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जयपुर में चार करोड़ का फायर सिस्टम फेल, पुरोहित जी के कटले में आग से पच्चीस दुकानें खाकराजस्थान
18 सित॰ 2026, 11:40 am (7 दिन पहले)· 2

जयपुर में चार करोड़ का फायर सिस्टम फेल, पुरोहित जी के कटले में आग से पच्चीस दुकानें खाक

जयपुर के पुरोहित जी के कटले में लगी भीषण आग ने करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। चार करोड़ की लागत से लगाया गया ऑटोमैटिक फायर फाइटिंग सिस्टम पूरी तरह से विफल साबित हुआ।

राजधानी जयपुर के मध्य स्थित चारदीवारी इलाके के पुरोहित जी के कटले में गुरुवार की सुबह एक भयानक आग भड़क उठी। इस भीषण अग्निकांड में पच्चीस से अधिक दुकानें पूरी तरह से जलकर खाक हो गईं और व्यापारियों को करोड़ों रुपये का भारी नुकसान उठाना पड़ा। इस घटना ने स्मार्ट सिटी के तहत किए जाने वाले बड़े-बड़े दावों की पोल खोल दी है। लगभग तेरह घंटे तक सुलगती रही इस आग ने स्थानीय प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, जिससे यह साफ हो गया है कि सुरक्षा के नाम पर सरकारी धन का किस तरह दुरुपयोग हुआ है।

चार करोड़ का फायर सिस्टम साबित हुआ नाकारा

घटनास्थल की जांच और वहां के हालात ने उन दावों की सच्चाई बयां कर दी है जो चार साल पहले चार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से लगाए गए ऑटोमैटिक फायर फाइटिंग सिस्टम को लेकर किए गए थे। कागजों में स्मार्ट सिटी के अधिकारी भले ही अपनी पीठ थपथपाते रहे हों, लेकिन यह आधुनिक सुरक्षा तंत्र मौके पर एक सफेद हाथी साबित हुआ। दस्तावेजों के अनुसार, पिछले चौदह वर्षों के दौरान यहां छह बार मॉक ड्रिल के सफल होने का दावा किया गया था। इस दौरान छोटी दमकलें और फायर टेंडर भी खरीदे गए थे, लेकिन जब असल में आपदा आई, तो इनमें से एक भी वाहन मौके पर नजर नहीं आया। हालांकि फायर स्टेशन घटनास्थल से केवल एक दशमलव सात किलोमीटर की दूरी पर ही स्थित था, लेकिन संकरी गलियों के कारण दमकलकर्मियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

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बिना पानी और टेस्टिंग के चल रहा था सिस्टम

ग्राउंड जीरो पर सामने आए हालात से कई गंभीर लापरवाहियां खुलकर सामने आई हैं। चार करोड़ रुपये की लागत से फायर सिस्टम स्थापित तो कर दिया गया था, लेकिन उसमें न तो पानी का कनेक्शन चालू किया गया था और न ही उसे होज पाइप से जोड़ा गया था। पिछले तीन सालों से इस उपकरण का कोई भी उचित परीक्षण या ट्रायल नहीं किया गया था, जिसके चलते पानी की लाइनें पूरी तरह सूखी पड़ी थीं। इसके अलावा, इस पूरी प्रणाली की डिजाइनिंग में भी भारी खामियां थीं। फायर सिस्टम के नोजल और पाइप को बीस फीट की ऊंचाई पर लगा दिया गया था, जबकि आग दुकानों के निचले हिस्से में लगी थी। जमीन की तरफ पानी का छिड़काव करने के लिए कोई भी नोजल मौजूद नहीं था।

विभागों की लापरवाही और भारी अतिक्रमण

यह पूरा फायर सिस्टम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत लगाया गया था और बाद में इसे हेरिटेज नगर निगम को सौंपा जाना था। दोनों ही विभागों के बीच इसके रखरखाव और जवाबदेही को लेकर भारी लापरवाही बरती गई, और जंग खा चुके इस तंत्र की सुध किसी ने नहीं ली। इसके अतिरिक्त, कटले के भीतर सीढ़ियों और रास्तों पर व्यापारियों द्वारा ही दुकानें सजाकर और सामान रखकर भारी अतिक्रमण किया गया था। इस वजह से न तो छोटी दमकलें अंदर प्रवेश कर सकीं और न ही बचाव दल को कोई सुगम रास्ता मिल पाया। गलियां इतनी संकरी थीं कि मुख्य दमकल गाड़ियों को तीन सौ मीटर की दूरी पर ही रोकना पड़ा, और पाइप जोड़ते-जोड़ते पानी का प्रेशर भी समाप्त हो गया।

अवैध निर्माण और टला एक बड़ा खतरा

जिस सेठी कॉम्प्लेक्स से इस आग की शुरुआत हुई थी, वहां बिना किसी फायर एनओसी के नियमों को ताक पर रखकर एक रूफटॉप रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था। इस इमारत में वेंटिलेशन के रास्तों को पूरी तरह बंद कर दिया गया था और वहां व्यावसायिक गैस सिलेंडर अवैध रूप से रखे गए थे। हालांकि, गनीमत यह रही कि यह घटना सुबह सात बजे हुई और स्थानीय नागरिकों ने सूझबूझ दिखाते हुए समय रहते रेस्टोरेंट से पांच गैस सिलेंडर बाहर निकाल लिए। यदि ऐसा न होता तो भीषण धमाके हो सकते थे और पूरा कटला चपेट में आ जाता। यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की घोर उदासीनता का परिणाम है। यदि भविष्य में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए, तो जयपुर के बाजारों में किसी बड़ी अनहोनी को टालना मुश्किल होगा।

सवाल-जवाब

जयपुर में आग की यह घटना कहां हुई?
यह भीषण आग जयपुर के चारदीवारी क्षेत्र के हृदय स्थल स्थित पुरोहित जी के कटले में लगी।
यह अग्निकांड कब शुरू हुआ?
यह भयंकर आग गुरुवार की सुबह लगभग सात बजे भड़की थी।
कितनी दुकानों को नुकसान पहुंचा है?
इस भीषण अग्निकांड में पच्चीस से अधिक दुकानें जलकर पूरी तरह राख हो गईं।
आग बुझाने में कितना समय लगा?
लगभग तेरह घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
फायर फाइटिंग सिस्टम क्यों फेल हो गया?
चार करोड़ की लागत से बना यह सिस्टम पानी के कनेक्शन से नहीं जुड़ा था और पिछले तीन साल से इसकी कोई टेस्टिंग नहीं हुई थी।
दमकल गाड़ियों को आने में क्या परेशानी आई?
कटले के अंदर व्यापारियों द्वारा किए गए भारी अतिक्रमण और संकरी गलियों के कारण दमकल गाड़ियां मौके तक नहीं पहुंच सकीं।
आग की शुरुआत किस कॉम्प्लेक्स से हुई?
इस आग की शुरुआत सेठी कॉम्प्लेक्स से हुई थी जहां अवैध रूप से रूफटॉप रेस्टोरेंट चलाया जा रहा था।
बड़ा हादसा कैसे टल गया?
स्थानीय लोगों की सूझबूझ से सुबह ही रेस्टोरेंट से पांच गैस सिलेंडर सुरक्षित बाहर निकाल लिए गए, जिससे बड़ा धमाका टल गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

यह घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि आपराधिक लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा के साथ खिलवाड़ का गंभीर मामला है। चार करोड़ रुपये का अग्निशमन तंत्र कागजों तक सीमित रहना और वर्षों तक बिना पानी के पड़ा रहना प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है। इस मामले में संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात और कर्तव्य में लापरवाही की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। केवल आर्थिक नुकसान की भरपाई पर्याप्त नहीं है, निष्पक्ष जाँच के जरिए जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

करण जी की बात बिल्कुल सही है। यह मामला शहरी बुनियादी ढांचा प्रबंधन की गहरी विफलता को रेखांकित करता है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के तहत उपकरण लगाने पर तो भारी बजट खर्च होता है, लेकिन विभागों के बीच हस्तांतरण और नियमित रखरखाव की कोई पारदर्शी नीति नहीं होती। जब तक जनहित के ऐसे तंत्रों के लिए थर्ड-पार्टी सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य नहीं किया जाता और नगर निगम व प्रोजेक्ट डेवलपर के बीच जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक ऐसी योजनाएं विफल होती रहेंगी। साथ ही, संकरे व्यावसायिक बाजारों में अतिक्रमण हटाने के सख्त नीतिगत कदम उठाना भी अत्यंत आवश्यक है।

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