंपरा मंदिर की विशिष्ट पहचान बन चुकी है।

200 साल पुरानी परंपरा: 3100 किलो मेहंदी का अर्पण

मंदिर की एक और अनूठी मान्यता 200 वर्षों से चली आ रही मेहंदी अर्पण की परंपरा है। गणेश चतुर्थी के अवसर पर सोजत और जयपुर से मंगवाई गई कुल 3100 किलो मेहंदी भगवान गणपति को अर्पित की जाएगी। मेहंदी और सिंजारा उत्सव के दौरान श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ता है। इस दौरान भक्तों में प्रसाद स्वरूप मेहंदी प्राप्त करने के लिए विशेष उत्साह देखा जाता है।

सुरक्षा व्यवस्था और AI कैमरों से निगरानी

श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन और पुलिस विभाग ने पुख्ता इंतजाम किए हैं। दर्शनार्थियों की सुविधा के लिए अनुशासित कतारों की व्यवस्था बनाई गई है। सुरक्षा के लिहाज से मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। इसके अलावा, भीड़ को नियंत्रित करने और आने वाले श्रद्धालुओं की सटीक संख्या का आकलन करने के लिए आधुनिक AI कैमरों के जरिए कड़ी निगरानी रखी जा रही है।

14 सितंबर को आरती और दर्शन का समय

गणेश चतुर्थी पर 14 सितंबर को सुबह से लेकर रात तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान और आरतियां आयोजित की जाएंगी। समय सारणी निम्नलिखित है

  • सुबह 5:00 बजे: मंगला आरती के साथ दर्शन प्रारंभ होंगे।
  • दोपहर 12:00 बजे: भगवान गणेश का विशेष पूजन किया जाएगा।
  • दोपहर 12:15 बजे: भोग आरती का आयोजन होगा।
  • दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक: भोग के चलते मंदिर के पट मंगल बंद रहेंगे।
  • दोपहर 3:00 बजे: श्रृंगार आरती आयोजित की जाएगी।
  • शाम 7:00 बजे: संध्या आरती संपन्न होगी।

15 सितंबर को निकलेगी भव्य नगर भ्रमण शोभायात्रा

गणेश चतुर्थी के अगले दिन यानी 15 सितंबर को भगवान गणपति भव्य शोभायात्रा के रूप में नगर भ्रमण पर निकलेंगे। यह शोभायात्रा शाम के समय मोतीडूंगरी मंदिर से रवाना होगी। शोभायात्रा का मार्ग मोतीडूंगरी मंदिर से शुरू होकर एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड से होते हुए अंतिम पड़ाव गढ़ गणेश मंदिर तक पहुँचेगा। इस शोभायात्रा में हजारों की संख्या में शहरवासी शामिल होकर भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करेंगे।

सवाल-जवाब

मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में गणेश चतुर्थी कब मनाई जाएगी?
मोतीडूंगरी गणेश मंदिर में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी मनाई जाएगी।
भगवान गणेश के नौलखा हार की क्या खासियत है?
यह हार महंत परिवार द्वारा 3 महीने में 3 किलो लाख की चपड़ी, प्राकृतिक रंगों, सोने, पन्ने, हीरे और रूबी से तैयार किया जाता है।
गणेश चतुर्थी पर मंदिर में कितनी मेहंदी अर्पित की जाएगी?
इस अवसर पर 200 साल पुरानी परंपरा निभाते हुए सोजत और जयपुर से मंगवाई गई 3100 किलो मेहंदी अर्पित की जाएगी।
14 सितंबर को पट मंगल (बंद) का समय क्या रहेगा?
भोग के कारण दोपहर 1:00 बजे से 2:00 बजे तक मंदिर के पट बंद रहेंगे।
15 सितंबर को निकलने वाली शोभायात्रा का मार्ग क्या है?
शोभायात्रा मोतीडूंगरी मंदिर से शुरू होकर एमडी रोड, जौहरी बाजार, त्रिपोलिया बाजार, गणगौरी बाजार और नाहरगढ़ रोड होते हुए गढ़ गणेश मंदिर पहुंचेगी।
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